कोल्हमपुर गांव में दो परिवारों में मातम, जनप्रतिनिधियों ने पहुंचकर व्यक्त की संवेदना

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रिपोर्टर: आशीष श्रीवास्तव, ब्यूरो चीफ उत्तर प्रदेश
स्थान: कोल्हमपुर, जनपद गोंडा
तिथि: 8 जून 2025

विधानसभा क्षेत्र मनकापुर के विकास खंड नवाबगंज अंतर्गत ग्राम पंचायत कोल्हमपुर आज शोक की चपेट में रहा। गांव के दो प्रतिष्ठित परिवारों में एक ही दिन दुःखद घटनाएं घटित हुईं, जिससे समूचा क्षेत्र भावुक हो उठा।

पहली घटना में अशोक कुमार सिंह के बड़े भाई की एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई, वहीं दूसरी ओर इसी गांव के निवासी ललित श्रीवास्तव की माता जी का भी आज देहांत हो गया।

सड़क दुर्घटना में हुई मृत्यु से गांव में शोक

जानकारी के अनुसार अशोक कुमार सिंह के बड़े भाई एक निजी कार्य से बाहर गए थे, इसी दौरान सड़क दुर्घटना हो गई। इस खबर से परिवार के साथ-साथ पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। मृतक व्यक्ति मिलनसार स्वभाव के और सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय थे।

जनप्रतिनिधियों ने की संवेदना व्यक्त

इन दोनों दुःखद घटनाओं की जानकारी मिलते ही क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि और पार्टी पदाधिकारी प्रभावित परिवारों से मिलने पहुंचे।

इस अवसर पर भारत सरकार के केंद्रीय राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह (राजा भैया) के प्रतिनिधि कमलेश पांडे, विधायक मनकापुर रमापति शास्त्री के प्रतिनिधि वेद प्रकाश दूबे, मंडल अध्यक्ष रवि श्रीवास्तव, प्रिंस श्रीवास्तव, आनंद पांडे, अमृत श्रीवास्तव और बाबी चौहान मौजूद रहे।

सभी ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर गहरी संवेदना प्रकट की और कहा कि इस कठिन घड़ी में वे परिजनों के साथ हैं। साथ ही प्रशासनिक स्तर पर हर संभव मदद दिलवाने का आश्वासन भी दिया।

सामाजिक सौहार्द की मिसाल

इस प्रकार की दुखद घड़ियों में जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति यह दर्शाती है कि जनसेवा केवल भाषणों तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीन पर जाकर लोगों से जुड़ना भी उसका अभिन्न हिस्सा है। गांव के वरिष्ठ नागरिकों ने भी इन प्रतिनिधियों के प्रयासों की सराहना की और इसे “सच्ची सामाजिक जिम्मेदारी” करार दिया।

सोशल मीडिया पर भी श्रद्धांजलि

जैसे ही ये दोनों दुखद समाचार सामने आए, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे फेसबुक और व्हाट्सऐप पर शोक संदेशों का सिलसिला शुरू हो गया। लोगों ने मृतकों के साथ बिताए पलों को साझा किया और श्रद्धांजलि अर्पित की।

निष्कर्ष

ग्राम पंचायत कोल्हमपुर में आज का दिन अत्यंत दुखद रहा, लेकिन सामाजिक एकजुटता और जनप्रतिनिधियों की सक्रियता ने यह संदेश दिया कि दुःख की घड़ी में समाज एकजुट होता है। यह रिपोर्ट केवल समाचार नहीं है, बल्कि एक सामाजिक प्रतिबिंब भी है जिसमें जनसेवा, संवेदनशीलता और मानवीयता का संदेश छिपा है।

 


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