क्या संत नरहरी दास की भक्ति से बदलेगा स्वर्णकार समाज का भविष्य?

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रिपोर्ट: संदीप मिश्रा, रायबरेली, उत्तर प्रदेश, कड़क टाइम्स

रायबरेली। जब किसी समाज को दिशा और आत्मबल की जरूरत होती है, तब इतिहास और आस्था से जुड़ी विभूतियां मार्गदर्शन का काम करती हैं। कुछ ऐसा ही संदेश ऊंचाहार में आयोजित स्वर्णकार समाज के कार्यक्रम से सामने आया, जहां आराध्य संत शिरोमणि नरहरी दास जी की जयंती श्रद्धा, विचार और संकल्प के साथ मनाई गई। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वर्णकार राजनीतिक भागीदारी मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष जितेंद्र वर्मा स्वर्णकार ने कहा कि बिट्ठल भगवान की प्रेरणा और संत नरहरी दास जी के आदर्श आज भी स्वर्णकार समाज के लिए उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने अपने समय में थे। उनका अनुसरण करके ही समाज संगठित होकर आगे बढ़ सकता है।

रविवार को भाजपा ओबीसी मोर्चा के प्रांतीय मंत्री अभिलाष चंद्र कौशल के कैंप कार्यालय पर आयोजित इस कार्यक्रम की शुरुआत संत नरहरी दास की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर की गई। वातावरण में भक्ति, सम्मान और सामाजिक चेतना का अद्भुत संगम देखने को मिला। मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे जितेंद्र वर्मा स्वर्णकार का स्वागत समाज के वरिष्ठजनों और युवाओं ने एकजुटता के संदेश के साथ किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्वर्णकार समाज के लोग उपस्थित रहे, जिससे यह आयोजन केवल जयंती समारोह न रहकर सामाजिक विमर्श का मंच बन गया।

अपने संबोधन में जितेंद्र वर्मा स्वर्णकार ने कहा कि हमारे आराध्य संत नरहरी दास जी बिट्ठल भगवान के परम भक्त थे। उनकी भक्ति केवल पूजा तक सीमित नहीं थी, बल्कि उनके जीवन का हर कर्म समाज को जोड़ने और आत्मसम्मान जगाने से जुड़ा था। आज भी स्वर्णकार समाज उनकी शिक्षाओं, अनुशासन और नियमों का पालन कर रहा है। यही वजह है कि देशभर में मंच के माध्यम से संत नरहरी दास जी की जयंती मनाई जा रही है, ताकि नई पीढ़ी अपने गौरवशाली इतिहास से जुड़े और अपनी पहचान को समझे।

कार्यक्रम में क्षेत्रीय मंत्री अभिलाष चंद्र कौशल ने भी समाज की एकता और राजनीतिक भागीदारी पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्वर्णकार समाज सातों बिरादरियों को जोड़ने का कार्य कर रहा है। इस बार पूरा विश्वकर्मा समाज Mission 2027 के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहा है। आने वाले समय में सदन में विश्वकर्मा समाज की भागीदारी केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि politically effective होगी। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे education, organization और participation के मंत्र को अपनाएं।

कार्यक्रम के दौरान समाज की वर्तमान स्थिति, चुनौतियों और भविष्य की रणनीति पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि आज जरूरत है social unity के साथ-साथ political awareness की। जब समाज अपने आराध्य और आदर्शों से जुड़कर आगे बढ़ता है, तो उसे कोई ताकत पीछे नहीं रोक सकती। संत नरहरी दास जी का जीवन इस बात का उदाहरण है कि भक्ति और शक्ति का संतुलन समाज को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकता है।

इस अवसर पर प्रदेश महामंत्री राधेश्याम सोनी, राजू सोनी, गिरधारी सोनी, सत्य प्रकाश सोनी, राजेन्द्र सोनी, जवाहरलाल सोनी, श्याम जी सोनी, राकेश भदोरिया, अभय सिंह, राजकुमार तिवारी, विनीत कौशल और अरविंद शर्मा सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में समाज की एकजुटता और आने वाले समय में निर्णायक भूमिका निभाने का संकल्प दोहराया।

कार्यक्रम का समापन इसी संदेश के साथ हुआ कि संत नरहरी दास जी की भक्ति केवल आस्था नहीं, बल्कि समाज को संगठित करने की शक्ति है। अब यह समाज पर निर्भर करता है कि वह इस प्रेरणा को कितनी गंभीरता से अपनाकर अपने भविष्य की दिशा तय करता है।


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