क्या एक क्रिकेट मैच से मिट सकती है लाइलाज बीमारी?

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रिपोर्ट: संदीप मिश्रा, रायबरेली, उत्तर प्रदेश, कड़क टाइम्स

रायबरेली जिले के शिवगढ़ ब्लॉक में रविवार को कुछ अलग नजारा देखने को मिला। यहां क्रिकेट के मैदान में सिर्फ रन और विकेट की लड़ाई नहीं थी, बल्कि एक गंभीर बीमारी के खिलाफ जागरूकता की जंग लड़ी जा रही थी। राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत 10 से 28 फरवरी तक चलने वाले सर्वजन दवा सेवन यानी आईडीए अभियान को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से बरखंडी विद्यापीठ इंटर कॉलेज के मैदान में एक मैत्री क्रिकेट मैच का आयोजन किया गया, जिसने युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक को सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या सच में एक छोटी सी गोली जिंदगी बदल सकती है।

इस खास मुकाबले में नगर पंचायत शिवगढ़ और यू अरबाज-11 की टीम आमने-सामने थीं। मैदान पर उत्साह था, तालियां थीं और साथ ही हर ओवर के बीच फाइलेरिया उन्मूलन का संदेश भी। मैच का उद्घाटन ब्लॉक प्रमुख शिवगढ़ कुंवर हनुमत सिंह ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में साफ कहा कि शिवगढ़ ब्लॉक में फाइलेरिया के मरीज मिलने के कारण पूरे जनपद में सिर्फ यही ब्लॉक है, जहां इस वर्ष आईडीए अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने मंच से यह भी ऐलान किया कि वे स्वयं सबसे पहले फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन करेंगे और लोगों से अपील की कि डर और भ्रम छोड़कर दवा जरूर खाएं।

ब्लॉक प्रमुख ने बताया कि रायबरेली प्रदेश का सर्वाधिक फाइलेरिया प्रभावित जिला माना जाता रहा है, लेकिन जिन ब्लॉकों में लोगों ने समय पर दवा का सेवन किया, वहां इस बीमारी का प्रसार काफी हद तक कम हो गया है। यही वजह है कि इस साल उन क्षेत्रों में आईडीए अभियान की जरूरत नहीं पड़ी। उन्होंने कहा कि यदि शिवगढ़ के लोग भी जिम्मेदार नागरिक बनते हुए 90 प्रतिशत से अधिक दवा सेवन सुनिश्चित कर लें, तो यह ब्लॉक भी जल्द फाइलेरियामुक्त हो सकता है। उन्होंने आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि जब भी वे घर आएं, आनाकानी न करें और दवा को अपने सामने ही खाएं।

कार्यक्रम के दौरान सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शिवगढ़ के अधीक्षक डॉ. प्रेम शरण सिंह ने मेडिकल फैक्ट्स के साथ लोगों की शंकाएं दूर कीं। उन्होंने कहा कि फाइलेरिया रोधी दवा पूरी तरह सुरक्षित है और विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा प्रमाणित है। यह दवा एक वर्ष से कम आयु के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को छोड़कर सभी को लेनी चाहिए। उन्होंने बताया कि दवा खाने के बाद अगर किसी को हल्का चक्कर या जी मिचलाने जैसा महसूस हो, तो घबराने की जरूरत नहीं है। यह इस बात का संकेत है कि दवा शरीर में मौजूद फाइलेरिया के परजीवियों पर असर कर रही है।

प्रधान संघ के अध्यक्ष पवन सिंह ने कहा कि प्रधान संघ इस अभियान को सफल बनाने के लिए पूरी ताकत से मैदान में है। ग्राम प्रधान, सीएचओ, पीएसपी सदस्य, आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, कोटेदार और पंचायत सदस्य मिलकर गांव-गांव लोगों को जागरूक करेंगे। उन्होंने कहा कि community support के बिना कोई भी health campaign सफल नहीं हो सकता।

मैच के दौरान यू अरबाज-11 टीम के खिलाड़ी पीयूष मिश्रा ने बताया कि इस आयोजन से उन्हें पहली बार समझ में आया कि फाइलेरिया एक गंभीर और लाइलाज बीमारी है, लेकिन सही समय पर दवा लेने से इससे बचाव संभव है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि 10 से 28 फरवरी के बीच आशा कार्यकर्ता जब घर आएं, तो दवा जरूर लें और दूसरों को भी प्रेरित करें।

कार्यक्रम में गांव तरौंजा के फाइलेरिया पीड़ित दंपति निशा पांडे और श्याम किशोर पांडे की कहानी ने लोगों को भावुक कर दिया। दोनों ने बताया कि वे पिछले 30 वर्षों से इस बीमारी से जूझ रहे हैं। उनके समय में जागरूकता और दवा की सुविधा नहीं थी, जिसकी कीमत उन्हें आज भी चुकानी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि वे अपनी गलती से सबक लेकर अब हर व्यक्ति को दवा सेवन के लिए प्रेरित करेंगे, ताकि कोई और इस दर्द से न गुजरे।


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