गर्भ में पल रही ज़िंदगी और टूटता भरोसा: रायबरेली की मुस्लिम महिला को क्यों नहीं मिल रहा इंसाफ?

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रिपोर्ट: संदीप मिश्रा, रायबरेली, उत्तर प्रदेश, कड़क टाइम्स

रायबरेली शहर की एक गर्भवती मुस्लिम महिला पिछले कई महीनों से न्याय की गुहार लगाते हुए थानों और सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रही है। छह माह की गर्भावस्था में भी उसे चैन नहीं है, क्योंकि उसका कहना है कि उसका पति रहस्यमय तरीके से उससे अलग कर दिया गया और उसके घर का सारा सामान भी कथित रूप से जबरन उठा लिया गया। महिला का आरोप है कि जिन लोगों ने यह सब किया वे खुद को CBI और STF का अधिकारी बताकर आए थे और उनकी दबंगई के सामने वह बेबस रह गई।

पीड़िता के मुताबिक उसका पति दीनू सिंह, निवासी बड़ेरवा थाना डलमऊ, पहले से शादीशुदा था, लेकिन उसने यह बात छुपाकर उसे शादी का भरोसा दिलाया। बाद में समझौते के तहत दोनों ने विवाह भी किया, मगर अब वही पति उसे छोड़कर अपनी पहली पत्नी के पास लौट गया है। महिला का कहना है कि वह इस समय गंभीर मानसिक और शारीरिक पीड़ा से गुजर रही है, क्योंकि वह एक बच्चे की मां बनने वाली है और उसका भविष्य भी इसी विवाद में उलझ गया है।

महिला ने पुलिस को पहले ही यह आशंका दर्ज कराई थी कि उसके पति के साथ कोई बड़ी अनहोनी हो सकती है, लेकिन उसकी बातों को हल्के में लिया गया। कुछ समय बाद आगरा के शमशाबाद शहीद नगर स्थित उसके किराए के मकान और व्यवसाय स्थल पर कुछ लोग पहुंचे, जिन्होंने खुद को जांच एजेंसियों का अधिकारी बताया। महिला के अनुसार वे लोग उसके पति को साथ लाए और घर से पूरा सामान उठाकर ले गए। इस पूरी घटना की जानकारी उसकी घरेलू सहायिका ने दी और बताया कि उसने इसका वीडियो भी बनाया है, जो अब सोशल मीडिया पर सामने आ चुका है।

पीड़िता का कहना है कि उसने तीन बार मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत भेजकर अपने पति को सुरक्षित वापस दिलाने और आरोपियों पर कार्रवाई की मांग की है, लेकिन उसे सिर्फ औपचारिक जवाब मिल रहे हैं। पुलिस की एक रिपोर्ट में यह लिख दिया गया कि उसका पति अपनी पहली पत्नी के साथ रह रहा है और महिला को धारा 494 के तहत अदालत जाने की सलाह दे दी गई, जबकि घर का सामान ले जाने और फर्जी अधिकारियों द्वारा छापेमारी जैसे गंभीर मुद्दों को रिपोर्ट में जगह ही नहीं दी गई।

महिला का आरोप है कि जिन लोगों पर उसने उंगली उठाई है, वे बेहद प्रभावशाली हैं। उसका कहना है कि जब वे रायबरेली से आगरा जाकर बेखौफ होकर घर खाली कर सकते हैं तो जिले के भीतर किसी के साथ भी कुछ भी कर सकते हैं। इसी डर के कारण वह बार-बार प्रशासन से सुरक्षा की भी मांग कर रही है।

इस पूरे मामले ने कानून व्यवस्था और महिला सुरक्षा पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ एक गर्भवती महिला अपने पति और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही है, दूसरी तरफ सिस्टम की चुप्पी उसकी मुश्किलें बढ़ा रही है। Local media और social platforms पर यह मामला तेजी से trending बन रहा है और लोग जानना चाहते हैं कि क्या एक कमजोर महिला को उसकी आस्था और पहचान के कारण अनदेखा किया जा रहा है।


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