रिपोर्ट: संदीप मिश्रा, रायबरेली, उत्तर प्रदेश कड़क टाइम्स
रायबरेली। पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद साहब का जन्म दिवस (Eid-e-Milad-un-Nabi 2025) इस बार भी पूरे उत्साह और पारंपरिक अंदाज में मनाया जाएगा। इस अवसर पर शुक्रवार को रायबरेली शहर में ऐतिहासिक जुलूस-ए-मोहम्मदी निकाला जाएगा। तैयारियों को लेकर मुस्लिम समाज और अन्य समुदायों में जोश देखने को मिल रहा है।
मदरसे में हुई बैठक
बुधवार को एदारा शरैया मदरसा में एक बैठक आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता मौलाना अरबी-उल-अशरफ ने की। उन्होंने बताया कि जुलूस शुक्रवार सुबह 8:30 बजे हजरत मौलाना अब्दुल वदूद की सरपरस्ती में निकलेगा।
जुलूस का रूट पूर्व की भांति रहेगा। यह खोया मंडी, कैपरगंज, घंटाघर, रेलवे स्टेशन होते हुए खिन्नी तल्ला चौराहा पहुंचकर समाप्त होगा।
सौहार्द का संदेश
मौलाना अरबी-उल-अशरफ ने कहा कि इस्लाम का पैगाम इंसानियत, मोहब्बत और अमन है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अनुशासन, भाईचारे और सौहार्द के साथ इस जुलूस में शामिल हों।
शहर में सजावट और रौनक
जुलूस के दिन रायबरेली शहर की सड़कों और गलियों का नजारा बदला-बदला होगा। जगह-जगह तोरणद्वार, बैनर और लाइटिंग लगाई जाएगी। हरे झंडों से मार्ग को सजाया जाएगा। रास्ते में स्टॉल लगाकर शरबत और मिठाई बांटी जाएगी।
प्रशासन के इंतजाम
प्रशासन ने भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष तैयारियां की हैं। पुलिस बल की तैनाती होगी और संवेदनशील स्थानों पर सीसीटीवी कैमरों से निगरानी रखी जाएगी। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और सोशल मीडिया पर केवल प्रमाणित जानकारी ही साझा करें।
सामाजिक एकता की मिसाल
रायबरेली हमेशा से गंगा-जमुनी तहज़ीब का प्रतीक रहा है। यहां हर धर्म और समुदाय के लोग मिलकर त्योहारों को सफल बनाते हैं। जुलूस-ए-मोहम्मदी भी इसी परंपरा का हिस्सा है, जहां सभी मिलकर एकता और भाईचारे का संदेश देते हैं।
मुख्य बिंदु
- शुक्रवार सुबह 8:30 बजे निकलेगा जुलूस-ए-मोहम्मदी।
- मौलाना अब्दुल वदूद की सरपरस्ती में होगा आयोजन।
- मार्ग: खोया मंडी – कैपरगंज – घंटाघर – रेलवे स्टेशन – खिन्नी तल्ला चौराहा।
- शहर में सजावट, लाइटिंग और स्टॉल लगाए जाएंगे।
- पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए।
- सोशल मीडिया पर आयोजन की चर्चाएं।
निष्कर्ष
जुलूस-ए-मोहम्मदी सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भाईचारे और एकता का संदेश भी है। मौलाना अरबी-उल-अशरफ ने कहा कि ईद मिलादुन्नबी हमें पैगंबर मोहम्मद साहब की रहमत और शिक्षा को याद करने का अवसर देता है। इस अवसर को अनुशासन और अमन के साथ मनाया जाना चाहिए।





