जब एक सरकारी स्कूल बना संविधान और लोकतंत्र की सबसे मजबूत आवाज़, क्या यही है असली गणतंत्र की पहचान?

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रिपोर्ट: माया लक्ष्मी मिश्रा, रायबरेली, उत्तर प्रदेश, कड़क टाइम्स

77वें गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर मेंल्खा साहब कंपोजिट विद्यालय, जगतपुर में 26 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस हर्षोल्लास, गौरव और देशभक्ति के साथ मनाया गया। सुबह से ही विद्यालय परिसर में उत्सव जैसा माहौल दिखाई दिया, जहां तिरंगे की छांव में संविधान की शक्ति और लोकतंत्र की गरिमा को महसूस किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय की प्रधानाचार्य एवं शिक्षकों द्वारा ध्वजारोहण के साथ हुई। जैसे ही राष्ट्रीय ध्वज लहराया, पूरे परिसर में राष्ट्रगान की गूंज फैल गई और हर व्यक्ति के चेहरे पर गर्व की झलक साफ नजर आई।

ध्वजारोहण के उपरांत संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक पाठ किया गया, जिसमें शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों ने देश की एकता, अखंडता और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का संकल्प लिया। यह पल केवल औपचारिकता नहीं था, बल्कि यह उस जिम्मेदारी की याद दिलाने वाला क्षण था, जो हर नागरिक के कंधों पर है। शिक्षकों ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की असली ताकत उसका संविधान है और लोकतंत्र की मजबूती तभी संभव है, जब नागरिक अपने कर्तव्यों को समझें और निभाएं।

गणतंत्र दिवस के अवसर पर विद्यालय में बच्चों की सहभागिता ने कार्यक्रम को खास बना दिया। विद्यार्थियों ने प्रभातफेरी निकालकर पूरे क्षेत्र में देशभक्ति का संदेश दिया। इसके बाद देशभक्ति गीत, भाषण, नाटक, कविता पाठ और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला शुरू हुई, जिसने उपस्थित लोगों को भावनात्मक रूप से जोड़ दिया। बच्चों ने स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान और संविधान की महत्ता को अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से जीवंत कर दिया। मंच से निकली मासूम आवाज़ों में देश के प्रति समर्पण साफ झलक रहा था।म

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने “विकसित भारत”, “संविधान और युवा” तथा “राष्ट्र निर्माण में नागरिकों की भूमिका” जैसे विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। बच्चों के विचार सुनकर यह साफ महसूस हुआ कि आने वाली पीढ़ी लोकतंत्र को केवल शब्दों में नहीं, बल्कि सोच और व्यवहार में भी अपनाने को तैयार है। शिक्षकों और अभिभावकों ने भी माना कि ऐसे कार्यक्रम बच्चों में confidence, discipline और national values को मजबूत करते हैं।

विद्यालय के साथ-साथ क्षेत्र के अन्य सरकारी और निजी संस्थानों में भी गणतंत्र दिवस पूरे सम्मान और उत्साह के साथ मनाया गया। सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक स्थलों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया। अधिकारियों और कर्मचारियों ने शांति, कानून-व्यवस्था और नागरिकों की सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। वक्ताओं ने देश की आंतरिक सुरक्षा, अनुशासन और राष्ट्रसेवा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मजबूत लोकतंत्र के लिए जागरूक नागरिक सबसे बड़ी आवश्यकता हैं।

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने यह भी कहा कि संविधान केवल अधिकारों की किताब नहीं, बल्कि कर्तव्यों का मार्गदर्शक है। यदि हर नागरिक अपने दायित्वों को ईमानदारी से निभाए, तो देश को आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता। यही संदेश बच्चों के कार्यक्रमों और शिक्षकों के संबोधनों में बार-बार उभरकर सामने आया।

गणतंत्र दिवस के अवसर पर विद्यालय में मिठाइयों का वितरण किया गया और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रोत्साहित भी किया गया। बच्चों के चेहरों पर खुशी और गर्व साफ झलक रहा था। पूरे क्षेत्र में देशभक्ति, एकता और राष्ट्रीय गौरव का वातावरण बना रहा, जहां हर व्यक्ति एक-दूसरे को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं देता नजर आया।


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