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क्या आपने देखा है बदलता हुआ डाकघर? सूरत में पोस्टमास्टर जनरल का दौरा बना चर्चा का विषय?

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रिपोर्ट: माया लक्ष्मी मिश्रा, रायबरेली, उत्तर प्रदेश, कड़क टाइम्स

डाकघर—जिसे कभी केवल चिट्ठियों और मनीऑर्डर तक सीमित माना जाता था—आज तेजी से modern service system में बदल रहा है। इसी बदलाव की झलक सूरत मंडल के हालिया दौरे में देखने को मिली, जब उत्तर गुजरात परिक्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव ने डाक सेवाओं की जमीनी हकीकत का जायजा लिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि “डाक सेवा, जन सेवा” सिर्फ नारा नहीं, बल्कि ऐसा विजन है जो समाज के अंतिम व्यक्ति तक सुविधाएं पहुंचाने का माध्यम बन रहा है।

दौरे के दौरान पोस्टमास्टर जनरल ने यह स्पष्ट किया कि भारतीय डाक अब पारंपरिक ढांचे से आगे निकल चुका है। Financial inclusion, digital banking, e-commerce logistics और citizen-centric services के जरिए विभाग देश के सामाजिक और आर्थिक विकास में अहम भूमिका निभा रहा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वित्तीय वर्ष के बचे हुए समय में target oriented drive चलाकर सभी सेवाओं के लक्ष्यों को समय पर पूरा किया जाए, ताकि आम जनता को इसका सीधा लाभ मिल सके।

सूरत प्रधान डाकघर के निरीक्षण के समय उन्होंने व्यवस्था, साफ-सफाई और customer experience पर विशेष जोर दिया। उनका कहना था कि जब कोई नागरिक डाकघर में प्रवेश करे तो उसे भरोसे और सुविधा का एहसास हो। डिजिटल काउंटर, त्वरित सेवा और कर्मचारियों का व्यवहार—ये सभी बातें आज डाकघर की पहचान बन रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि public grievance का त्वरित निस्तारण विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।

पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का संदेश देते हुए पोस्टमास्टर जनरल ने ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत नानपुरा प्रधान डाकघर परिसर में वृक्षारोपण किया। यह पहल यह बताने के लिए काफी है कि डाक विभाग सिर्फ सेवाएं देने तक सीमित नहीं, बल्कि सामाजिक सरोकारों में भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है। अधिकारियों और कर्मचारियों ने इस पहल को आगे बढ़ाने का संकल्प भी लिया।

इस अवसर पर सूरत मंडल के प्रवर डाकघर अधीक्षक श्री यश जैन ने मंडल की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि सूरत मंडल ने service delivery, business growth और digital adoption के मामलों में लगातार बेहतर प्रदर्शन किया है। डाक सेवाओं से जुड़ने वाले लोगों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है और विश्वास भी मजबूत हुआ है।

इस दौरे का सबसे भावनात्मक पहलू तब सामने आया, जब पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव ने सूरत से अपने पुराने जुड़ाव को साझा किया। उन्होंने बताया कि 22 जुलाई 2003 को भारतीय डाक सेवा अधिकारी के रूप में उनकी पहली पोस्टिंग सूरत मंडल में ही हुई थी। करीब 21 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद उसी शहर में वापस आना उनके लिए केवल एक औपचारिक दौरा नहीं, बल्कि यादों से जुड़ी कर्मभूमि में लौटने जैसा अनुभव रहा। उन्होंने कहा कि सूरत ने उन्हें प्रशासन, टीमवर्क और जनसेवा के वास्तविक अर्थ सिखाए।

उन्होंने अपने शुरुआती कार्यकाल को याद करते हुए बताया कि उस समय नानपुरा प्रधान डाकघर को नए विभागीय भवन में स्थानांतरित करना, सूरत में business development के लिए अलग कार्यालय की स्थापना और वर्षों बाद डाक टिकट प्रदर्शनी का आयोजन जैसे कई अहम काम किए गए थे। ये सभी प्रयास डाक विभाग को नए आयाम देने की दिशा में थे।

इस दौरान उन्होंने उन सेवानिवृत्त कर्मचारियों से भी मुलाकात की, जिन्होंने उनके साथ वर्षों तक काम किया था। पुराने साथियों से मिलकर उन्होंने उनका हालचाल जाना और योगदान की सराहना की। यह पल कर्मचारियों के लिए भी खास रहा, क्योंकि एक वरिष्ठ अधिकारी को इतने आत्मीय रूप में देखकर स्टाफ भावुक नजर आया।

अपने संबोधन में पोस्टमास्टर जनरल ने कहा कि नई तकनीकों को अपनाकर भारतीय डाक नागरिकों की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की कोशिश कर रहा है। Digital payments, DBT services, speed delivery और last-mile connectivity जैसी सुविधाएं आज गांव-गांव तक पहुंच रही हैं। उनका मानना है कि आने वाले समय में डाकघर हर नागरिक के लिए एक भरोसेमंद service partner बनकर उभरेगा।


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