गौ माता के कातिलों को किसी कीमत पर छोड़ा नहीं जाएगा

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रिपोर्ट: माया लक्ष्मी मिश्रा, रायबरेली, उत्तर प्रदेश, कड़क टाइम्स

सलोन क्षेत्र में गौमांस तस्करों की गतिविधियाँ एक बार फिर सुर्खियों में आ गई हैं, जब रूनीपुर के पास गौ माता की बेरहमी से हत्या की घटना सामने आई। बताया गया कि तस्कर मृतप्राय गौ माता को वहीं छोड़कर भाग निकले, क्योंकि कुछ राहगीर मौके पर पहुँच गए थे। स्थानीय निवासियों के अनुसार, ख्वाजापुर और पकसरावा के बीच नाले और जंगल क्षेत्रों में कई महीनों से रात के अंधेरे में संदिग्ध हलचलें देखी जा रही थीं। ग्रामीणों ने बार-बार इन घटनाओं की सूचना साझा की, लेकिन किसी ठोस कार्रवाई के अभाव में तस्करों का नेटवर्क और अधिक सक्रिय होता गया।

स्थानीय सूत्रों का कहना है कि इस अवैध कारोबार में केवल छोटे अपराधी ही नहीं, बल्कि क्षेत्र के कुछ प्रभावशाली लोगों की भूमिका का भी संदेह है, जो अपनी पहुँच का उपयोग करके बड़े पैमाने पर गौ तस्करी करवाते हैं। सलवन और आसपास के इलाकों में पहले भी गौतस्करों की छिपी हुई गतिविधियाँ देखी जाती रही हैं। ख्वाजापुर, बड़ा घोसी का पुरवा और पकसरावा के जंगलों में यह गिरोह लगातार अपनी मौजूदगी बनाए हुए है, और माना जा रहा है कि इनकी गतिविधियों का संबंध बाहर के जिलों तथा अन्य राज्यों से जुड़े तस्करी नेटवर्कों से भी हो सकता है। इस पूरे मामले में प्रशासन की निष्क्रियता स्थानीय लोगों के बीच भारी नाराज़गी का कारण बन गई है।

विश्व हिंदू परिषद के प्रतिनिधि विवेक ने इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि “गौ माता की हत्या और गौमांस तस्करी पर अब किसी भी तरह की ढील बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जो लोग इस घिनौने अपराध में शामिल हैं, वे चाहे कितने ही प्रभावशाली क्यों न हों, उन्हें कानून के दायरे में लाया जाएगा।” विवेक ने कहा कि संगठन ने विस्तृत जानकारी विहिप के वरिष्ठ नेतृत्व और स्थानीय अधिकारियों तक पहुँचा दी है। इसके साथ ही इस मामले में मुख्यमंत्री को भी एक रिपोर्ट भेजी जाएगी, जिसमें सलोन क्षेत्र में सक्रिय तस्करी गिरोहों और उनसे जुड़ी धार्मिक व सामाजिक संदिग्ध गतिविधियों का उल्लेख होगा।

विहिप के अनुसार यदि प्रशासन ने इस बार गंभीरता नहीं दिखाई, तो संगठन बड़े स्तर पर अभियान शुरू करेगा। क्षेत्र के लोगों में भी इस घटना को लेकर गहरी नाराजगी है। उनका कहना है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद ठोस कार्रवाई न होना प्रशासन को कटघरे में खड़ा करता है। ग्रामीणों का यह भी मानना है कि इस तरह की घटनाएं तभी रुकेंगी, जब तस्करी में शामिल नेटवर्क को जड़ से खत्म किया जाए और दोषियों को कड़ी सजा मिले।


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