जंगल की दुनिया से रूबरू हुए दिव्यांग बच्चे, एक्सपोज़र विजिट ने बढ़ाया आत्मविश्वास और जिज्ञासा

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रिपोर्ट: संदीप मिश्रा, रायबरेली, उत्तर प्रदेश, कड़क टाइम्स

रायबरेली। दिव्यांग बच्चों के शैक्षणिक उन्मुखीकरण और अनुभव आधारित शिक्षा को मजबूत करने की दिशा में बेसिक शिक्षा विभाग की समेकित शिक्षा इकाई द्वारा एक सराहनीय पहल की गई। राही, अमावां, हरचंदपुर और जगतपुर विकासखण्डों के विभिन्न प्रकार की दिव्यांगता से ग्रसित लगभग 50 बच्चों की Exposure Visit का आयोजन किया गया, जिसमें बच्चों को लखनऊ स्थित चिड़ियाघर और प्लेनेटोरियम का शैक्षणिक भ्रमण कराया गया। इस विशेष आयोजन ने बच्चों के चेहरे पर उत्साह और आंखों में जिज्ञासा साफ दिखाई दी।

बेसिक शिक्षा अधिकारी राहुल सिंह के दिशा-निर्देशन में आयोजित इस एक्सपोज़र विजिट का उद्देश्य कक्षा की चारदीवारी से बाहर निकलकर बच्चों को प्रकृति, जीव-जंतुओं और वैज्ञानिक जानकारियों से प्रत्यक्ष रूप से जोड़ना रहा। भ्रमण के लिए बस को खण्ड शिक्षा अधिकारी मुख्यालय धर्म प्रकाश द्वारा ब्लॉक संसाधन केंद्र से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। बच्चों में शुरू से ही यात्रा को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला।

लखनऊ चिड़ियाघर पहुंचने पर विशेष शिक्षकों ने बच्चों को बाघ, शेर, भालू, मगरमच्छ जैसे जंगली और खतरनाक जानवरों के बारे में सरल और रोचक भाषा में जानकारी दी। बच्चों ने पहली बार इतने करीब से इन जानवरों को देखा, जिससे वे रोमांचित हो उठे। इसके बाद बच्चों को Planetarium ले जाया गया, जहां उन्हें मछलियों और अन्य जलीय जीवों के साथ-साथ अंतरिक्ष और विज्ञान से जुड़ी basic जानकारी दी गई। यह अनुभव बच्चों के लिए न केवल ज्ञानवर्धक रहा, बल्कि उनके सीखने की रुचि को भी बढ़ाने वाला साबित हुआ।

इस पूरे एक्सपोज़र विजिट का व्यवस्थापन विशेष शिक्षक नरेश सक्सेना, मल्लिका सक्सेना और राजेश शुक्ला द्वारा किया गया। वहीं विशेष सहयोग के रूप में विशेष शिक्षक अभय प्रकाश श्रीवास्तव, मीना वर्मा और मनीष कुमार की भूमिका भी सराहनीय रही। लखनऊ में बच्चों के लिए विभाग की ओर से भोजन की व्यवस्था की गई, जिसमें अनूप मौर्या, विजय यादव और जयदेव शुक्ला ने सहयोग प्रदान किया। यात्रा के दौरान रास्ते में भी बच्चों के लिए जलपान की समुचित व्यवस्था की गई, जिससे किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।

चिड़ियाघर और प्लेनेटोरियम का भ्रमण कर लौटते समय दिव्यांग बच्चे बेहद खुश और उत्साहित नजर आए। बच्चों के चेहरों पर मुस्कान और बातचीत में नया आत्मविश्वास झलक रहा था। अभिभावकों ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे exposure programmes बच्चों के मानसिक विकास और सामाजिक जुड़ाव के लिए बेहद जरूरी हैं।


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