रायबरेली में जमीन घोटाला: महिला ने लगाया धोखे से प्लॉट लिखवाने और रकम हड़पने का आरोप, भू माफिया पर सवाल

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रिपोर्ट: संदीप मिश्रा, रायबरेली, उत्तर प्रदेश, कड़क टाइम्स

रायबरेली। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा भू-माफियाओं पर रोक लगाने के दावे तो लंबे समय से किए जा रहे हैं, लेकिन जिले से निकलने वाली खबरें इन दावों को झुठलाती नजर आ रही हैं। भदोखर थाना क्षेत्र के पूरे लोधन मजरे सुलखियापुर निवासी रामजीत और उनकी पत्नी सुमित्रा के साथ हुआ मामला इसका ताजा उदाहरण है। पीड़िता सुमित्रा ने पुलिस अधीक्षक रायबरेली से लिखित शिकायत दर्ज कराई है जिसमें उसने आधा दर्जन से ज्यादा लोगों पर उसकी जमीन धोखे से अपने नाम लिखवा लेने और तय रकम न देने का आरोप लगाया है।

शिकायत में बताया गया है कि शिल्पा यादव पत्नी वीरेंद्र कुमार यादव निवासी पूरे भवन मनेहरू, अजय यादव, अमृतलाल, गुड्डू, महेश, कल्लू और अर्चना ने मिलकर उसके पति से गाटा संख्या 79 घ की लगभग 3 विश्वा जमीन अपने नाम लिखवा ली। जमीन का सौदा 3 लाख 20 हजार रुपये में तय हुआ था, लेकिन पूरे सौदे में परिवार को सिर्फ 80 हजार रुपये ही दिए गए। पीड़िता का कहना है कि बाकी रकम देने के बजाय आरोपियों ने दबाव बनाकर उसके पति से दो लाख और एक लाख रुपये के चेक पर भी साइन करवा लिए और रकम अपने पास रख ली।

सुमित्रा ने यह भी आरोप लगाया कि अर्चना पुत्री सागर ने उसके पति को नशे की दवाइयां खिलाकर उसकी मर्जी के खिलाफ जमीन शिल्पा यादव के नाम लिखवा दी। इस तरह न केवल जमीन छीन ली गई बल्कि पैसे भी हड़प लिए गए। महिला का कहना है कि उसके पति से धोखे से दस्तखत करवाए गए और अब आरोपी न तो जमीन वापस कर रहे हैं और न ही पैसा।

इस मामले ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। गरीब परिवार की जमीन इस तरह से हड़प लिए जाने से क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि भू-माफिया सुनियोजित तरीके से ऐसे ही सौदे करते हैं। पहले वे सौदे की रकम तय करते हैं, थोड़ा बहुत पैसा देकर जमीन लिखवा लेते हैं और फिर दबाव बनाकर चेक या दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवा लेते हैं। बाद में रकम वापस नहीं करते और पीड़ित परिवार न्याय के लिए भटकता रह जाता है।

रायबरेली जिले में जमीन से जुड़े इस तरह के फर्जीवाड़े लगातार सामने आ रहे हैं। सरकार ने भले ही भू-माफियाओं पर कार्रवाई का दावा किया हो, लेकिन हकीकत यह है कि इस तरह के गिरोह अब भी सक्रिय हैं और गरीब तथा अशिक्षित लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। पीड़िता सुमित्रा का कहना है कि यह जमीन उसके परिवार के जीवन-यापन का सहारा थी, जिसे अब धोखे से छीन लिया गया है।

महिला ने पुलिस अधीक्षक से गुहार लगाई है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। उसने कहा है कि अगर समय रहते कदम न उठाए गए तो भू-माफिया और अधिक हिम्मत से काम करेंगे और इसी तरह गरीबों की जमीनें हड़पते रहेंगे।

इस घटना के सामने आने के बाद इलाके में लोगों के बीच नाराजगी है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब सरकार ने भू-माफियाओं को खत्म करने का दावा किया था, तो फिर ऐसे मामले बार-बार क्यों सामने आ रहे हैं। कई लोगों ने कहा कि प्रशासन अगर सख्त कदम नहीं उठाता तो यह मामला भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा और पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिलेगा।

यह मामला केवल एक परिवार का नहीं बल्कि पूरे जिले की उस स्थिति का आईना है जहां गरीब लोग जमीन जैसे कीमती संसाधन से वंचित हो रहे हैं। प्रशासन पर अब यह जिम्मेदारी है कि वह इस मामले में त्वरित और सख्त कार्रवाई करके यह संदेश दे कि भू-माफियाओं को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।

रायबरेली का यह मामला इस बात की पुष्टि करता है कि जमीन से जुड़े धोखाधड़ी के मामले अब भी जारी हैं और जरूरत है कि सरकार और प्रशासन अपने दावों को धरातल पर साबित करें। अगर पीड़िता को न्याय नहीं मिला तो यह उदाहरण और भी लोगों को हतोत्साहित करेगा और भू-माफियाओं के हौसले बढ़ाएगा।


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