गोण्डा पुलिस ने निभाया अभिभावक का फर्ज, बेटी की शादी कर पेश की मानवीय संवेदना की मिसाल

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गोण्डा पुलिस ने निभाया अभिभावक का फर्ज, बेटी की शादी कर पेश की मानवीय संवेदना की मिसाल

तारीख: 05 जून 2025
रिपोर्टर: आशीष श्रीवास्तव, ब्यूरो चीफ – उत्तर प्रदेश

जनपद गोण्डा की पुलिस ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि वह केवल कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के प्रति अपने कर्तव्यों का भी बखूबी निर्वहन कर रही है। इस बार गोण्डा पुलिस ने एक पीड़ित परिवार की बेटी की शादी कराकर एक नई मिसाल पेश की है, जो मानवता, सहानुभूति और सामाजिक उत्तरदायित्व का अद्वितीय उदाहरण बन गई है।

पारिवारिक त्रासदी बनी शादी में बाधा

यह घटना थाना उमरी बेगमगंज के ग्राम धन्नीपुरवा की है, जहां एक गरीब परिवार की बेटी की शादी की तैयारियां चल रही थीं। लेकिन 24 अप्रैल 2025 की रात उस वक्त मातम पसर गया, जब घर में घुसकर पासी गैंग के बदमाशों ने शादी के लिए रखे गए सामान की चोरी के दौरान बेटी के भाई शिवदीन की गोली मारकर हत्या कर दी। यह घटना न केवल दिल को झकझोर देने वाली थी, बल्कि इसके चलते परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। शादी की तारीख करीब थी, लेकिन इस हादसे और भय की वजह से परिवार ने विवाह की योजना टाल दी।

पुलिस की तत्परता और कठोर कार्रवाई

घटना के तुरंत बाद पुलिस अधीक्षक गोण्डा श्री विनीत जायसवाल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल कई टीमें गठित कीं। उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) के सहयोग से कार्रवाई को अंजाम दिया गया। छह में से चार अपराधियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया, जबकि दो कुख्यात अपराधी – एक लाख रुपये का इनामी सोनू पासी और ज्ञानचंद्र पासी – पुलिस और STF की संयुक्त मुठभेड़ में मारे गए।

इस कार्रवाई से यह संदेश गया कि गोण्डा पुलिस अपराधियों के खिलाफ कठोर रुख अपनाए हुए है, और जनता की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

शादी की जिम्मेदारी उठाकर निभाया अभिभावक धर्म

इस हत्याकांड के बाद जब यह जानकारी पुलिस अधीक्षक को मिली कि भय और आर्थिक तंगी के कारण पीड़ित परिवार ने बेटी की शादी टाल दी है, तो उन्होंने इस पीड़िता की सहायता करने का निर्णय लिया। उन्होंने खुद और उनकी धर्मपत्नी डॉ. तन्वी जायसवाल ने परिवार से संपर्क किया और बेटी की शादी की जिम्मेदारी ली।

पुलिस अधीक्षक ने बेटी को ₹1.51 लाख की नगद सहायता, सोने के आभूषण और गृहस्थी का पूरा सामान प्रदान किया। न केवल आर्थिक मदद दी गई, बल्कि शादी की सभी तैयारियां गोंडा पुलिस और STF के सहयोग से पूरी कराई गईं।

पुलिस बनी घराती, बारातियों का स्वागत किया

शादी के दिन गोंडा पुलिस और STF के अधिकारी तथा कर्मचारी घराती बनकर मौजूद रहे। ब्लॉक प्रमुख, ग्राम प्रधान और स्थानीय समाजसेवियों के सहयोग से पंडाल सजाया गया, भोजन की व्यवस्था की गई और बारातियों का स्वागत पूरे पारंपरिक अंदाज में किया गया।

इस आयोजन में सुरक्षा की कड़ी व्यवस्था भी रही, जिससे सभी अतिथियों को सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल मिला।

एक नया मानवीय उदाहरण

गोंडा पुलिस का यह कदम केवल एक शादी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने पुलिस के मानवीय चेहरे को उजागर किया है। अक्सर पुलिस को सख्ती और अनुशासन के प्रतीक के रूप में देखा जाता है, लेकिन इस घटना ने यह साबित किया कि जब पुलिस चाहे, तो वह सबसे मजबूत सामाजिक सहायक भी बन सकती है।

पुलिस अधीक्षक श्री विनीत जायसवाल ने कहा,
“हमारा प्रयास सिर्फ अपराध नियंत्रण नहीं, बल्कि पीड़ितों के जीवन में आशा और सहारा देने का भी है।”

इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर पुलिस की इस पहल की प्रशंसा की जा रही है। कई नागरिकों ने इसे “मानवता के प्रति पुलिस की जिम्मेदारी का उत्कृष्ट उदाहरण” बताया है।

सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर चर्चा में गोण्डा पुलिस

इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर कई सकारात्मक टिप्पणियां आई हैं। ट्विटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर लोग गोण्डा पुलिस की इस पहल को #GondaPoliceHumanity, #UPSTFAction, #PoliceSupportMarriage जैसे हैशटैग के साथ शेयर कर रहे हैं।

मीडिया हाउसों और डिजिटल न्यूज वेबसाइट्स ने इस खबर को प्रमुखता से स्थान दिया है। यह पहल ‘मॉडल पुलिसिंग’ के रूप में पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गई है।

निष्कर्ष

गोण्डा पुलिस द्वारा निभाई गई यह भूमिका समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी और मानवीय दृष्टिकोण को स्पष्ट करती है। यह उदाहरण देशभर की पुलिस इकाइयों के लिए प्रेरणा बन सकता है कि वे न केवल कानून व्यवस्था के रखवाले हैं, बल्कि जरूरतमंदों के जीवन में रोशनी की किरण भी बन सकते हैं।

इस तरह की पहल से पुलिस और जनता के बीच विश्वास और सहयोग की भावना मजबूत होती है, जो किसी भी लोकतांत्रिक समाज के लिए अत्यंत आवश्यक है।


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