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हर गली-हर घर तक पहुंचेगी स्वास्थ्य टीम… आखिर क्यों फरवरी से जनपद में शुरू हो रहा है 100 दिन का टीबी मिशन?

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रिपोर्ट: संदीप मिश्रा, रायबरेली, उत्तर प्रदेश, कड़क टाइम्स

जनपद रायबरेली में फरवरी माह से एक बड़ा और निर्णायक स्वास्थ्य अभियान शुरू होने जा रहा है, जिसने प्रशासन से लेकर आम जनता तक हलचल पैदा कर दी है। जिले में 100 दिवसीय सघन टीबी अभियान चलाया जाएगा, जिसका उद्देश्य छुपे हुए टीबी मरीजों की पहचान कर उन्हें समय पर इलाज उपलब्ध कराना और जिले को टीबी मुक्त (TB Free District) बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाना है। इस संबंध में डॉ. रतनपाल सिंह सुमन, महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य द्वारा सभी संबंधित अधिकारियों को पत्र जारी कर स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग सहित अन्य विभागों ने तैयारियां तेज कर दी हैं।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नवीन चन्द्रा ने बताया कि यह अभियान केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि ground level पर असर दिखाने वाला action plan है। उन्होंने कहा कि जिले में कई ऐसे टीबी मरीज होते हैं जो लक्षण होने के बावजूद जांच नहीं कराते, जिससे बीमारी फैलने का खतरा बना रहता है। इस अभियान का मुख्य फोकस ऐसे ही hidden TB cases को खोजकर उन्हें तुरंत treatment से जोड़ना है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें हर गली-मोहल्ले में जाकर risk group तक पहुंचेंगी, ताकि कोई भी मरीज इलाज से वंचित न रह जाए।

महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य के निर्देशानुसार यह अभियान जनभागीदारी मॉडल पर आधारित होगा। यानी यह सिर्फ स्वास्थ्य विभाग तक सीमित नहीं रहेगा। इसमें कुल 11 विभाग मिलकर काम करेंगे। जनप्रतिनिधि, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, शिक्षक, ग्राम प्रधान, पंचायत प्रतिनिधि, स्वयं सहायता समूह, माई भारत वॉलंटियर्स जैसे सामाजिक संगठन इस अभियान की रीढ़ बनेंगे। प्रशासन का मानना है कि जब तक समाज खुद जागरूक नहीं होगा, तब तक टीबी जैसी बीमारी को जड़ से खत्म करना मुश्किल है।

अभियान के तहत स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालयों में भी Awareness Programme आयोजित किए जाएंगे। छात्रों को टीबी के लक्षण, जांच प्रक्रिया और इलाज के बारे में विस्तार से बताया जाएगा, ताकि युवा वर्ग अपने परिवार और समाज में जागरूकता फैला सके। स्वास्थ्य विभाग की कोशिश है कि डर और भ्रांति को खत्म कर यह संदेश दिया जाए कि टीबी कोई अभिशाप नहीं, बल्कि पूरी तरह से curable disease है।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नवीन चन्द्रा ने साफ शब्दों में कहा कि “टीबी को छुपाना नहीं है, समय पर जांच से ही इसे खत्म किया जा सकता है।” उन्होंने बताया कि जिले के सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर टीबी की जांच और इलाज पूरी तरह निःशुल्क (free of cost) है, इसके बावजूद लोग जानकारी के अभाव में जांच नहीं कराते, जो चिंता का विषय है।

जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. अनुपम सिंह ने बताया कि इस 100 दिवसीय अभियान के दौरान high risk population की विशेष स्क्रीनिंग की जाएगी। इनमें 60 वर्ष से अधिक आयु के लोग, डायबिटीज के मरीज, कुपोषित व्यक्ति, टीबी के पुराने रोगी, टीबी मरीज के संपर्क में रहने वाले लोग, एचआईवी संक्रमित, धूम्रपान, शराब और नशा करने वाले व्यक्ति, निर्माण कार्य में लगे मजदूर, वृद्धाश्रम, अनाथालय, निराश्रित गृह और ईंट-भट्ठों पर काम करने वाले श्रमिक शामिल हैं। संभावित मरीजों की जांच कर टीबी की पुष्टि होने पर तुरंत इलाज शुरू किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि 7 दिसंबर 2024 से अब तक लगातार चल रहे अभियान के तहत जिले में कुल 8033 टीबी रोगी चिन्हित किए गए हैं, जिनमें 4875 पुरुष, 2798 महिलाएं और 360 बच्चे शामिल हैं। इनमें से 2972 मरीज पूरी तरह ठीक हो चुके हैं, जबकि वर्तमान में जिले में 5061 टीबी मरीजों का इलाज चल रहा है। ये आंकड़े बताते हैं कि यदि अभियान पूरी गंभीरता से चलाया जाए तो टीबी पर काबू पाया जा सकता है।

जिला स्वास्थ्य शिक्षा एवं सूचना अधिकारी डी.एस. अस्थाना ने टीबी के लक्षणों की जानकारी देते हुए बताया कि दो सप्ताह से अधिक खांसी, रात में पसीना आना, भूख कम लगना, वजन घटना, लगातार बुखार, बलगम के साथ खून आना, अत्यधिक थकान, सीने में दर्द, सांस लेने में दिक्कत और गर्दन में सूजन या गांठ टीबी के प्रमुख संकेत हो सकते हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि ऐसे लक्षण दिखने पर इन्हें नजरअंदाज न करें और तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जांच कराएं।


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