नौ महीने में सिर्फ 10 मीटर, 17 मीटर का पुल कब पूरा होगा—कैर नईया नाला पर विकास की रफ्तार किसने रोकी?

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रिपोर्ट: माया लक्ष्मी मिश्रा, रायबरेली, उत्तर प्रदेश, कड़क टाइम्स

महराजगंज/रायबरेली। महराजगंज–इन्हौना मार्ग पर स्थित कैर नईया नाला पर बन रहा नया पुल इन दिनों चर्चा और नाराज़गी का केंद्र बना हुआ है। वजह साफ है—पुराने, संकरे और जर्जर पुल को तोड़कर जिस नए पुल से लोगों को राहत मिलने की उम्मीद थी, वही निर्माण कार्य बेहद slow progress के कारण अब परेशानी का कारण बन गया है। स्थानीय लोगों में आक्रोश इस कदर बढ़ चुका है कि चेतावनी दी जा रही है—अगर काम में तेजी नहीं आई तो बड़ा आंदोलन तय है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों और कार्यदाई संस्था की होगी।

जानकारी के मुताबिक कैर नईया नाला पर नए पुल का निर्माण कार्य अप्रैल 2025 में शुरू हुआ था। शुरुआत में पुराने पुल को तोड़कर चार पिलरों की स्थापना का कार्य शुरू किया गया। तकनीकी मानकों के अनुसार प्रत्येक पिलर को 17-17 मीटर तक जमीन के अंदर स्थापित किया जाना है, ताकि पुल मजबूत और टिकाऊ बन सके। लेकिन हैरानी की बात यह है कि लगभग नौ महीने बीत जाने के बाद भी पिलर महज 10 मीटर तक ही गाड़े जा सके हैं। यानी अभी हर पिलर को करीब सात मीटर और नीचे ले जाना बाकी है, जो फिलहाल दूर की कौड़ी नजर आ रहा है।

कार्यस्थल पर मौजूद टेक्नीशियन करन सिंह के अनुसार मिट्टी अत्यधिक चिकनी (sticky soil) है, जिसके चलते पिलर चारों ओर से जकड़ जा रहे हैं और नीचे धंस नहीं पा रहे। यही वजह बताई जा रही है कि तमाम कोशिशों के बावजूद काम आगे नहीं बढ़ पा रहा। इंजीनियरों का कहना है कि पिलरों पर 50 टन तक अतिरिक्त भार (extra load) डाला गया, फिर भी अपेक्षित सफलता नहीं मिली। हालात से निपटने के लिए क्रेन, JCB मशीनों के साथ-साथ पानी निकालने के लिए 25 HP और 10 HP की दो मोटरें भी लगाई गई हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।

इंजीनियरों ने यह भी बताया कि आगामी शुक्रवार को डी-वाटरिंग (de-watering) का विशेष कार्य कराया जाएगा। उम्मीद है कि इससे जमीन के भीतर मौजूद पानी का स्तर कम होगा और पिलर नीचे जाने में मदद मिलेगी। हालांकि, यदि इसके बाद भी स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो पिलरों पर और अधिक अतिरिक्त भार बढ़ाने की योजना है। सवाल यह है कि क्या सिर्फ तकनीकी बहाने देकर इतने लंबे समय तक जनता की परेशानी को नजरअंदाज किया जा सकता है?

उल्लेखनीय है कि कैर नईया नाला पुल का निर्माण अंबर कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा कराया जा रहा है। स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि कंपनी की कार्यशैली बेहद ढीली है और न तो समय-सीमा का पालन किया जा रहा है, न ही पारदर्शिता दिखाई दे रही है। निर्माण स्थल पर कई बार काम पूरी तरह ठप नजर आता है, जिससे लोगों का गुस्सा और बढ़ रहा है।

पुल का यह मार्ग महराजगंज और इन्हौना क्षेत्र के लिए लाइफलाइन माना जाता है। इसी रास्ते से स्कूली बच्चे, किसान, व्यापारी और मरीज रोजाना आवाजाही करते हैं। पुराने पुल के टूटने के बाद वैकल्पिक रास्तों से गुजरना लोगों के लिए जोखिम भरा और समय लेने वाला साबित हो रहा है। बरसात के मौसम में स्थिति और भी भयावह हो जाती है, जब नाले का जलस्तर बढ़ने से दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। ऐसे में नया पुल समय पर न बनना सीधे तौर पर जनजीवन को प्रभावित कर रहा है।

इस मुद्दे पर सामाजिक कार्यकर्ता श्रीकांत त्रिपाठी, पूर्व प्रधान राम लखन यादव, पूर्व प्रधान गंगाराम, समाजसेवी द्वारिका सिंह, डॉ. टी.पी. यादव और पंडित समर बहादुर पांडेय ने एक स्वर में चेतावनी दी है कि यदि आगामी छह माह के भीतर पुल निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ तो क्षेत्रवासी सड़क पर उतरकर बड़ा आंदोलन करेंगे। उनका कहना है कि विकास के नाम पर सिर्फ कागजी दावे और मीटिंग्स नहीं, बल्कि ground reality में काम दिखना चाहिए।

लोगों का यह भी सवाल है कि जब मिट्टी की प्रकृति पहले से जानी-पहचानी थी, तो निर्माण शुरू करने से पहले soil testing और proper planning क्यों नहीं की गई? क्या लापरवाही की कीमत अब आम जनता चुकाएगी? क्षेत्र में यह चर्चा भी तेज है कि यदि समय रहते प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया तो यह मामला कानून-व्यवस्था की चुनौती बन सकता है।


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