बिना तलाक दूसरी शादी की तैयारी कर रहा था लेखपाल, पहली पत्नी ने गांव में पहुंचकर कर दिया पोल खोल

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माया लक्ष्मी मिश्रा, रायबरेली

रायबरेली ज़िले में एक लेखपाल की दोहरी ज़िंदगी का पर्दाफाश तब हुआ जब उसकी पहली पत्नी ने गांव पहुंचकर उसकी दूसरी शादी की साज़िश पर पानी फेर दिया। यह मामला सामने आने के बाद न सिर्फ लड़की पक्ष बल्कि पूरे गांव में हड़कंप मच गया।

सलोन तहसील में तैनात लेखपाल पंकज वर्मा, जिस पर पहले से ही दहेज उत्पीड़न, घरेलू हिंसा, और मारपीट जैसे गंभीर आरोप दर्ज हैं, अब एक और विवाद में फंस गया है। गुरुबक्सगंज थाना क्षेत्र के सतांव ब्लॉक स्थित बिरवल गांव में वह दूसरी शादी करने की योजना बना रहा था, जबकि उसकी पहली पत्नी विजय लक्ष्मी वर्मा के साथ उसका अब तक कानूनी रूप से तलाक नहीं हुआ है।

गांव में हुआ सच्चाई का खुलासा

जानकारी के मुताबिक, पंकज वर्मा ने गांव में खुद को तलाकशुदा बताकर दूसरी शादी की बातचीत चलाई थी। लड़की पक्ष को भी यही बताया गया कि उसका पहली पत्नी से अब कोई संबंध नहीं है। रिश्ते की बातचीत इतनी आगे बढ़ गई थी कि शादी की तिथि तक तय होने लगी थी।

लेकिन जैसे ही पहली पत्नी विजय लक्ष्मी को इसकी भनक लगी, वह बिना देर किए गांव पहुंच गई और वहां मौजूद लड़की वालों और ग्रामीणों के सामने पूरी सच्चाई रख दी। उसने साफ कहा कि उसका और पंकज का कानूनी तलाक नहीं हुआ है और वह आज भी उसकी पत्नी है।

ग्रामीणों ने जताई नाराज़गी

पत्नी के बयान के बाद गांव में मौजूद लोगों का रुख अचानक बदल गया। लड़की पक्ष ने जहां तत्काल रिश्ते से इनकार कर दिया, वहीं ग्रामीणों ने लेखपाल के इस व्यवहार की कड़ी आलोचना की। लोगों का कहना था कि समाज में जिस व्यक्ति को जिम्मेदारी की मिसाल बनना चाहिए, वही अगर नियमों को तोड़ने लगे तो समाज में गलत संदेश जाता है।

जिम्मेदार पद पर रहते हुए गैरजिम्मेदार व्यवहार

एक सरकारी कर्मचारी, खासकर लेखपाल जैसे पद पर कार्यरत व्यक्ति से यह उम्मीद की जाती है कि वह कानून का सम्मान करे और समाज में सही आचरण प्रस्तुत करे। लेकिन पंकज वर्मा ने जिस तरह अपनी पत्नी को दरकिनार कर दूसरी शादी की कोशिश की, वह न सिर्फ अनैतिक है, बल्कि कानून का उल्लंघन भी है।

पत्नी की साहसिक पहल

विजय लक्ष्मी वर्मा की जागरूकता और हिम्मत की लोग सराहना कर रहे हैं। अगर वह समय पर आगे न आती तो एक और लड़की इस धोखे का शिकार हो सकती थी। इस घटनाक्रम से यह साफ है कि जब महिलाएं अपने अधिकारों के लिए खड़ी होती हैं, तो अन्याय को रोका जा सकता है।


निष्कर्ष:
यह मामला एक सच्ची चेतावनी है कि विवाह जैसे पवित्र रिश्ते में छल करने वालों को समाज माफ नहीं करता। ऐसे लोगों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि दूसरों को भी सबक मिले। और सबसे बड़ी बात – महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहना चाहिए, जैसे विजय लक्ष्मी ने किया।

✍️ रिपोर्ट: माया लक्ष्मी मिश्रा, रायबरेली


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