कोहरा और गलन भरी ठंड से महराजगंज क्षेत्र बेहाल, जनजीवन अस्त-व्यस्त, अलाव व्यवस्था नाकाफी

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रिपोर्ट: माया लक्ष्मी मिश्रा, रायबरेली, उत्तर प्रदेश, कड़क टाइम्स

महराजगंज/रायबरेली। जिले में लगातार बढ़ती गलन भरी ठंड और घने कोहरे ने आम जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। हालात ऐसे हो गए हैं कि इंसानों के साथ-साथ पशु-पक्षी भी ठंड से बेहाल नजर आ रहे हैं। शनिवार को पूरे दिन सूर्यदेव के दर्शन नहीं हुए और हल्का से मध्यम कोहरा छाया रहा, जिससे लोग घरों में दुबकने को मजबूर हो गए। सर्द हवाओं और गिरते तापमान ने लोगों की दिनचर्या पर गहरा असर डाला है।

सुबह और शाम के समय ठंड का प्रकोप इतना ज्यादा रहा कि सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा। आमतौर पर चहल-पहल वाले रास्तों पर भी लोग नजर नहीं आए। दोपहर के समय जरूर कस्बा और आसपास के ग्रामीण बाजारों में थोड़ी बहुत activity देखने को मिली, लेकिन वह भी सीमित रही। दुकानदारों का कहना है कि ठंड के कारण ग्राहक कम निकल रहे हैं, जिससे व्यापार भी प्रभावित हो रहा है। Daily routine पूरी तरह बिगड़ गई है और लोग सिर्फ जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकल रहे हैं।

नगर पंचायत प्रशासन द्वारा समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों का संज्ञान लेते हुए कुछ स्थानों पर अलाव की व्यवस्था कराई गई है, लेकिन यह व्यवस्था नाकाफी साबित हो रही है। कस्बे के तिराहे, चंदापुर चौराहे, अस्पताल परिसर और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर ठंड से राहत के इंतजाम बेहद सीमित हैं। कई जगहों पर अलाव नहीं जलने से राहगीरों और यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और भी ज्यादा खराब बताई जा रही है, जहां ठंड से बचाव के साधन लगभग न के बराबर हैं।

दिसंबर माह के मध्य में अचानक बढ़ी ठंड ने महज एक सप्ताह के भीतर ही लोगों के कामकाज और जीवनशैली पर गहरा असर डाल दिया है। शनिवार को पूरा दिन आसमान में बादल छाए रहे और कोहरे ने भी अपना असर बनाए रखा। महराजगंज कस्बे के अलावा मऊ, सिकन्दरपुर, मुरैनी, डेपारमऊ, खेरवा, ज्योना, चंदापुर, असरफाबाद, अंदूपुर, मोन, कुसमहुरा, हरदोई, असनी, बरहुआं, सलेथू, जिहवा, बावन बुजुर्ग बल्ला सहित कई गांवों और कस्बों में लोग अलाव की कमी से कांपते नजर आए। खासकर ग्रामीण इलाकों में सुबह-शाम ठंड सबसे ज्यादा सताने लगी है।

सुबह करीब आठ बजे तक सड़कों पर आवागमन लगभग न के बराबर रहा। स्कूल जाने वाले बच्चों, दिहाड़ी मजदूरों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। कई परिवारों ने बच्चों और बुजुर्गों को घर से बाहर न निकलने की सलाह दी है। पशुपालकों का कहना है कि ठंड का असर जानवरों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। मवेशी सुस्त हो गए हैं और उन्हें गर्म रखने के लिए पर्याप्त साधन नहीं मिल पा रहे हैं, जिससे पशुपालक भी चिंतित हैं।

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि प्रशासन की ओर से ठंड और कोहरे से निपटने के लिए अब तक कोई ठोस और व्यापक कदम नहीं उठाया गया है। अलाव की संख्या बढ़ाने, प्रमुख चौराहों और ग्रामीण क्षेत्रों में अलाव जलाने, तथा अस्थायी रैन बसेरों की व्यवस्था करने की मांग लगातार उठ रही है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते जरूरी इंतजाम नहीं किए गए, तो ठंड का असर और भी गंभीर हो सकता है।


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