रिपोर्ट: माया लक्ष्मी मिश्रा, रायबरेली, उत्तर प्रदेश, कड़क टाइम्स
रायबरेली, 25 जनवरी 2026। उत्तर प्रदेश दिवस के मौके पर रायबरेली में कुछ ऐसा हुआ, जिसने केवल सरकारी योजनाओं की जानकारी ही नहीं दी, बल्कि समाज को झकझोर कर यह सवाल भी छोड़ दिया कि क्या अब वक्त आ गया है बाल विवाह को हमेशा के लिए खत्म करने का? जिलाधिकारी हर्षिता माथुर एवं मुख्य विकास अधिकारी अंजूलता के निर्देशों तथा जिला प्रोबेशन अधिकारी जयपाल वर्मा के कुशल मार्गदर्शन में महिला कल्याण विभाग की टीम ने यूपी दिवस के अवसर पर स्टॉल के माध्यम से बाल विवाह मुक्त भारत 100 दिवसीय अभियान के अंतर्गत एक प्रभावशाली जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया।
कार्यक्रम के दौरान महिला कल्याण विभाग के स्टॉल पर सुबह से ही लोगों की भीड़ देखने को मिली। आमजन, महिलाएं, युवा और अभिभावक न केवल योजनाओं की जानकारी ले रहे थे, बल्कि बाल विवाह जैसे संवेदनशील मुद्दे पर खुलकर चर्चा करते भी नजर आए। विभागीय टीम ने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के प्रावधानों को बेहद सरल और स्पष्ट भाषा में समझाया, जिससे लोगों को यह एहसास हुआ कि बाल विवाह केवल सामाजिक बुराई नहीं, बल्कि एक गंभीर कानूनी अपराध भी है।
स्टॉल पर मौजूद अधिकारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बताया कि बाल विवाह बच्चों के शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास को पूरी तरह रोक देता है। कम उम्र में शादी बच्चों से उनका बचपन, शिक्षा और सपने छीन लेती है। विशेष रूप से लड़कियों के संदर्भ में बताया गया कि 18 वर्ष से कम उम्र में विवाह करने वाली बालिकाएं घरेलू हिंसा का अधिक शिकार होती हैं और उनके स्कूल छोड़ने की संभावना भी कई गुना बढ़ जाती है। यह जानकारी सुनकर कई अभिभावक गंभीर और चिंतित नजर आए।
कार्यक्रम के दौरान यह भी स्पष्ट किया गया कि बाल विवाह करना कानूनन अपराध है। यदि कोई व्यक्ति बाल विवाह कराता है या इसमें सहयोग करता है, तो उसे एक लाख रुपये तक का जुर्माना, दो वर्ष तक का कठोर कारावास या दोनों से दंडित किया जा सकता है। यह बात सुनकर कई लोगों ने पहली बार महसूस किया कि परंपरा के नाम पर की जाने वाली यह गलती पूरे परिवार और समाज को कानूनी मुश्किलों में डाल सकती है।
महिला कल्याण विभाग की टीम ने जोर देकर कहा कि बाल विवाह को रोकना केवल सरकार या किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि परिवार, समाज, समुदाय और देश के हर नागरिक को इसमें active role निभाना होगा। तभी “बाल विवाह मुक्त भारत” का सपना हकीकत में बदल सकता है। इस दौरान यह भी बताया गया कि विवाह के लिए लड़की की न्यूनतम उम्र 18 वर्ष और लड़के की 21 वर्ष पूर्ण होना अनिवार्य है।
कार्यक्रम का एक भावनात्मक और प्रभावशाली क्षण तब आया, जब उपस्थित लोगों को बाल विवाह मुक्त भारत की शपथ दिलाई गई। सभी ने एक स्वर में यह संकल्प लिया कि वे अपने परिवार, पड़ोस और समुदाय में किसी भी बच्चे का बाल विवाह नहीं होने देंगे और यदि कहीं ऐसा प्रयास होता है तो उसकी सूचना पंचायत और सरकार को देंगे। यह collective pledge माहौल को बेहद गंभीर और उम्मीद से भरा बना गई।
जागरूकता कार्यक्रम के दौरान विभागीय योजनाओं का भी व्यापक प्रचार-प्रसार किया गया। स्टॉल के माध्यम से मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना, वन स्टॉप सेंटर, बाल सेवा योजना, स्पॉन्सरशिप योजना, 181 महिला हेल्पलाइन, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना और पति की मृत्यु पर निराश्रित महिला पेंशन योजना जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं की जानकारी दी गई। कई महिलाओं ने योजनाओं से जुड़ी eligibility और application process के बारे में सवाल पूछे, जिनका मौके पर ही समाधान किया गया।
इस पूरे आयोजन में महिला कल्याण विभाग के वरिष्ठ लिपिक, जिला मिशन समन्वयक, जेंडर स्पेशलिस्ट, काउंसलर, आंकड़ा विश्लेषक, सामाजिक कार्यकर्ता, एम.टी.एस. और बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे। सभी ने एकमत से माना कि इस तरह के awareness programs समाज में real change लाने की दिशा में मजबूत कदम हैं।