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महराजगंज में टूटा दुखों का पहाड़: एक ही दिन दो समाजसेवियों के निधन से कस्बा गमगीन, हर आंख नम

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रिपोर्ट: माया लक्ष्मी मिश्रा, रायबरेली, उत्तर प्रदेश, कड़क टाइम्स

महराजगंज, रायबरेली।
शुक्रवार का दिन महराजगंज क्षेत्र के लिए कभी न भूलने वाला दुखद दिन बनकर आया। कस्बे के दो प्रतिष्ठित, सम्मानित और सामाजिक रूप से सक्रिय व्यक्तियों के निधन की खबर ने पूरे क्षेत्र को शोक में डुबो दिया। सुबह से ही जैसे ही पहली दुखद सूचना फैली, लोगों के चेहरों पर मायूसी छा गई और कुछ ही घंटों बाद दूसरी मौत की खबर ने माहौल को और भी भारी कर दिया। पूरा कस्बा एक गहरे sorrow और silence में डूबा नजर आया।

पहली दुखद सूचना महराजगंज के जाने-माने व्यवसाई एवं समाजसेवी रामकंकन गुप्ता (77 वर्ष) के निधन की रही। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे और लखनऊ मेडिकल कॉलेज में उपचाराधीन थे। शुक्रवार को उनके निधन की खबर जैसे ही महराजगंज पहुंची, व्यापारिक वर्ग, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों में शोक की लहर दौड़ गई। रामकंकन गुप्ता न सिर्फ एक सफल businessman थे, बल्कि सामाजिक कार्यों में उनकी सक्रिय भूमिका के कारण उन्हें क्षेत्र में विशेष सम्मान प्राप्त था। जरूरतमंदों की मदद, धार्मिक आयोजनों में सहयोग और सामाजिक एकता के लिए उनके प्रयासों को लोग आज भी याद करते हैं।

इस दुखद खबर से लोग संभल भी नहीं पाए थे कि कुछ ही समय बाद दूसरी पीड़ादायक सूचना ने पूरे कस्बे को और ज्यादा गमगीन कर दिया। कस्बा स्थित श्री राम जानकी मंदिर के संचालक एवं वरिष्ठ व्यवसाई जगदीप वर्मा की 97 वर्षीय माता लीलावती सोनकर के निधन की खबर सामने आई। वृद्धावस्था के बावजूद लीलावती सोनकर क्षेत्र में एक सादगीपूर्ण, धार्मिक और आदर्श जीवन के लिए जानी जाती थीं। उनके निधन से न केवल वर्मा परिवार, बल्कि पूरा महराजगंज क्षेत्र शोकाकुल हो उठा। लोगों ने इसे एक युग के अंत के रूप में देखा।

एक ही दिन दो प्रतिष्ठित व्यक्तियों के पंचतत्व में विलीन होने से कस्बे का माहौल पूरी तरह mournful हो गया। दोनों ही परिवारों के आवास पर श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगा रहा। सुबह से देर शाम तक लोगों का आना-जाना लगा रहा। हर कोई बस एक ही बात कहता नजर आया कि महराजगंज ने आज अपने दो मजबूत स्तंभ खो दिए। अंतिम दर्शन के दौरान लोगों की आंखें नम थीं और माहौल पूरी तरह emotional बना हुआ था।

समाजसेवी रामकंकन गुप्ता का अंतिम संस्कार बावन बुजुर्ग बल्ला गांव में विधि-विधान के साथ किया गया, जहां बड़ी संख्या में क्षेत्र के गणमान्य लोग, व्यापारी, सामाजिक कार्यकर्ता और ग्रामीण मौजूद रहे। वहीं लीलावती सोनकर का अंतिम संस्कार कस्बे के अंतेष्ठि स्थल पर किया गया, जहां श्रद्धालुओं ने नम आंखों से अंतिम विदाई दी। दोनों ही अंतिम संस्कारों में लोगों की भारी भीड़ यह दर्शा रही थी कि दिवंगत आत्माओं का समाज में कितना गहरा प्रभाव था।

श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों में चेयरमैन प्रतिनिधि प्रभात साहू, पूर्व विधायक रामलाल अकेला, विधायक श्यामसुंदर भारतीय, पंचवटी के संरक्षक गणेश सिंह, सुशील पासी, सुधीर साहू, कमलेश रस्तोगी, विजय वैश्य, प्रधान पंकज गुप्ता, केदार मौर्य, विजय धीमान सहित सैकड़ों की संख्या में लोग शामिल रहे। सभी ने दिवंगत आत्माओं के प्रति श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए उनके सामाजिक योगदान को याद किया और परिवारजनों को ढांढस बंधाया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि रामकंकन गुप्ता और लीलावती सोनकर जैसे व्यक्तित्व समाज के लिए inspiration हुआ करते थे। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए एक example रहेगा। महराजगंज क्षेत्र में लंबे समय तक इस double loss की चर्चा होती रहेगी। हर गली, हर चौराहे पर यही चर्चा थी कि शुक्रवार का दिन महराजगंज के इतिहास में एक बेहद दुखद अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है।


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