संविधान की शपथ भूलकर डलमऊ पुलिस ने नहीं लिखी लेखपाल पंकज वर्मा पर दुष्कर्म की रिपोर्ट

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रिपोर्ट: संदीप मिश्रा, रायबरेली, उत्तर प्रदेश कड़क टाइम्स
रायबरेली।

रायबरेली जिले के डलमऊ थाना क्षेत्र में एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है जिसने पुलिस की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। ऊंचाहार तहसील में तैनात लेखपाल पंकज वर्मा के खिलाफ दुष्कर्म के प्रयास और सहयोग का आरोप लगाया गया था, लेकिन पुलिस ने न केवल रिपोर्ट दर्ज करने से परहेज किया बल्कि आरोपी को “चरित्रवान” करार देकर मामले को दबाने की कोशिश की।

पीड़िता का आरोप

चक मलिक भीटी गांव की रहने वाली महिला ने थाना डलमऊ में तहरीर दी थी कि बीती रात लगभग 10 बजे गांव का ही युवक रिंकू लोध उसके घर में घुस आया और दुष्कर्म का प्रयास किया। महिला का आरोप है कि इस घटना में लेखपाल पंकज वर्मा और एक अज्ञात व्यक्ति भी शामिल थे।
महिला का कहना है कि पंकज वर्मा और अन्य आरोपियों ने उसके साथ मारपीट की, जान से मारने की धमकी दी और उसकी बेटी को भी डराया।

पुलिस का रवैया

थाने की पुलिस ने पीड़िता की शिकायत को गंभीरता से लेने की बजाय पंकज वर्मा को “ईमानदार और पाक-साफ” बताते हुए मामला दर्ज करने से इनकार कर दिया। पुलिस का तर्क है कि गांव में पूछताछ करने पर पता चला कि घटना के समय पंकज वर्मा चिकन पॉक्स से पीड़ित थे, इसलिए वह घटना में शामिल नहीं हो सकते।

लेकिन पीड़िता का कहना है कि उसने अपनी तहरीर में कहीं भी यह नहीं लिखा कि पंकज वर्मा ने खुद दुष्कर्म की कोशिश की। उसका आरोप है कि वर्मा दुष्कर्म आरोपी रिंकू लोध का सहयोगी था और घटनास्थल पर मौजूद रहकर उसने उसे और उसकी बेटी को धमकाया।

चरित्र पर उठते सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि लेखपाल पंकज वर्मा पर पहले भी कई गंभीर आरोप लग चुके हैं। खुद उनकी पत्नी ने दूसरी शादी करने की कोशिश का खुलासा किया था और थाने में शिकायत भी दी थी। लेकिन पुलिस ने उस मामले को भी दबा दिया। इतना ही नहीं, पत्नी की शिकायत का प्रार्थना पत्र तक पुलिस ने गायब कर दिया।

कानूनी पहलू

कानून विशेषज्ञों का कहना है कि दुष्कर्म से संबंधित किसी भी मामले में सबसे पहले एफआईआर दर्ज करना पुलिस की जिम्मेदारी है। उसके बाद जांच की प्रक्रिया शुरू होनी चाहिए। लेकिन डलमऊ पुलिस ने कानूनन उल्टा काम किया—पहले जांच की और फिर मामले को सिर्फ मारपीट की धाराओं में दर्ज कर दिया। इससे साफ हो गया कि पुलिस और आरोपी मिलकर पूरे मामले को दबाने की कोशिश कर रहे हैं।

पीड़िता की गुहार

थाने में न्याय न मिलने के बाद पीड़िता ने अब पुलिस अधीक्षक से शिकायत की है और न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया है। पीड़िता का कहना है कि जब तक न्याय नहीं मिलेगा, वह संघर्ष जारी रखेंगी।


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