रिपोर्ट: माया लक्ष्मी मिश्रा, रायबरेली, उत्तर प्रदेश, कड़क टाइम्स
राही ब्लॉक क्षेत्र के कोला हैबतपुर गांव में 26 जनवरी को 77वां गणतंत्र दिवस जिस उल्लास, गरिमा और आत्मीयता के साथ मनाया गया, उसने यह साबित कर दिया कि देशभक्ति किसी बड़े मंच या शहर की मोहताज नहीं होती। परिषदीय विद्यालय का परिसर उस दिन सिर्फ एक स्कूल नहीं, बल्कि भारत की लोकतांत्रिक आत्मा का जीवंत प्रतीक बन गया। सुबह से ही गांव में एक अलग ही उत्साह देखने को मिला। बच्चे साफ-सुथरी वेशभूषा में, हाथों में तिरंगा और चेहरे पर मुस्कान लिए विद्यालय परिसर में एकत्रित होने लगे।
कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय की प्रधानाचार्य गरिमा सिंह द्वारा ध्वजारोहण के साथ हुई। तिरंगे को सलामी दी गई और पूरे परिसर में राष्ट्रगान की गूंज सुनाई दी। राष्ट्रगान के बाद भारत माता और अमर शहीदों के प्रतीक चित्रों पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। यह पल न सिर्फ भावुक करने वाला था, बल्कि बच्चों और ग्रामीणों के भीतर देश के प्रति सम्मान और कर्तव्यबोध को और गहरा करने वाला भी था।
इसके बाद नन्हे-मुन्ने बच्चों ने रंगारंग cultural program प्रस्तुत किए। किसी ने देशभक्ति गीत गाए तो किसी ने नृत्य और कविता के माध्यम से अपने भाव प्रकट किए। बच्चों द्वारा प्रस्तुत स्वागत गीत ने कार्यक्रम में आए अतिथियों, अभिभावकों और ग्रामीणों का मन जीत लिया। तालियों की गड़गड़ाहट और बच्चों का आत्मविश्वास यह दर्शा रहा था कि सरकारी विद्यालयों में भी प्रतिभा और संस्कारों की कोई कमी नहीं है।
कार्यक्रम के दौरान समाजसेवी पुरुषोत्तम त्रिवेदी ने अपने संबोधन में कहा कि 77वां गणतंत्र दिवस हम सभी के लिए गर्व का विषय है। यह दिन हमें हमारे संविधान की शक्ति और महत्व को याद दिलाता है, जिसने भारत को एक मजबूत, स्वतंत्र और stable democracy बनाया है। उन्होंने बच्चों के अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि शिक्षा ही विकास की असली कुंजी है। जब तक समाज शिक्षित नहीं होगा, तब तक सही जानकारी और जागरूकता संभव नहीं है। इसलिए सबसे पहले अपने बच्चों की शिक्षा पर ध्यान दें, तभी गांव, समाज और देश आगे बढ़ेगा।
समाजसेवी द्वारा इस अवसर पर बच्चों और ग्रामीणों के लिए जलेबी मिष्ठान का वितरण भी किया गया। सादगी भरे इस आयोजन में जब बच्चों ने मिठाई लेते हुए खुशी जाहिर की, तो यह दृश्य अपने आप में बहुत कुछ कह गया। यह सिर्फ मिठाई नहीं थी, बल्कि समाज और विद्यालय के बीच जुड़ाव, अपनापन और सेवा भावना का प्रतीक थी। ग्रामीणों ने इस पहल की खुले दिल से सराहना की और कहा कि ऐसे छोटे-छोटे प्रयास समाज में positive thinking और unity को मजबूत करते हैं।
विद्यालय के शिक्षकों का योगदान भी इस कार्यक्रम में सराहनीय रहा। सहायक अध्यापिका रिचा यादव, हीरालाल गौतम, नीलम मिश्रा, जगदीश यादव और मोहित मिश्रा ने बच्चों को कार्यक्रम के लिए तैयार करने से लेकर आयोजन को सफल बनाने तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रधान प्रतिनिधि चंदन सिंह, राकेश गौतम, सुधीर सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और क्षेत्रवासी भी इस मौके पर उपस्थित रहे, जिससे कार्यक्रम और भी भव्य बन गया।
ग्रामीणों का कहना था कि इस तरह के आयोजन बच्चों में patriotism, discipline और confidence को बढ़ाते हैं। आज के digital दौर में जब बच्चे मोबाइल और स्क्रीन तक सीमित होते जा रहे हैं, ऐसे कार्यक्रम उन्हें अपनी जड़ों, अपने संविधान और अपने देश से जोड़ने का काम करते हैं।




