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शहीद अब्दुल हमीद को मया बाज़ार अयोध्या में श्रद्धांजलि, मुस्लिम इदरीशी महासभा ने शिक्षा और एकता पर दिया जोर

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रिपोर्ट: संदीप मिश्रा, रायबरेली, उत्तर प्रदेश

स्थान: मया (अयोध्या)

“शहीदों के मजारों पर लगेंगे हर बरस मेले,
वतन पर मरने वालों का बस यहीं बाकी निशां होगा…”

इन पंक्तियों को साकार करने वाले परमवीर चक्र विजेता और भारत रत्न से सम्मानित भारत के वीर सपूत शहीद अब्दुल हमीद को उनके शहादत दिवस पर मया बाज़ार अयोध्या में याद किया गया। मुस्लिम इदरीशी महासभा मया ब्लॉक की ओर से आयोजित श्रद्धांजलि सभा में बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए और गोशाईगंज में शहीद को श्रद्धासुमन अर्पित किए।


कार्यक्रम की मुख्य बातें

मुस्लिम इदरीशी महासभा मया ब्लॉक अध्यक्ष मास्टर मुबारक अली इदरीशी ने इस मौके पर समाज के विकास और शिक्षा पर बल दिया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा अल्पसंख्यकों के लिए चलाई जा रही योजनाएँ, जैसे –

समाज के विद्यार्थियों के लिए बहुत लाभकारी हैं। इन योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाकर समाज को पिछड़ेपन से बाहर लाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि आज सबसे बड़ी जरूरत तकनीकी शिक्षा पर ध्यान देने की है, क्योंकि इसके बिना समाज का वास्तविक विकास संभव नहीं है।


शहीद अब्दुल हमीद की वीरता

1965 के भारत-पाक युद्ध में शहीद अब्दुल हमीद ने अदम्य साहस दिखाते हुए पाकिस्तान के आधुनिक पैटन टैंकों को नष्ट किया और भारतीय सेना की जीत में अहम भूमिका निभाई। उनकी वीरता और शहादत को याद करते हुए वक्ताओं ने कहा कि उनका जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा है और उनकी कुर्बानी हमेशा अमर रहेगी।


शिक्षा और एकता पर जोर

कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि समाज में शिक्षा ही वह साधन है, जो पिछड़ेपन को मिटा सकती है। साथ ही उन्होंने युवाओं से आधुनिक शिक्षा और तकनीकी ज्ञान हासिल करने की अपील की। वक्ताओं ने यह भी कहा कि समाज को जात-पात और भेदभाव से ऊपर उठकर एकजुट रहना चाहिए, तभी सच्चे मायनों में विकास संभव है।


कार्यक्रम में मौजूद रहे सम्मानित लोग

श्रद्धांजलि सभा में प्रमुख रूप से उपस्थित रहे –

इसके अलावा बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी मौजूद रहे और उन्होंने शहीद को नमन किया।


निष्कर्ष

मया बाज़ार अयोध्या में आयोजित यह कार्यक्रम केवल शहीद को श्रद्धांजलि देने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह समाज को शिक्षा और एकता की दिशा में आगे बढ़ाने का भी संदेश देता है।

शहीद अब्दुल हमीद का जीवन और बलिदान हमें यह सिखाता है कि सच्चा देशप्रेम केवल शब्दों में नहीं, बल्कि कर्म में दिखना चाहिए।


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