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पिता का विरोध और बेटे का हाथ मिलाना: रायबरेली की राजनीति में नई हलचल, राहुल गांधी से Viral Photo बनी चर्चा का केंद्र

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रिपोर्ट: संदीप मिश्रा, रायबरेली उत्तर प्रदेश, कड़क टाइम्स

रायबरेली। उत्तर प्रदेश की राजनीति में आए दिन बयानबाज़ी और टकराव सुर्खियों में रहते हैं। मगर इस बार रायबरेली जिले में एक तस्वीर ने राजनीतिक सरगर्मियों को नई दिशा दे दी है। यह तस्वीर है—हरचंदपुर ब्लॉक प्रमुख पियूष प्रताप सिंह की, जिन्होंने जिला कलेक्ट्रेट में आयोजित दिशा मीटिंग के दौरान कांग्रेस सांसद राहुल गांधी से हाथ मिलाया।

यह सामान्य दिखने वाला क्षण इसलिए बड़ा बन गया, क्योंकि पियूष प्रताप सिंह उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और भाजपा नेता दिनेश प्रताप सिंह के बेटे हैं। दिनेश प्रताप सिंह ने एक दिन पहले ही राहुल गांधी और प्रियंका गांधी पर बेहद तीखे शब्दों से हमला बोला था।

एक दिन पहले के हमले

राहुल गांधी के रायबरेली दौरे से पहले ही विवाद खड़ा हो गया था। मंत्री दिनेश प्रताप सिंह अपने समर्थकों के साथ हरचंदपुर में हाईवे पर धरने पर बैठ गए और “राहुल गांधी वापस जाओ” जैसे नारे लगाए। पुलिस और समर्थकों में तीखी झड़प भी हुई, लेकिन काफिला आगे बढ़ गया।

इसके बाद प्रेस वार्ता में दिनेश प्रताप सिंह ने कांग्रेस और गांधी परिवार को लेकर विवादित बयान दिए। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को “सबसे बड़ा चोर”, राहुल गांधी को “चोर का नाती” और प्रियंका गांधी को “सूपनखा” कहकर संबोधित किया।

अगले दिन वायरल हुई तस्वीर

गुरुवार को राहुल गांधी ने जिला कलेक्ट्रेट में दिशा मीटिंग की अध्यक्षता की। इस बैठक में विकास योजनाओं, मनरेगा, आवास योजना और महिला सुरक्षा पर चर्चा हुई। इसी दौरान राहुल गांधी और पियूष प्रताप सिंह के बीच हाथ मिलाने का क्षण कैमरे में कैद हुआ। पियूष ने इस तस्वीर को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया और यह फोटो कुछ ही घंटों में वायरल हो गई।

औपचारिकता या संकेत?

यह तस्वीर औपचारिकता भर थी या राजनीति में किसी नए संकेत की ओर इशारा कर रही है, इस पर बहस छिड़ गई है।

पियूष प्रताप सिंह की सफाई

इस पूरे विवाद पर पियूष प्रताप सिंह ने सफाई दी:
“मैं अपने पिता का संस्कारी पुत्र हूँ। राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन मनभेद नहीं। राहुल गांधी रायबरेली के सांसद हैं और मेरे लिए एक सम्मानित व्यक्ति हैं। यह सिर्फ औपचारिकता थी।”

सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया

सोशल मीडिया पर यह तस्वीर खूब चर्चा का विषय बनी।

पिता-पुत्र की राहें अलग?

इस तस्वीर ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या पियूष प्रताप सिंह अपने पिता से अलग राजनीतिक छवि गढ़ना चाहते हैं?

निष्कर्ष

राहुल गांधी और पियूष प्रताप सिंह की यह तस्वीर भले ही एक औपचारिक मुलाकात रही हो, लेकिन राजनीति में संकेतों का महत्व बड़ा होता है। पिता की कटु आलोचना और बेटे का हाथ मिलाना रायबरेली की राजनीति में नए समीकरणों की संभावना दिखाता है।

अब देखने वाली बात यह होगी कि आने वाले समय में यह तस्वीर केवल औपचारिक घटना साबित होती है या फिर यह रायबरेली की राजनीति में बड़ा बदलाव लाने का कारण बनती है।


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