संतोषी मां तिराहा गोपालपुर में तीतर–मुर्गा दंगल का महासंग्राम, फतेहपुर के तीतर ने जीता दंगल केशरी

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रिपोर्ट: माया लक्ष्मी मिश्रा, रायबरेली, उत्तर प्रदेश, कड़क टाइम्स

मकर संक्रांति के पावन पर्व पर रायबरेली जनपद के डीह ब्लॉक क्षेत्र स्थित संतोषी मां तिराहा गोपालपुर में आयोजित पारंपरिक मेले ने इस बार खास पहचान बनाई। वर्षों से चली आ रही परंपरा के तहत यहां तीतर दंगल और मुर्गा दंगल का भव्य आयोजन हुआ, जिसने न सिर्फ स्थानीय लोगों बल्कि आसपास के जिलों से आए हजारों दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित किया। सुबह से ही मेले में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। ढोल-नगाड़ों की गूंज, भीड़ की हलचल और दंगल के मैदान में बढ़ता रोमांच पूरे क्षेत्र को festive mood में डुबोए रहा।

इस पारंपरिक bird wrestling competition में उत्तर प्रदेश के कई जिलों से तीतर पालक अपने-अपने तीतरों को लेकर पहुंचे और दंगल में जोर आजमाइश कराई। फतेहपुर, प्रयागराज, सुल्तानपुर, अमेठी, कौशाम्बी, सिराथू, प्रतापगढ़, रायबरेली और लखनऊ सहित अन्य जिलों से आए प्रतिभागियों ने दंगल को बेहद competitive बना दिया। आयोजकों के अनुसार इस बार कुल 367 जोड़ो के बीच कुश्तियां कराई गईं, जो अपने आप में एक record मानी जा रही हैं। हर मुकाबले के साथ दर्शकों की उत्सुकता और excitement बढ़ती चली गई।

दंगल के सबसे बड़े मुकाबले यानी दंगल केशरी में फतेहपुर के तीतर ने प्रतापगढ़ के तीतर को कड़े संघर्ष के बाद पराजित कर खिताब अपने नाम किया। इस मुकाबले के दौरान मैदान में मौजूद लोग सांसें थामे हुए थे और हर दांव पर तालियों की गड़गड़ाहट सुनाई दे रही थी। फतेहपुर के तीतर की जीत के साथ ही उसके पालक को लोगों ने बधाइयों से घेर लिया। इसके अलावा फतेहपुर और मऊ के बीच हुए एक अन्य मुकाबले में मऊ के तीतर को विजेता घोषित किया गया, जिसने दर्शकों को खासा रोमांचित किया।

नसीराबाद और जगतपुर के बीच हुई कुश्ती में जगतपुर के तीतर ने दमदार प्रदर्शन करते हुए जीत दर्ज की। वहीं मऊ और फुरसतगंज के तीतर के बीच 11 हजार रुपये की कुश्ती आकर्षण का केंद्र रही, जिसमें मऊ के तीतर ने फुरसतगंज के तीतर को शिकस्त दी। इसी क्रम में पहलीपुर के तीतर ने हसनपुर के तीतर को पराजित किया। दंगल में एक हजार रुपये से लेकर तीस हजार रुपये तक की कुश्तियां कराई गईं, जिससे यह आयोजन betting-free traditional competition होते हुए भी high-stake excitement का केंद्र बना रहा।

इस वर्ष तीतर दंगल के साथ-साथ मुर्गा दंगल का आयोजन भी विशेष आकर्षण रहा। दूर-दराज से आए मुर्गा पालकों ने अपने प्रशिक्षित मुर्गों को मैदान में उतारा। मुर्गा दंगल में भी मुकाबले काफी रोमांचक रहे और दर्शकों ने हर भिड़ंत का जमकर आनंद लिया। प्रतियोगिता में निर्णायक की भूमिका मेवालाल वर्मा ने निभाई, जिनकी निष्पक्षता और अनुभव की सभी ने सराहना की। रेफरी ने बताया कि मकर संक्रांति के दिन यहां तीतर दंगल और मेला पारंपरिक रूप से आयोजित होता है और यह आयोजन क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है।

 

मेले की व्यवस्थाओं को लेकर ग्राम प्रधान राजकुमार सिंह ने बताया कि यह मेला कई वर्षों से लगातार लग रहा है और इसमें परंपरा के साथ-साथ जनसुविधाओं का भी पूरा ध्यान रखा जाता है। किसी भी दुकानदार से कोई शुल्क या वसूली नहीं की जाती। साफ-सफाई, दुकानदारों के बैठने की व्यवस्था और पीने के पानी जैसी basic facilities प्रशासन और ग्राम पंचायत की ओर से सुनिश्चित की जाती हैं। उन्होंने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं बल्कि ग्रामीण संस्कृति और आपसी भाईचारे को मजबूत करना भी है।

मेले और दंगल के दौरान सुरक्षा व्यवस्था भी चाक-चौबंद रही, जिससे किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो। बड़ी संख्या में लोग अपने परिवार और मित्रों के साथ मेले का आनंद लेते नजर आए। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में खास उत्साह देखा गया। मकर संक्रांति के अवसर पर आयोजित यह तीतर–मुर्गा दंगल न सिर्फ मनोरंजन का साधन बना बल्कि पारंपरिक खेलों और लोकसंस्कृति को जीवित रखने का सशक्त माध्यम भी साबित हुआ। इस आयोजन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि ग्रामीण मेलों की रौनक और परंपराओं का रोमांच आज भी लोगों के दिलों में पूरी तरह जिंदा है।


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