डलमऊ में अवैध कटान का खेल – ठेकेदार की दबंगई और वन विभाग की चुप्पी

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रिपोर्ट: माया लक्ष्मी मिश्रा, रायबरेली, उत्तर प्रदेश कड़क टाइम्स

डलमऊ थाना क्षेत्र के अंतर्गत नरहर पुर बेती का पुरवा गांव इन दिनों अवैध कटान के मामले में सुर्खियों में है। गांव के भीतर ठेकेदार इमरान और उसकी टीम ने खुलेआम 3 आम के पेड़ों को आरे से काट दिया। यह घटना दिनदहाड़े हुई और हैरानी की बात यह है कि इसके लिए किसी भी तरह की परमिशन नहीं ली गई।

ग्रामीणों का कहना है कि इमरान जैसे ठेकेदार लंबे समय से क्षेत्र में आम और अन्य पेड़ों की कटाई कर रहे हैं। लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि बिना रोक-टोक के ये कटान केवल इसलिए संभव हो रहा है क्योंकि थाना और वन विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत इसमें शामिल है।

ठेकेदार की दबंगई – कानून को ठेंगा

गांव वालों का आरोप है कि इमरान ठेकेदार क्षेत्र में घूम-घूमकर आम के पेड़ काटता है। वह किसी भी सरकारी नियम या परमिशन की परवाह नहीं करता। स्क्रीन पर उपलब्ध तस्वीरों से साफ दिखता है कि कितने पेड़ पहले ही काटे जा चुके हैं। सवाल यह उठता है कि आखिर यह सिलसिला कब तक चलेगा और इसके पीछे किसका संरक्षण है?

वन विभाग की भूमिका संदिग्ध

खबरों के मुताबिक, ठेकेदार इमरान ने वन विभाग के कर्मचारियों को मोटी रकम देकर अवैध कटान को अंजाम दिया। सूत्रों का दावा है कि विभागीय अधिकारियों जैसे अमर और फॉरेस्ट गार्ड राकेश को 8,000 रुपये की रिश्वत दी गई। इस आरोप ने पूरे वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

लोगों का कहना है कि जब शिकायत दर्ज भी होती है, तब भी अधिकारी कार्रवाई करने में कतराते हैं। यह रवैया न केवल कानून के खिलाफ है बल्कि पर्यावरण के लिए भी गंभीर खतरा है।

ग्रामीणों का गुस्सा

गांव के लोग इस अवैध कटान से बेहद नाराज़ हैं। उनका कहना है कि एक ओर सरकार ‘ग्रीन मिशन’ और ‘क्लीन एंड ग्रीन इंडिया’ जैसे अभियान चलाती है, वहीं दूसरी ओर वन विभाग और पुलिस की नाक के नीचे इस तरह के गैरकानूनी काम जारी रहते हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि ठेकेदार इमरान और उसके साथियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और दोषी अधिकारियों पर भी लगाम लगाई जाए।

अवैध कटान का असर

पेड़ों का अवैध कटान केवल कानून तोड़ने तक सीमित नहीं है बल्कि इसका सीधा असर हमारे पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों पर पड़ता है। आम जैसे फलदार पेड़ ग्रामीण अर्थव्यवस्था और प्रकृति दोनों के लिए जरूरी हैं। अगर ऐसे कटान पर समय रहते रोक नहीं लगाई गई तो क्षेत्र की हरियाली खत्म हो सकती है।

प्रशासन की जिम्मेदारी

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर प्रशासन कब जागेगा। क्या वन विभाग और पुलिस मिलकर ठेकेदार इमरान पर कार्रवाई करेंगे या फिर यह मामला भी धीरे-धीरे दबा दिया जाएगा? अगर समय रहते सख्ती नहीं बरती गई तो यह गिरोह और भी सक्रिय हो सकता है।


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