रिपोर्ट: मायालक्ष्मी मिश्रा, रायबरेली, उत्तर प्रदेश | कड़क टाइम्स
रायबरेली जिले के जगतपुर क्षेत्र में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) इन दिनों बुरी तरह उपेक्षित अवस्था में है। जहां बीमारों को इलाज मिलना चाहिए, वहां अब गंदगी, बदबू और मच्छरों का डेरा है। इलाज के लिए रोजाना यहां आने वाले सैकड़ों मरीज़ खुद को एक और बीमारी की चपेट में महसूस कर रहे हैं।
हालात दिन-ब-दिन बदतर
अस्पताल के बाहर से लेकर अंदर तक बजबजाती नालियां, कूड़े के ढेर और ओवरफ्लो डस्टबिन गंदगी की कहानी खुद बयान कर रहे हैं। मरीजों का कहना है कि अस्पताल का वातावरण ही बीमार बना रहा है। जहां सफाई सबसे ज्यादा जरूरी है, वहीं इसकी सबसे ज्यादा अनदेखी हो रही है।
स्वास्थ्य केंद्र में रोजाना 200 से 400 मरीज़ पहुंचते हैं, लेकिन जो नजारा वहां दिखता है, वो किसी सरकारी स्वास्थ्य संस्थान की गरिमा को पूरी तरह ठेस पहुंचाता है।
सफाईकर्मी नदारद, डॉक्टर अनजान
केंद्र में तैनात दो सफाईकर्मी इस गंदगी के ढेर पर काबू पाने में नाकाम साबित हो रहे हैं या कहें कि अपनी ड्यूटी के प्रति गंभीर नहीं हैं। वहीं डॉक्टर और अन्य स्टाफ अपने केबिन तक सीमित रहते हैं, परिसर की हालत पर उनकी कोई नजर नहीं पड़ती।
मरीजों और तीमारदारों का कहना है कि सफाईकर्मी कभी दिखाई नहीं देते और अधीक्षक की जिम्मेदारी पर भी अब सवाल खड़े हो रहे हैं।
मरीज़ों की शिकायतें

मरीज नितिन, सुभाष, कमलेश, सुधीर, राजवती सोनी जैसे कई लोगों ने शिकायत की है कि अस्पताल परिसर में बदबू और गंदगी के कारण बैठना भी मुश्किल हो जाता है। नालियों में महीनों से सफाई नहीं हुई है और उनमें मच्छरों की भरमार है।
राजवती सोनी ने बताया, “हम इलाज के लिए आए थे लेकिन यहां की गंदगी ने और बीमार कर दिया।”
मच्छरनाशक दवा का छिड़काव नहीं
स्थानीय लोगों का कहना है कि नालियों और खुले स्थानों पर कभी मच्छरनाशक दवा का छिड़काव नहीं होता। नतीजतन, मच्छरों की भरमार ने डेंगू, मलेरिया और वायरल बुखार जैसे रोगों का खतरा और बढ़ा दिया है।
ग्राउंड रिपोर्ट की हकीकत
कड़क टाइम्स की टीम जब मौके पर पहुंची, तो देखा कि:
- अस्पताल के चारों ओर गंदगी फैली है
- नालियां जाम और बदबूदार हैं
- बाथरूम गंदे हैं और पानी जमा है
- डस्टबिन कूड़े से भरे हैं और हटाए नहीं गए
- दीवारों और कोनों पर महीनों की धूल जमी हुई है
ये सारे दृश्य इस बात की पुष्टि करते हैं कि स्वास्थ्य केंद्र में साफ-सफाई को लेकर न तो योजना है और न ही जिम्मेदारी।
प्रशासन की चुप्पी
सवाल यह उठता है कि जब स्वास्थ्य केंद्र की ये हालत है तो जिम्मेदार अधिकारी क्या कर रहे हैं? अधीक्षक की आंखें बंद हैं या फिर जानबूझकर अनदेखी की जा रही है? क्या स्वास्थ्य विभाग को इसकी खबर नहीं है?
अगर इतनी बड़ी लापरवाही पर भी कोई कार्रवाई नहीं होती तो यह सीधा-सीधा जनहित के साथ खिलवाड़ है।
जनता की प्रमुख मांगें
- अस्पताल परिसर की तत्काल सफाई कराई जाए
- मच्छरनाशक दवा का नियमित छिड़काव किया जाए
- सफाईकर्मियों की संख्या बढ़ाई जाए
- अधीक्षक और संबंधित अधिकारियों से जवाब लिया जाए
- सफाई व्यवस्था पर निगरानी रखने के लिए नियमित निरीक्षण शुरू किया जाए
निष्कर्ष
स्वास्थ्य सेवाएं जनता के लिए होती हैं, लेकिन जब जिम्मेदार लोग लापरवाह हो जाएं तो वही सेवाएं खतरे में पड़ जाती हैं। जगतपुर CHC की स्थिति स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।
अब वक्त आ गया है कि प्रशासन जागे और तत्काल प्रभाव से केंद्र की सफाई व्यवस्था को सुचारु बनाए, वरना यहां इलाज कराने आने वाले लोग और ज्यादा बीमार होकर लौटेंगे।