राष्ट्रीय दंगल में सलोन के साकिर नूर बने दंगल केसरी, देशभर के पहलवानों ने दिखाया दम

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रिपोर्ट: माया लक्ष्मी मिश्रा, रायबरेली, उत्तर प्रदेश, कड़क टाइम्स

रायबरेली जनपद के परशदेपुर क्षेत्र अंतर्गत अटावां गांव में बुधवार को कुश्ती प्रेमियों के लिए यादगार दिन बन गया, जब पूर्व प्रधान स्वर्गीय दिलीप सिंह की प्रथम पुण्य तिथि के अवसर पर राष्ट्रीय दंगल प्रतियोगिता का भव्य आयोजन किया गया। सुबह से ही गांव के अखाड़े में पहलवानों की गहमागहमी और दर्शकों की भीड़ देखने को मिली। पारंपरिक ढंग से सजे अखाड़े में जैसे-जैसे मुकाबले आगे बढ़ते गए, माहौल और भी electrifying होता चला गया। ग्रामीण परिवेश में आयोजित इस national level wrestling competition ने साबित कर दिया कि आज भी कुश्ती का क्रेज गांव-देहात में पूरी तरह जिंदा है।

दंगल का सबसे बड़ा और प्रतीक्षित मुकाबला दंगल केसरी का रहा, जिसमें सलोन के जाने-माने पहलवान मो. साकिर नूर ने जम्मू-कश्मीर के दमदार पहलवान शेरू को कड़े और रोमांचक मुकाबले में पराजित कर दंगल केसरी का खिताब अपने नाम किया। दोनों पहलवानों के बीच मुकाबला काफी देर तक चला और हर दांव पर दर्शकों की सांसें थमी रहीं। इससे पहले जम्मू-कश्मीर के शेरू ने दिल्ली के पहलवान विकास को हराकर फाइनल में जगह बनाई थी, जबकि साकिर नूर ने हरियाणा के पहलवान सनी को मात देकर फाइनल का टिकट कटाया। फाइनल जीतते ही साकिर नूर के समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई और अखाड़ा तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

राष्ट्रीय दंगल में एक से बढ़कर एक exciting मुकाबले देखने को मिले। सैफई इटावा के जॉनी पहलवान और रायबरेली के छोटू पहलवान के बीच हुई कुश्ती दर्शकों के लिए खास आकर्षण रही, जिसमें छोटे कद के बावजूद जबरदस्त फुर्ती दिखाते हुए छोटू पहलवान ने जीत दर्ज की। वहीं लखनऊ के कलाम और लालगंज के वीरेंद्र पहलवान के बीच हुआ मुकाबला बेहद संतुलित रहा और अंततः बराबरी पर छूटा, जिसे देख दर्शकों ने दोनों पहलवानों की जमकर सराहना की।

महिला वर्ग की कुश्तियों ने भी दंगल में अलग ही रंग भर दिया। सूची की कोमल सिंह ने पहले डीह की नंदनी और उसके बाद डीह की ही सुधा को पराजित कर शानदार प्रदर्शन किया। महिला पहलवानों की कुश्ती में ताकत के साथ-साथ तकनीक और आत्मविश्वास साफ नजर आया, जिसने यह संदेश दिया कि कुश्ती अब केवल पुरुषों तक सीमित नहीं रही, बल्कि women wrestlers भी national level पर अपनी पहचान बना रही हैं।

अन्य मुकाबलों में बसंतीपुर के ललित पहलवान ने शिवकुमार को पराजित किया, जबकि डीह के सावन पहलवान ने जायस के घनश्याम को शिकस्त दी। हरियाणा के जॉनी पहलवान ने इटावा के सनी को हराकर अपनी मजबूत पकड़ दिखाई। लखनऊ के गोलू पहलवान ने मथुरा के अमित को मात दी, वहीं लालगंज क्षेत्र के झबरा गांव के सूरज सिंह ने लखनऊ के मो. कलाम को हराकर दर्शकों से खूब वाहवाही लूटी। हर मुकाबले के साथ अखाड़े में जोश और उत्साह बढ़ता चला गया।

दंगल प्रतियोगिता के आयोजक संजीव सिंह और संरक्षक पिंटू सिंह ने सभी अतिथियों, पहलवानों और कुश्ती प्रेमियों का आभार प्रकट करते हुए कहा कि स्वर्गीय दिलीप सिंह की स्मृति में आयोजित यह दंगल हर वर्ष और भी भव्य रूप लेगा। उन्होंने बताया कि आयोजन का उद्देश्य न केवल कुश्ती को बढ़ावा देना है, बल्कि युवाओं को नशे और गलत रास्तों से दूर रखकर खेलों से जोड़ना भी है। प्रतियोगिता का संचालन सरवर शेख और हरिश्चंद्र ने किया, जबकि रेफरी की भूमिका गुलशेर ने पूरी निष्पक्षता के साथ निभाई।

इस मौके पर सलोन विधायक अशोक कुमार कोरी, जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष विवेक सिंह, पूर्व ब्लॉक प्रमुख नरेंद्र बहादुर सिंह, आजाद सिंह, पप्पू मिश्रा, सुरेश कुमार निर्मल, अभय सिंह, एम.पी. सिंह, जयकेश सिंह, शैलेस सिंह, वीरेंद्र सिंह, जयकरन सिंह, सतीश तिवारी, रामबरन सिंह सहित बड़ी संख्या में कुश्ती प्रेमी और ग्रामीण मौजूद रहे। अखाड़े के चारों ओर बैठे दर्शक हर जीत-हार पर उत्साह से झूमते नजर आए। अटावां में आयोजित यह राष्ट्रीय दंगल न सिर्फ एक खेल प्रतियोगिता रहा, बल्कि ग्रामीण संस्कृति, परंपरा और खेल भावना का जीवंत उदाहरण बनकर लोगों के दिलों में लंबे समय तक यादगार बन गया।


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