रिपोर्ट: संदीप मिश्रा रायबरेली, रायबरेली, उत्तर प्रदेश, कड़क टाइम्स
रायबरेली: भारत विकास परिषद, शाखा रायबरेली के तत्वावधान में स्वामी विवेकानंद जयंती के अवसर पर शहर के कृपलानी सरस्वती विद्या मंदिर में एक प्रेरणादायक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसने पूरे वातावरण को सेवा, समरसता और राष्ट्रप्रेम की भावना से भर दिया। कार्यक्रम की शुरुआत भारत विकास परिषद द्वारा स्थापित स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा पर परिषद सदस्यों द्वारा पुष्पांजलि अर्पित कर की गई, जिसके साथ ही युवाओं को उनके महान विचारों से जुड़ने का आह्वान भी हुआ। पूरे सभागार में एक positive vibe देखने को मिली, जहां हर चेहरा प्रेरणा और आत्मविश्वास से भरा नजर आया।
परिषद के अध्यक्ष अरविंद श्रीवास्तव ने अपने स्वागत संबोधन में कहा कि स्वामी विवेकानंद के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने सौ साल पहले थे। उन्होंने युवाओं से कौशल विकास अभियान से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने का आह्वान करते हुए कहा कि आज का भारत तभी आगे बढ़ेगा जब उसका युवा वर्ग self-reliant और skill-based होगा। उन्होंने युवाओं से कहा कि केवल डिग्री नहीं, बल्कि व्यवहारिक ज्ञान और सामाजिक जिम्मेदारी ही सच्ची सफलता की कुंजी है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रख्यात कथावाचक स्वामी गोविन्द जी महाराज ने अपने ओजस्वी संबोधन में युवाओं को जीवन में clear goal तय करने, अनुशासन बनाए रखने और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने जिस भारत का सपना देखा था, वह ऐसा भारत था जहां हर युवा अपने भीतर की शक्ति को पहचान कर समाज और राष्ट्र के लिए काम करे। उनके विचारों ने श्रोताओं को भीतर तक झकझोर दिया और एक नई ऊर्जा का संचार किया।
इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विद्या भारती के क्षेत्रीय संगठन मंत्री हेमचंद विशिष्ट विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने अपने वक्तव्य में स्वामी विवेकानंद के जीवन दर्शन को अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण का कार्य संस्कार, सेवा और समर्पण से ही संभव है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे अपनी जड़ों से जुड़े रहकर modern India के निर्माण में योगदान दें।
कार्यक्रम के दौरान मकर संक्रांति उत्सव भी मनाया गया, जिसमें समरसता भोज का आयोजन किया गया। इस भोज में सभी वर्गों के लोगों ने एक साथ बैठकर भोजन किया, जो सामाजिक एकता और भाईचारे का जीवंत उदाहरण बना। यह दृश्य अपने आप में यह संदेश दे रहा था कि भारत की असली ताकत diversity में unity है।
समाज सेवा के संकल्प को आगे बढ़ाते हुए कार्यक्रम के उपरांत विभिन्न विद्यालयों में कार्यरत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को न्यायाधीश राजेन्द्र नाथ की स्मृति में ठंड से बचाव हेतु कंबलों का वितरण किया गया। जब जरूरतमंदों के हाथों में कंबल पहुंचे तो उनके चेहरों पर दिखी राहत और मुस्कान ने पूरे आयोजन को सार्थक बना दिया। यह पहल भारत विकास परिषद की service-oriented सोच को दर्शाती है।