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रायबरेली में शुरू हुआ संस्कृति सप्ताह | भारत विकास परिषद का बड़ा आयोजन

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रिपोर्ट : संदीप मिश्रा, रायबरेली, उत्तर प्रदेश | Kadak Times

रायबरेली। भारतीय संस्कृति और संस्कारों को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के उद्देश्य से भारत विकास परिषद ने 18 अगस्त से “संस्कृति सप्ताह” की शुरुआत की। परिषद के अध्यक्ष अरविंद श्रीवास्तव ने बताया कि इस सात दिवसीय कार्यक्रम में भारतीय कला, साहित्य और संस्कारों पर आधारित विभिन्न गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी।

महिला संयोजक वाणी पांडेय ने कहा कि परिषद महिलाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विशेष रूप से कार्य कर रही है। उनके अनुसार, समाज को संस्कारित और सशक्त बनाने के लिए महिला शक्ति की भूमिका अत्यंत आवश्यक है।

कार्यक्रम के शुभारंभ पर डॉ. आर. बी. श्रीवास्तव (पूर्व क्षेत्रीय संरक्षक), क्षेत्रीय सेवा संयोजक अम्ब्रीश अग्रवाल, प्रांतीय उपाध्यक्ष नवल किशोर बाजपेयी, सचिव अजय त्रिवेदी, पूर्व अध्यक्ष राकेश कक्कड़, देवेंद्र श्रीवास्तव, राजा राम मौर्य और कमलेश चंद्र श्रीवास्तव सहित कई पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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संस्कृति सप्ताह के संचालन की जिम्मेदारी विभा श्रीवास्तव को मुख्य संयोजिका और उमेश अग्रवाल को सह-संयोजक के रूप में दी गई है। विभा ने बताया कि कार्यक्रम का शुभारंभ 18 अगस्त को भजन संध्या से किया गया है। 24 अगस्त को धर्मांतरण जैसे सामाजिक मुद्दे पर परिचर्चा के साथ इसका समापन होगा। वहीं उमेश अग्रवाल ने बताया कि मानस ज्ञान, वाद-विवाद प्रतियोगिता (Debate Competition), लोकनृत्य, और शिक्षाप्रद कहानियाँ इस सप्ताह के मुख्य आकर्षण रहेंगे।

रायबरेली जिले के विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राएँ इन सांस्कृतिक व शैक्षिक प्रतियोगिताओं में भाग लेकर अपनी प्रतिभा और रचनात्मकता का प्रदर्शन करेंगे। आयोजकों का मानना है कि इस तरह के आयोजन नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति के साथ गहराई से जोड़ने में सहायक होंगे और विद्यार्थियों में अनुशासन, संस्कार और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करेंगे।

संस्कृति सप्ताह केवल सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला नहीं है, बल्कि यह भारतीय परंपराओं, मूल्यों और सभ्यता को पुनर्जीवित करने का एक प्रयास है। पश्चिमी प्रभाव के बढ़ते माहौल में परिषद का यह आयोजन भारतीय संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुँचाने में अहम भूमिका निभाएगा।

लोगों की उम्मीद है कि यह कार्यक्रम रायबरेली ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए सांस्कृतिक जागरूकता का एक उदाहरण बनेगा और युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ने में मदद करेगा।


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