रिपोर्ट: माया लक्ष्मी मिश्रा मिश्रा, रायबरेली, उत्तर प्रदेश, कड़क टाइम्स
बसंत पंचमी का पर्व जब आता है तो वातावरण अपने आप ही उल्लास, उमंग और सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है, लेकिन सरेनी विकास खंड स्थित एस. एम. सिंह सरस्वती विद्या मन्दिर में मनाया गया बसंत पंचमी का पर्व कुछ खास नजर आया। राधा स्वामी सत्संग भवन के निकट स्थित इस अग्रणी शिक्षण संस्थान में शुक्रवार को ज्ञान, विद्या और संस्कार का ऐसा संगम देखने को मिला, जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावनात्मक रूप से जोड़ दिया। विद्यालय परिसर सुबह से ही पीले रंग की आभा, मंत्रोच्चारण और भक्ति संगीत से गूंज रहा था, जिससे पूरा माहौल devotional और positive vibes से भर गया।
विद्यालय में बसंत पंचमी के अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया, जिसमें छात्र-छात्राओं के साथ-साथ शिक्षक, शिक्षिकाएं और अभिभावक भी बड़ी संख्या में शामिल हुए। मां सरस्वती की प्रतिमा को फूलों, पीले वस्त्रों और आकर्षक सजावट से सुसज्जित किया गया था। विद्यार्थियों ने रंग-बिरंगे परिधान पहनकर पूरे उत्साह के साथ पूजा में भाग लिया। बच्चों के चेहरे पर उत्सुकता, श्रद्धा और सीखने की ललक साफ दिखाई दे रही थी, जो इस पर्व की सार्थकता को दर्शा रही थी।
इस अवसर पर विद्यालय के व्यवस्थापक अंजय सिंह ने विद्यार्थियों और अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहा कि बसंत पंचमी केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि ज्ञान और विद्या का प्रतीक है। यह पर्व बच्चों को सीखने, मेहनत करने और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि आज के competitive दौर में बच्चों के अंदर पढ़ाई के साथ-साथ अच्छे संस्कारों का होना भी उतना ही जरूरी है। हमारी जिम्मेदारी है कि हम उन्हें सिर्फ किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों से भी जोड़ें, ताकि वे भविष्य में एक बेहतर नागरिक बन सकें।
वहीं विद्यालय के प्रधानाचार्य मंजय सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि मां सरस्वती की पूजा-अर्चना से बच्चों में सीखने की इच्छा और सृजनात्मकता बढ़ती है। यह पर्व विद्यार्थियों को नए सत्र में नई ऊर्जा और नए संकल्प के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा सिर्फ अंक हासिल करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह सोचने, समझने और कुछ नया रचने की शक्ति भी देती है। बसंत पंचमी हमें याद दिलाती है कि ज्ञान के बिना जीवन अधूरा है और विद्या ही हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाती है।
पूजा-अर्चना के दौरान शिक्षक और छात्र एक साथ हवन और मंत्रोच्चारण में शामिल हुए। हवन की अग्नि और मंत्रों की ध्वनि से पूरा विद्यालय परिसर भक्तिमय हो गया। बच्चों ने पूरे मनोयोग से मां सरस्वती से आशीर्वाद प्राप्त किया और अपने उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रार्थना की। इस दौरान कई अभिभावकों की आंखों में भी भावुकता देखने को मिली, क्योंकि वे अपने बच्चों को शिक्षा और संस्कार के मार्ग पर आगे बढ़ते देख रहे थे।
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय परिसर को विशेष रूप से सजाया गया था। पीले गुब्बारे, फूलों की मालाएं और आकर्षक decoration ने पूरे माहौल को उत्सवमय बना दिया। बच्चों ने न केवल पूजा में भाग लिया, बल्कि उन्होंने बसंत पंचमी के महत्व पर चर्चा भी की और यह संकल्प लिया कि वे मन लगाकर पढ़ाई करेंगे और अपने माता-पिता व गुरुजनों का नाम रोशन करेंगे। यह दृश्य साफ तौर पर दिखा रहा था कि ऐसे आयोजनों से बच्चों के अंदर confidence और discipline दोनों विकसित होते हैं।
इस मौके पर विद्यालय से जुड़े कई शिक्षक-शिक्षिकाएं और गणमान्य लोग उपस्थित रहे। बचोले सिंह, महेंद्र, गायत्री, सावित्री, आदित्य, जितेंद्र, रोशन, विकास, उपेंद्र, अजय, पवन, सचिन, रामकुमार सहित अन्य शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी ने कार्यक्रम को और भी गरिमा प्रदान की। सभी ने एक स्वर में कहा कि ऐसे सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजन बच्चों के सर्वांगीण विकास में अहम भूमिका निभाते हैं।





