नेताजी की जयंती पर उठे सवालों ने फिर तोड़ी चुप्पी, सुभाष चंद्र बोस की मौत पर आज भी क्यों छाया है रहस्य?

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रिपोर्ट: संदीप मिश्रा, रायबरेली, उत्तर प्रदेश, कड़क टाइम्स

आजाद हिंद फौज के संस्थापक और “जय हिंद” का ओजस्वी नारा देने वाले नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती एक बार फिर देशभक्ति, त्याग और बलिदान की भावना से ओत-प्रोत माहौल में मनाई गई, लेकिन इस बार कार्यक्रम में श्रद्धांजलि के साथ-साथ कुछ ऐसे सवाल भी गूंजे, जिन्होंने मौजूद लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया। कमला फाउंडेशन के सौजन्य से आयोजित इस आयोजन में नेताजी की वीरता को नमन किया गया, वहीं उनकी रहस्यमयी मृत्यु को लेकर उठे सवालों ने माहौल को गंभीर और भावुक बना दिया।

यह कार्यक्रम शहर क्षेत्र के जहानाबाद पुलिस चौकी अंतर्गत धुन्नी सिंह नगर स्थित कमला फाउंडेशन के कार्यालय में आयोजित किया गया, जहां बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता और आम लोग उपस्थित रहे। सभी ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की तस्वीर के समक्ष पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। पूरे परिसर में देशभक्ति की भावना और “नेताजी अमर रहें” जैसे नारों की गूंज सुनाई देती रही।

कार्यक्रम की आयोजक और अध्यक्षता कर रहीं कमला फाउंडेशन की अध्यक्ष पूनम सिंह ने नेताजी की तस्वीर पर पुष्प अर्पित करने के बाद अपने संबोधन में ऐसी बात कही, जिसने पूरे कार्यक्रम को एक नई दिशा दे दी। उन्होंने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत आज भी रहस्य बनी हुई है और इस पर देश में एक अजीब सा सन्नाटा छाया हुआ है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इतनी महान शख्सियत की मृत्यु को लेकर आज तक सच्चाई सामने क्यों नहीं आ सकी।

पूनम सिंह ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार ने सत्ता में आने से पहले नेताजी की मौत के रहस्य से पर्दा उठाने का वादा किया था, लेकिन यह वादा आज भी सिर्फ वादा बनकर रह गया है। उन्होंने कहा कि यह देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस नेता ने आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया, उसी के जीवन के सबसे बड़े सवाल पर आज भी चुप्पी साधी गई है। उनके शब्दों में दर्द और देश के प्रति गहरी भावना साफ झलक रही थी।

उन्होंने आगे कहा कि आज हम सभी यहां सुभाष जयंती मनाने के लिए एकत्रित हुए हैं, हमने नेताजी को नमन किया है और उनके बलिदान को याद किया है। साथ ही उन्होंने बसंत पंचमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह दिन ज्ञान और नई ऊर्जा का प्रतीक है। नेताजी का योगदान सिर्फ इतिहास की किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके विचार आज भी युवाओं को inspire करते हैं। पूनम सिंह ने भावुक होते हुए कहा कि वे नेताजी को अपने मां, पिता और भाई की तरह याद करती हैं, क्योंकि उनके आदर्शों का उनके जीवन पर गहरा प्रभाव रहा है।

उन्होंने इस बात पर भी चिंता जताई कि आज के समय में लोग नेताजी को केवल एक दिन के लिए याद करते हैं और बाकी समय उनके विचारों को भुला देते हैं। उन्होंने कहा कि अगर हमें सच्चे अर्थों में नेताजी को श्रद्धांजलि देनी है, तो हमें उनके सिद्धांतों को अपने जीवन में उतारना होगा और देश के लिए ईमानदारी से काम करना होगा।

कार्यक्रम के दौरान मौजूद अन्य वक्ताओं ने भी नेताजी के जीवन, उनके संघर्ष और आजादी के आंदोलन में उनके योगदान पर अपने-अपने विचार रखे। सभी ने एक स्वर में कहा कि सुभाष चंद्र बोस केवल एक नेता नहीं, बल्कि एक विचारधारा थे, जिसने गुलामी की जंजीरों को तोड़ने का साहस दिखाया। कार्यक्रम का मंच संचालन पूर्व सभासद इसरार अहमद ने किया, जिन्होंने पूरे कार्यक्रम को गंभीरता और गरिमा के साथ आगे बढ़ाया।

इस अवसर पर शालिनी सिंह, हर्षवर्धन सिंह, जेडी पब्लिक स्कूल की प्रधानाध्यापिका प्रियंका पांडे, सावित्री रावत, रज्जू देवी रावत, आरती पटेल, आरती पासवान, प्रकृति जायसवाल, वंदना जायसवाल, साधना त्रिपाठी, श्रीमती जायसवाल, डॉ. हुमा परवीन, तृषा जायसवाल, सत्या दीक्षित, हर्षिका जायसवाल, दामिनी पासवान, सभासद एसपी सिंह, ऑल इंडिया व्यापार मंडल चौहान गुट के अध्यक्ष जेसी चौहान, मो. उमर, पूर्व सभासद इसरार अहमद, रजोले मिश्रा, आमीन पठान, प्रतिभा मिश्रा, अरशद खान, विक्की मिश्रा, मो. इम्तियाज, मनोज तिवारी, कृष्ण वीर सिंह, सोनू सिंह, राम शंकर रैदास, अमर सिंह, हिमांशु सिंह, समीर शिगली, अखिलेश श्रीवास्तव, एडवोकेट संदीप मिश्रा, सुमित सिंह, कुलदीप शर्मा सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।


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