अमावां ब्लॉक में दिव्यांग बच्चों के अभिभावकों की परामर्श गोष्ठी आयोजित, मुख्यधारा से जोड़ने का मिला संदेश

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रिपोर्ट: संदीप मिश्रा, रायबरेली, उत्तर प्रदेश कड़क टाइम्स

अमावां ब्लॉक में दिव्यांग बच्चों के अभिभावकों की परामर्श गोष्ठी आयोजित, मुख्यधारा से जोड़ने का मिला संदेश

रायबरेली जिले के अमावां ब्लॉक सभागार में बेसिक शिक्षा विभाग की समेकित शिक्षा इकाई के तत्वावधान में एक विशेष परामर्श गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस गोष्ठी का उद्देश्य परिषदीय विद्यालयों में अध्ययनरत दिव्यांग बच्चों के अभिभावकों को जागरूक करना, उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी देना तथा समाज की मुख्यधारा से जोड़ना था।

कार्यक्रम का दिशा-निर्देशन खंड शिक्षा अधिकारी रिचा सिंह द्वारा किया गया, जबकि अध्यक्षता खंड विकास अधिकारी (BDO) संदीप सिंह ने की। इस अवसर पर विशेष शिक्षकों अभय प्रकाश श्रीवास्तव एवं मीना वर्मा ने कार्यक्रम का संचालन एवं व्यवस्थापन संभाला।

गोष्ठी की विशेष बात यह रही कि इसमें दृष्टिबाधित गायक शबाब अली बतौर रिसोर्स पर्सन मौजूद रहे। उन्होंने अपनी गायकी से उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया और यह संदेश दिया कि दिव्यांगता कभी भी प्रतिभा के रास्ते की रुकावट नहीं बन सकती।


अभिभावकों की शंकाओं का समाधान और योजनाओं की जानकारी

विशेष शिक्षक अभय प्रकाश श्रीवास्तव ने दिव्यांग बच्चों के अभिभावकों की तमाम शंकाओं का धैर्यपूर्वक समाधान किया। उन्होंने सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं और स्कीमों पर विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि शिक्षा विभाग दिव्यांग बच्चों के लिए समय-समय पर विशेष योजनाएँ चलाता है जिनसे बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ आर्थिक, मानसिक और सामाजिक मजबूती मिलती है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि आज के दौर में दिव्यांग बच्चों को केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं रखना है, बल्कि उनके लिए Skill Development और Vocational Training जैसी सुविधाएँ भी जरूरी हैं। इससे वे भविष्य में आत्मनिर्भर बन सकेंगे।


यूडीआईडी कार्ड की महत्ता पर जोर

विशेष शिक्षक मीना वर्मा ने दिव्यांग बच्चों के अभिभावकों को समझाया कि यूडीआईडी (Unique Disability ID) कार्ड बनवाना कितना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि इस कार्ड से न केवल बच्चों की पहचान और दस्तावेजीकरण होगा, बल्कि उन्हें शिक्षा, चिकित्सा, छात्रवृत्ति और अन्य सरकारी लाभों का सीधा फायदा मिलेगा।

उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे समय पर अपने बच्चों का UDID Card बनवाएँ ताकि आने वाले समय में किसी प्रकार की समस्या न हो और बच्चों को हर योजना का लाभ मिल सके।


कला और संस्कृति के माध्यम से प्रेरणा

कार्यक्रम का सबसे आकर्षक हिस्सा रहा रिसोर्स पर्सन शबाब अली का गायन। दृष्टिबाधित होने के बावजूद उन्होंने अपनी मधुर आवाज से उपस्थित अभिभावकों और शिक्षकों को भावविभोर कर दिया।
उनकी प्रस्तुति ने यह संदेश दिया कि यदि मन में आत्मविश्वास हो और इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो किसी भी प्रकार की शारीरिक बाधा इंसान को रोक नहीं सकती।

शबाब अली के गीतों से प्रभावित होकर कई अभिभावकों की आँखों में आँसू आ गए। वहीं, दिव्यांग बच्चों जैसे राज, मुस्तकीम और वसीम ने भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सभी का मन मोह लिया।


अधिकारियों का मार्गदर्शन और प्रेरणा

खंड विकास अधिकारी संदीप सिंह ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी शिक्षकों और अभिभावकों की सराहना की। उन्होंने कहा कि दिव्यांग बच्चों की शिक्षा और उनके व्यक्तित्व विकास के लिए अध्यापकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

उन्होंने विशेष शिक्षकों के कार्यों को सराहा और उन्हें भविष्य में और बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित किया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन की प्राथमिकता है कि हर दिव्यांग बच्चा शिक्षित और आत्मनिर्भर बने।

खंड शिक्षा अधिकारी रिचा सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि दिव्यांग बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना हम सबकी जिम्मेदारी है। उन्होंने शिक्षकों को निर्देश दिया कि बच्चों की पढ़ाई को रोचक और व्यवहारिक बनाएं ताकि वे पढ़ाई से जुड़े रहें और आत्मविश्वास विकसित करें।


अभिभावकों की सहभागिता

गोष्ठी में शामिल हुए अभिभावकों ने भी अपनी-अपनी बातें रखीं।
राकेश मौर्या, सुमन देवी, सोहनलाल और अमृत जैसे अभिभावकों ने शिक्षा विभाग और शिक्षकों के प्रयासों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से उन्हें न केवल जागरूकता मिलती है, बल्कि बच्चों के भविष्य को लेकर आशा भी जागती है।

अभिभावकों ने यह भी माना कि दिव्यांग बच्चों को आगे बढ़ाने में स्कूल और समाज की भूमिका बहुत बड़ी है।


सहयोग और प्रबंधन

इस कार्यक्रम में सुरेश, आशीष और सौरभ ने विशेष सहयोग प्रदान किया, जिससे आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
कार्यक्रम में ब्लॉक क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों में अध्ययनरत दिव्यांग बच्चों के अभिभावकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।


समाज को मिला नया संदेश

इस गोष्ठी ने न केवल अभिभावकों को जागरूक किया बल्कि यह संदेश भी दिया कि दिव्यांग बच्चे बोझ नहीं बल्कि समाज की अमूल्य धरोहर हैं।
जरूरत है केवल उन्हें सही दिशा, बेहतर शिक्षा और उचित सुविधाएँ देने की।

समेकित शिक्षा इकाई द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम इस बात का उदाहरण है कि यदि प्रशासन, शिक्षक और अभिभावक मिलकर काम करें तो कोई भी बच्चा पिछड़ा हुआ नहीं रह सकता।


निष्कर्ष

अमावां ब्लॉक की यह परामर्श गोष्ठी साबित करती है कि आज शिक्षा विभाग केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं है बल्कि समाज की सोच को बदलने की दिशा में भी काम कर रहा है।
दृष्टिबाधित गायक शबाब अली की प्रस्तुति से लेकर अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी तक, हर पहलू ने यह दिखाया कि दिव्यांग बच्चों के लिए उज्जवल भविष्य की राह तैयार हो रही है।

इस तरह के आयोजन न सिर्फ बच्चों को प्रोत्साहित करते हैं बल्कि समाज को भी यह सिखाते हैं कि Inclusion (समावेशन) ही असली विकास की कुंजी है।


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