रिपोर्ट: माया लक्ष्मी मिश्रा, रायबरेली, उत्तर प्रदेश, कड़क टाइम्स
रायबरेली। जिले के डलमऊ क्षेत्र में स्थित एक प्राचीन मंदिर से चोरी की गई अष्टधातु की बहुमूल्य मूर्तियों के मामले में रायबरेली पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने करीब 200 वर्ष पुरानी माता सीता, भगवान श्रीराम और लक्ष्मण की मूर्तियों को सुरक्षित बरामद करते हुए चार अभियुक्तों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जबकि एक आरोपी अब भी फरार है, जिसकी तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है। यह जानकारी मीडिया सेल रायबरेली द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस नोट में दी गई है, जिससे पूरे मामले की परत-दर-परत तस्वीर सामने आई है।
प्रेस नोट के अनुसार, गिरफ्तार अभियुक्तों में आयुष त्रिवेदी पुत्र राजू त्रिवेदी निवासी कल्लू मिश्र का पुरवा मजरे पोठई थाना डीह जनपद रायबरेली, शिवांक उर्फ शिवा पुत्र विजय कुमार मिश्रा निवासी बेहटा कलां थाना लालगंज जनपद रायबरेली हाल पता फिरोज गांधी कॉलोनी थाना कोतवाली नगर, अमन कुमार पुत्र जंगबहादुर यादव निवासी बीबा नहर थाना गदागंज तथा अभिषेक यादव पुत्र शिवबोधन निवासी पूरे माधव बख्श मजरे चकबल्लीहार थाना भदोखर शामिल हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अभियुक्तों के आपराधिक इतिहास की विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है और आवश्यकता पड़ने पर गैंग एंगल पर भी जांच आगे बढ़ाई जाएगी।
पुलिस विवेचना के दौरान यह तथ्य सामने आया कि चोरी की गई मूर्तियों को आरोपियों ने डलमऊ क्षेत्र में एक मुर्गा फार्म के पास जमीन में गाड़कर छिपा दिया था। हिरासत में लिए गए अभियुक्तों से सख्ती से पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर तीनों मूर्तियों को बरामद कर लिया। पुलिस के मुताबिक ये मूर्तियां पीली धातु यानी अष्टधातु से निर्मित हैं और इनकी उम्र करीब 200 वर्ष आंकी गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इनकी कीमत करोड़ों रुपये बताई जा रही है, जिससे यह साफ होता है कि मामला सिर्फ चोरी का नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक विरासत से जुड़े गंभीर अपराध का है।
मीडिया सेल द्वारा जारी प्रेस नोट में बरामदगी का पूरा विवरण भी साझा किया गया है। पुलिस ने तीन अष्टधातु मूर्तियों के साथ-साथ घटना में प्रयुक्त दो मोटरसाइकिलें भी बरामद की हैं, जिन्हें मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 207 के अंतर्गत सीज किया गया है। इसके अलावा 30,000 रुपये नकद भी बरामद हुए हैं, जो मुकदमा संख्या 190/2025, धारा 331(4)/305 बीएनएस से संबंधित बताए जा रहे हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि नकदी की भूमिका की भी जांच की जा रही है कि इसका संबंध चोरी से सीधे तौर पर है या किसी अन्य आपराधिक गतिविधि से जुड़ा हुआ है।
इस पूरी कार्रवाई में सर्विलांस और एसओजी टीम रायबरेली की भूमिका अहम रही। प्रेस नोट के अनुसार, निरीक्षक अरविंद यादव प्रभारी एसओजी टीम के नेतृत्व में उपनिरीक्षक चन्द्र प्रताप सिंह, शेखर बालियान, मुख्य आरक्षी कौशल किशोर, समर सिंह, अमर सिंह तथा आरक्षी विकास पाण्डेय, प्रशांत तिवारी, संदीप यादव, अनिल कुमार, अभय चौधरी और ओमकार यादव की टीम ने तकनीकी इनपुट और फील्ड वर्क के जरिए अहम सुराग जुटाए। इसके साथ ही थाना डलमऊ और थाना गदागंज पुलिस की संयुक्त टीम ने भी लगातार दबिश देकर आरोपियों को पकड़ने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
थाना डलमऊ के प्रभारी निरीक्षक श्याम कुमार पाल, थाना गदागंज के थानाध्यक्ष दयानन्द तिवारी, उपनिरीक्षक विनय कुमार पाठक, विवेक सिंह, अमित कुमार, पवन कुमार सचान, अतुल कुमार त्रिपाठी तथा आरक्षी राहुल कश्यप, अनुज कुमार शुक्ला, कमल प्रकाश, हिमांशु यादव, पीयूष पोरवाल और जसवंत इस कार्रवाई का हिस्सा रहे। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह पूरी कार्रवाई टीम वर्क और बेहतर कोऑर्डिनेशन का नतीजा है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस चोरी की साजिश काफी समय से रची जा रही थी और इसमें एक कथित पत्रकार की भूमिका भी सामने आई है, जो आरोपियों को सूचनाएं देने और योजना बनाने में मदद कर रहा था। हालांकि इस बिंदु पर पुलिस अभी जांच कर रही है और सभी तथ्यों की पुष्टि के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फरार अभियुक्त की तलाश में लगातार संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है और पुलिस का दावा है कि उसे भी जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
बरामदगी के बाद स्थानीय श्रद्धालुओं और मंदिर प्रशासन ने राहत की सांस ली है। लोगों का कहना है कि यह सिर्फ मूर्तियों की वापसी नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास और सांस्कृतिक धरोहर की रक्षा है। पुलिस प्रशासन ने भी साफ किया है कि धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर कोई लापरवाही नहीं बरती जाएगी और Heritage Crime के मामलों में सख्त से सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
