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‘वीरों का अभिमान तिरंगा जिंदाबाद’— सहदेमऊ में कवि सम्मेलन बना राष्ट्रप्रेम, प्रेम और सामाजिक समरसता का सशक्त मंच

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रिपोर्ट: माया लक्ष्मी मिश्रा, रायबरेली, उत्तर प्रदेश, कड़क टाइम्स

सरेनी विकास क्षेत्र के सहदेमऊ गांव में रविवार को आयोजित भव्य कवि सम्मेलन ने पूरे ग्रामीण अंचल को साहित्य, संस्कृति और देशभक्ति की भावना से सराबोर कर दिया। यह आयोजन केवल एक साहित्यिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि राष्ट्रप्रेम, मानवीय मूल्यों और सामाजिक सौहार्द का जीवंत उत्सव बनकर उभरा, जहां शब्दों के माध्यम से भारत माता के प्रति श्रद्धा, प्रेम और एकता का संदेश दिया गया। कार्यक्रम का आयोजन आशीष मिश्रा एडवोकेट द्वारा किया गया, जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार देव नारायण शुक्ला ने की। शुभारंभ मुख्य अतिथि दिनेश दुबे, दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री (भारत सरकार) ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन कर किया।

कवि सम्मेलन की शुरुआत होते ही पंडाल में मौजूद श्रोताओं के बीच एक अलग ही ऊर्जा का संचार हो गया। कवि सुनील सरगम ने अपनी ओजस्वी पंक्तियां— “मातृभूमि के लिए है सर्वस्व वारा, धन्य हुआ जिनसे मेरा वीर बैसवारा”— पढ़कर वातावरण को देशभक्ति से भर दिया। उनकी रचना पर श्रोताओं की तालियों ने यह साफ कर दिया कि कविता आज भी लोगों के दिलों में राष्ट्र के प्रति गर्व जगाने की ताकत रखती है। इसके बाद शिवतोष संघर्षी ने जब “वीरों का अभिमान तिरंगा जिंदाबाद, भारत की पहचान तिरंगा जिंदाबाद” पढ़ा तो पूरा पंडाल जयकारों से गूंज उठा और लोग देर तक खड़े होकर तालियां बजाते रहे।

वाणी पुत्र वाई.पी. सिंह ने अपनी रचना के माध्यम से मानवता और परोपकार का संदेश दिया। उनकी पंक्तियां— “परहित में रहते लगे जिनके दोनों हाथ, करता उन पर ही दया सदा त्रिलोकीनाथ”— ने श्रोताओं को आत्ममंथन के लिए मजबूर कर दिया। वहीं डॉ. विनय भदौरिया की ओजपूर्ण कविता ने राष्ट्रभक्ति को नई ऊंचाई दी। उन्होंने कहा— “पूरा जग परिवार हमारा सबकी खातिर प्यार लिखें, लेकिन कोई आंख दिखाए अपनी भारत माता को, रक्त उबलने लगे देश का शब्दों में अंगार लिखें”— जिसे सुनकर श्रोता रोमांचित हो उठे और पूरा वातावरण भारत माता की जय के नारों से गूंज उठा।

कवि सम्मेलन में प्रेम और भक्ति रस की भी खूबसूरत प्रस्तुति देखने को मिली। कमलेश शुक्ला ने राधा-कृष्ण प्रेम पर आधारित भावनात्मक रचना प्रस्तुत करते हुए राधा के त्याग, प्रेम और दर्शन को शब्दों में पिरोया। उनकी कविता— “राधा ने प्रीत करी हरि सो, खुद प्रीति को धन्य बना गई राधा”— पर श्रोताओं ने खूब वाहवाही की। इसके बाद डॉ. शैलेश प्रताप सिंह ने सामाजिक सौहार्द और आपसी भाईचारे का संदेश देते हुए कहा— “नफरतों के इन अंधेरों को मिटाया जाये, चराग दिल में मोहब्बत का जलाया जाये”— जिसने श्रोताओं के दिलों को छू लिया।

कार्यक्रम का संचालन वाणी पुत्र वाई.पी. सिंह ने अत्यंत प्रभावी ढंग से किया, वहीं आभार आशीष मिश्रा ज्ञानू एवं मनीष मिश्रा एडवोकेट ने व्यक्त किया। आयोजकों ने कहा कि गांव में साहित्यिक और सांस्कृतिक चेतना को जीवित रखना उनका उद्देश्य है और कवियों व श्रोताओं का उत्साह इस आयोजन की सफलता का प्रमाण है। मुख्य अतिथि दिनेश दुबे ने अपने संबोधन में कहा कि कविता समाज को जागरूक करती है और ऐसे आयोजनों से राष्ट्रप्रेम के साथ-साथ सामाजिक एकता भी मजबूत होती है।

कार्यक्रम में उपस्थित राम प्रताप सिंह ने कहा कि कवियों की रचनाओं ने आज के समय में संस्कार और देशभक्ति का संदेश दिया है, जो नई पीढ़ी के लिए बेहद जरूरी है। कांग्रेस जिला प्रवक्ता सिद्धार्थ त्रिवेदी ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में इतने प्रभावशाली कवि सम्मेलन का आयोजन प्रेरणादायक है और इससे युवाओं का साहित्य की ओर रुझान बढ़ेगा। अनूप बाजपेई, पूर्व चेयरमैन लालगंज ने इसे गांवों की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाई देने वाला आयोजन बताया। वहीं निखिल पांडेय, जिलाध्यक्ष भाजयुमो ने कहा कि यह मंच युवाओं को literature और nationalism से जोड़ने का प्रभावी माध्यम है।


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