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रायबरेली की राजनीति में भूचाल: यश पांडेय ने मंच साझा करने वालों पर साधा निशाना, कहा— “न ईमान, न धर्म और न ही वसूल”

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रिपोर्ट: संदीप मिश्रा, रायबरेली, उत्तर प्रदेश : कड़क टाइम्स

रायबरेली।
जिले की राजनीति में उस समय हलचल मच गई जब बीजेपी के दो बड़े नेता एक ही मंच पर दिखाई दिए। यह केवल एक political event नहीं था, बल्कि इसके बाद पूरे जनपद में चर्चाओं और अफवाहों का बाजार गर्म हो गया। खासकर इसलिए क्योंकि इन नेताओं और कांग्रेस परिवार के बीच वर्षों से वर्चस्व की राजनीति रही है, जिसमें कई दर्दनाक घटनाएं भी शामिल हैं।

याद दिला दें कि कांग्रेस नेता स्वर्गीय राकेश पांडेय की हत्या आज भी जिले के लोगों के जहन में ताजा है। उस दौर में रायबरेली की राजनीति हिंसा और वर्चस्व की लड़ाई का मैदान बनी हुई थी। राकेश पांडेय की हत्या ही नहीं, बल्कि इस वर्चस्व की राजनीति में कई और जानें भी गईं। और अब जब उनके विरोधी एक मंच पर आए, तो इसने राजनीति को नई दिशा दे दी है।


यश पांडेय का बड़ा हमला: “मेरे पिता को इंसाफ नहीं मिला”

स्वर्गीय राकेश पांडेय के बेटे यश पांडेय ने मंच साझा करने वाले नेताओं पर तीखा हमला बोला। उन्होंने अपने ही चाचा और ऊंचाहार विधायक डॉ. मनोज कुमार पांडेय पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि,

“ऊंचाहार विधायक किसी के नहीं हो सकते, वह केवल अपने फायदे और अवसर के साथ चलते हैं। उनके लिए ईमान, धर्म और वसूलों की कोई अहमियत नहीं है।”

यश पांडेय ने दावा किया कि उनके पिता की हत्या के बाद राजनीतिक स्तर पर बंद कमरे में समझौता कर लिया गया, जिसके कारण 23 साल बाद भी उन्हें और उनकी मां को न्याय नहीं मिल पाया।


“सिर्फ सुरक्षा का हवाला देकर राजनीति कर रहे हैं विधायक”

यश पांडेय ने यह भी कहा कि ऊंचाहार विधायक हर बार अपनी personal security का हवाला देते हुए राजनीति करते हैं। लेकिन जब उनके पिता की हत्या के बाद सबसे ज्यादा जरूरत थी, उस समय उन्होंने परिवार को न तो सहयोग दिया और न ही न्याय दिलाने के लिए प्रयास किए।

उन्होंने स्पष्ट आरोप लगाया कि,

“मेरे पिता की लाश पर भी राजनीति की गई। बंद कमरे में हंसी-ठिठोली करने वालों ने इंसाफ को कुचल दिया। यही वजह है कि आज तक हमें न्याय नहीं मिला।”


सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरों ने बढ़ाई हलचल

हाल ही में एक कार्यक्रम में मंच साझा करने के बाद बंद कमरे की गुफ्तगू की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुईं। इन तस्वीरों में नेताओं की मुस्कुराती तस्वीरें देखकर जनता के बीच सवाल उठे कि आखिर political rivals अचानक इतने करीब कैसे हो गए?

यश पांडेय ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा—

“अगर मंच की कोई मर्यादा होती है तो फिर बंद कमरे में किस मर्यादा का पालन किया जा रहा था? वहां की हंसी-ठिठोली किसी बड़े राजनीतिक समझौते की ओर इशारा करती है।”


23 साल पुराना दर्द आज भी ताजा

यश पांडेय ने भावुक होते हुए कहा कि उनके पिता की हत्या के बाद न तो परिवार को किसी ने सहारा दिया और न ही राजनीतिक स्तर पर मदद मिली। उन्होंने कहा,

“पारिवारिक और सामाजिक स्तर पर हमें अकेला छोड़ दिया गया। मां और मैंने हर मुश्किल का अकेले सामना किया।”

उनका यह बयान इस बात की गवाही देता है कि रायबरेली की राजनीति सिर्फ सत्ता और वर्चस्व तक सीमित रही, इंसाफ और पारिवारिक मूल्यों की यहां कोई कीमत नहीं रही।


जनता सब जानती है, समय आने पर जवाब देगी

यश पांडेय ने चेतावनी दी कि रायबरेली और ऊंचाहार की जनता सब कुछ देख रही है। उन्होंने कहा,

“जनता समय आने पर सबक सिखाएगी। राजनीति के नाम पर जो सौदेबाजी की गई है, उसका हिसाब जनता जरूर लेगी।”


निष्कर्ष

रायबरेली की राजनीति हमेशा से high voltage drama और वर्चस्व की लड़ाई के लिए जानी जाती रही है। स्वर्गीय राकेश पांडेय की हत्या के बाद जिस तरह समझौते हुए और अब विरोधी नेता एक साथ मंच पर आए, उसने जनमानस को झकझोर कर रख दिया है।

यश पांडेय का यह बयान न केवल उनके व्यक्तिगत दर्द को उजागर करता है बल्कि जिले की राजनीतिक सच्चाई को भी सामने लाता है। आने वाले समय में यह मुद्दा RaeBareli Political News और UP Elections 2025 की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।


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