AIIMS रायबरेली में सुरक्षा कर्मियों के लिए सॉफ्ट स्किल वर्कशॉप, ‘करुणा सबसे बड़ी सेवा’ थीम पर दिया गया व्यवहारिक प्रशिक्षण

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रिपोर्ट: माया लक्ष्मी मिश्रा, रायबरेली, उत्तर प्रदेश, कड़क टाइम्स

रायबरेली, 10 दिसम्बर 2025

रायबरेली। एम्स रायबरेली के परिसर में आज एक महत्वपूर्ण और प्रभावशाली व्यक्तित्व विकास (सॉफ्ट स्किल) कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसने सुरक्षा सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों को नई ऊर्जा और संवेदनशीलता से भर दिया। यह कार्यशाला विंग्स टीम, दिल्ली और टीम आईरिश के संयुक्त सौजन्य से आयोजित की गई थी। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य था—एम्स रायबरेली के सुरक्षा गार्ड्स और सुपरवाइजर्स को ऐसी व्यवहारिक और कम्युनिकेशन स्किल्स से प्रशिक्षित करना, जिससे वे अस्पताल आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों के प्रति और अधिक संवेदनशील, सहायक तथा प्रोफेशनल हो सकें।

कार्यशाला में मुख्य प्रशिक्षक के रूप में कर्नल (सेवानिवृत्त) गौरव चतुर्वेदी, एजीएम, उत्तर प्रदेश पूर्व सैनिक कल्याण निगम लिमिटेड, तथा पेशेवर प्रशिक्षक अनुदिता कपूर मौजूद रहीं। अनुदिता कपूर मनोविज्ञान में स्नातकोत्तर हैं और ग्लोबल करियर काउंसलर (GCC) के अंतर्गत ‘ग्रीन बेल्ट काउंसलर’ के रूप में प्रमाणित हैं। दोनों प्रशिक्षकों ने सुरक्षा कर्मियों को व्यवहारिक उदाहरणों, रोल-प्ले एक्टिविटीज़ और इमोशनल कनेक्ट पर आधारित प्रशिक्षण देकर उन्हें अस्पताल के संवेदनशील वातावरण में बेहतर ढंग से कार्य करने की प्रेरणा दी।

कार्यशाला का मुख्य विषय था — “करुणा सबसे बड़ी सेवा”। प्रशिक्षकों ने बताया कि अस्पताल वह स्थान है जहाँ मरीज और उनके तीमारदार पहले से ही शारीरिक व मानसिक तनाव में होते हैं। ऐसे में सुरक्षा कर्मियों का छोटा सा विनम्र व्यवहार, मुस्कान, धैर्यपूर्ण संवाद और सहायता के छोटे-छोटे कदम मरीजों के अनुभव को बेहद आसान बना सकते हैं। सुरक्षा गार्ड्स को यह भी समझाया गया कि उनकी ड्यूटी सिर्फ सुरक्षा प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे अस्पताल के पहले संपर्क बिंदु (first point of contact) होते हैं, जो संस्था की छवि पर सीधा प्रभाव डालते हैं।

इस प्रशिक्षण में 08 सुरक्षा सुपरवाइज़र और 271 सुरक्षा गार्ड्स शामिल हुए। प्रशिक्षकों ने उन्हें सिखाया कि ड्यूटी के दौरान धैर्य, सहानुभूति, विनम्रता और सकारात्मक संवाद कैसे बनाए रखें। उन्हें बताया गया कि “आपकी मदद के लिए हम हैं” जैसी सोच से काम करना ही वास्तविक सेवा है। आगंतुकों को सम्मानपूर्वक मार्गदर्शन देना, कठिन परिस्थितियों में शांत रहना, और अपने व्यवहार से अस्पताल की प्रतिष्ठा बढ़ाना सुरक्षा कर्मियों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।

कार्यक्रम के अंत में एम्स रायबरेली की कार्यकारी निदेशक डॉ. अमिता जैन ने सभी सुरक्षा कर्मियों का मनोबल बढ़ाते हुए कहा कि अस्पताल में आने वाला हर मरीज और तीमारदार उम्मीद लेकर आता है, और सुरक्षा कर्मियों का सकारात्मक व्यवहार उस उम्मीद को मजबूती देता है। उन्होंने कहा कि “एम्स रायबरेली केवल इलाज का केंद्र नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं का भी संस्थान है, और आप सभी उस संवेदनशीलता के महत्वपूर्ण प्रतिनिधि हैं।”


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