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मुख्यमंत्री पोर्टल पर तीन शिकायतें, फिर भी सन्नाटा… राहुल गांधी के गढ़ में गर्भवती मुस्लिम महिला को आखिर न्याय कब मिलेगा?

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रिपोर्ट: संदीप मिश्रा, रायबरेली, उत्तर प्रदेश, कड़क टाइम्स

रायबरेली। विकास के दावों, फाइलों पर होते हस्ताक्षरों और बड़े-बड़े राजनीतिक भाषणों के बीच अगर किसी आम इंसान की जिंदगी ही अंधेरे में डूब जाए, तो सवाल सिर्फ सिस्टम का नहीं, संवेदनाओं का भी खड़ा होता है। कुछ ऐसा ही मामला कांग्रेस के किले कहे जाने वाले और लोकसभा में राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली से सामने आया है, जहां एक गर्भवती मुस्लिम महिला न्याय के लिए दर-दर भटक रही है। तीन बार मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत, स्थानीय थाने से लेकर पुलिस अधीक्षक तक गुहार—लेकिन नतीजा अब तक शून्य। सवाल यही है कि आखिर कब मिलेगा उसे इंसाफ?

यह मामला सिर्फ एक महिला की आबरू या भावनाओं से जुड़ा नहीं है, बल्कि उसके पेट में पल रहे लगभग सात माह के गर्भ के भविष्य से भी जुड़ा है। महिला का आरोप है कि रायबरेली के डलमऊ थाना क्षेत्र के बड़ेरवा गांव निवासी दीनू सिंह ने शादीशुदा होते हुए भी उसकी मजबूरियों का फायदा उठाया। प्रेम और भरोसे के नाम पर उसे अपने जाल में फंसाया गया। जब महिला को सच्चाई का पता चला कि दीनू सिंह पहले से शादीशुदा है, तब उसने डलमऊ थाने में शिकायत दर्ज कराई। उस समय हालात को संभालने के लिए दीनू सिंह ने गवाहों के सामने लिखित सुलहनामा दिया, जिसमें यह आश्वासन दिया गया कि वह महिला को पत्नी की तरह रखेगा और दोनों अपने-अपने धर्म का पालन करेंगे।

इसके बाद दोनों आगरा जिले में पति-पत्नी की तरह रहने लगे। यहीं महिला गर्भवती हुई और एक नई जिंदगी के सपने देखने लगी। लेकिन दिसंबर 2025 में अचानक कहानी ने खतरनाक मोड़ ले लिया। दीनू सिंह के भाई रीतू सिंह ने फोन कर किसी पारिवारिक आयोजन का बहाना बनाया और दीनू सिंह को रायबरेली बुला लिया। महिला ने भरोसे में आकर उसे आगरा से भेज दिया, लेकिन यहीं से वह लापता हो गया। कई दिन बीत गए, न कोई कॉल, न कोई खबर।

घबराई महिला ने आगरा और रायबरेली पुलिस अधिकारियों के साथ-साथ मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। उसने अपने लापता पति की तलाश और अपनी जान-माल की सुरक्षा की गुहार लगाई। पुलिस जांच की बात कह ही रही थी कि इसी बीच एक और सनसनीखेज खुलासा हुआ। महिला के आगरा स्थित घर और उसके व्यावसायिक स्थल से सारा सामान गायब हो गया। बाद में पता चला कि दीनू सिंह, उसका भाई रीतू सिंह, रमाशंकर सिंह और कुछ अन्य लोग खुद को STF और CBI का कर्मचारी बताकर वहां पहुंचे थे। दीनू सिंह साथ में मौजूद था, इसलिए आसपास के लोगों को कोई शक नहीं हुआ। सभी ने समझा कि पति-पत्नी का ही सामान है। यह पूरी साजिश घर में काम करने वाली नौकरानी के बयान से सामने आई।

इसके बाद महिला को एहसास हुआ कि उसे शुरू से ही धोखा दिया जा रहा था। आरोप है कि प्यार में फंसाकर शारीरिक संबंध बनाए गए और फिर कानून से बचने के लिए यह पूरा नाटक रचा गया। पुलिस ने जब महिला को फोन कर बताया कि उसका कथित पति अपने असली घर पर अपनी पत्नी के साथ रह रहा है और अब उसे अपने साथ रखने से इनकार कर रहा है, तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। एक गर्भवती महिला, जिसके सिर पर न परिवार का साया है और न ही सिस्टम का भरोसा, वह लगातार न्याय की भीख मांग रही है।

तीन बार मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत के बावजूद कार्रवाई न होना कई सवाल खड़े करता है। क्या शिकायतकर्ता का धर्म उसके लिए इंसाफ की राह को और कठिन बना देता है? क्या Silent Crime का शिकार बनी महिलाएं यूं ही फाइलों में दबा दी जाएंगी? गर्भवती महिला का कहना है कि अब लड़ाई सिर्फ उसकी इज्जत की नहीं, बल्कि उस मासूम की भी है, जो दुनिया में आने से पहले ही अन्याय झेल रहा है।


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