ग्राम चौपाल 3.0: डीएम नेहा शर्मा की नई कार्यशैली, गांवों में सीधे समाधान की पहल बनी मिसाल

Share this news

रिपोर्टर: आशीष श्रीवास्तव, ब्यूरो चीफ, उत्तर प्रदेश

गोंडा, 13 जून 2025।
गोंडा जिले में प्रशासन अब फाइलों की बजाय फील्ड पर नजर आ रहा है। जिलाधिकारी श्रीमती नेहा शर्मा ने जिस तरह से ग्राम चौपाल 3.0 को क्रियान्वित किया है, उसने ग्रामीण प्रशासन को एक नई दिशा दी है। अब जन समस्याएं सिर्फ सुनी नहीं जातीं, बल्कि उनका समाधान मौके पर ही किया जा रहा है।

डीएम की यह पहल प्रदेश भर में जमीनी प्रशासन के सफल मॉडल के रूप में चर्चा में आ गई है।


अब फाइल नहीं, फील्ड से मिल रहा समाधान

ग्राम चौपाल 3.0 केवल परंपरागत चौपाल नहीं है, बल्कि यह एक ठोस ग्रासरूट इनिशिएटिव है। इसका उद्देश्य सिर्फ शिकायतों को इकट्ठा करना नहीं, बल्कि उन्हें समझना, परखना और तत्परता से हल करना है।

जिलाधिकारी ने कार्यक्रम की शुरुआत से पहले IGRS, समाधान दिवस, और जनता दर्शन में मिली शिकायतों का विश्लेषण कराया और जिन ग्राम पंचायतों में बार-बार समस्याएं सामने आ रही थीं, उन्हें प्राथमिकता दी।


कई गांवों में खुद पहुंचीं डीएम, संवाद के साथ समाधान भी

शुक्रवार को डीएम ने विकासखंड करनैलगंज, हलधरमऊ और कटराबाजार क्षेत्र की पांच ग्राम पंचायतों — करनैलगंज, सकरौर ग्रामीण, पहाड़ापुर, बनगांव और तिलका — का दौरा किया। ग्रामीणों से प्रत्यक्ष संवाद स्थापित करते हुए उन्होंने सड़क, बिजली, जलनिकासी, शौचालय, राशन वितरण जैसे मामलों में त्वरित निर्णय लिए और संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि काम जल्द और गुणवत्तापूर्ण हो।


समस्या नहीं, समाधान केंद्र बनी चौपाल

ग्राम चौपाल अब केवल संवाद का माध्यम नहीं रह गई, बल्कि समाधान स्थल बन गई है। जिलाधिकारी की पहल यह सुनिश्चित कर रही है कि गांव के निवासी खुद प्रशासन के साथ सीधे जुड़ सकें और अपनी समस्याओं को बिचौलियों के बिना हल करवा सकें।

समस्याएं जैसे —

  • टूटे हुए संपर्क मार्ग
  • बिजली कटौती
  • लंबित विरासत मामलों
  • अधूरे शौचालय
  • अपात्रों को राशन वितरण
    पर तत्काल संज्ञान लिया गया।

जिला स्तरीय अधिकारियों की मौजूदगी से मिला बल

इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि इसमें केवल एक या दो अधिकारी नहीं, बल्कि पूरी प्रशासनिक टीम शामिल रही। मौके पर मौजूद प्रमुख अधिकारियों में थे:

  • मुख्य विकास अधिकारी अंकिता जैन
  • मुख्य राजस्व अधिकारी महेश प्रकाश
  • एसडीएम करनैलगंज यशवंत राव
  • अपर एसडीएम विशाल कुमार
  • तहसीलदार अनु सिंह
  • परियोजना निदेशक चंद्रशेखर
  • जिला विकास अधिकारी सुशील कुमार
  • पंचायत राज, प्रोबेशन और कार्यक्रम अधिकारी

हर अधिकारी ने मौके पर ही शिकायतें सुनीं और संबंधित विभाग के जरिए फौरन हल शुरू कराया।


फोकस केवल सुनवाई नहीं, असरदार और स्थायी समाधान पर

डीएम ने स्वयं यह सुनिश्चित किया कि जो समाधान दिए जा रहे हैं, वे अस्थायी नहीं, स्थायी हों। कार्यों की गुणवत्ता, समयसीमा और निगरानी की रूपरेखा भी तय की गई।

उनका कहना है कि ग्राम चौपाल का उद्देश्य लोगों का विश्वास जीतना है, और यह तभी संभव है जब हर समस्या का हल लोगों की आंखों के सामने हो।


निष्कर्ष: गोंडा बना प्रदेश के लिए उदाहरण

ग्राम चौपाल 3.0 गोंडा जिले में प्रशासन को आमजन के करीब लाने की एक सराहनीय कोशिश है। डीएम नेहा शर्मा की जमीनी समझ और तत्काल क्रियान्वयन क्षमता ने दिखा दिया कि जब प्रशासनिक इच्छा शक्ति मजबूत हो, तो बदलाव संभव है।

यह पहल अन्य जिलों के लिए भी एक अभ्यास योग्य मॉडल बन चुकी है और आने वाले समय में इसे राज्य स्तर पर अपनाए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।


Share this news
  • Related Posts

    क्या आपने देखा है बदलता हुआ डाकघर? सूरत में पोस्टमास्टर जनरल का दौरा बना चर्चा का विषय?

    Share this news

    Share this newsरिपोर्ट: माया लक्ष्मी मिश्रा, रायबरेली, उत्तर प्रदेश, कड़क टाइम्स डाकघर—जिसे कभी केवल चिट्ठियों और मनीऑर्डर तक सीमित माना जाता था—आज तेजी से modern service system में बदल रहा…


    Share this news

    दिनदहाड़े मिट्टी खोद रहे थे ट्रैक्टर, अचानक पहुंचे अफसर और मच गया हड़कंप—आखिर कब तक चलता रहता ये खेल?

    Share this news

    Share this newsरिपोर्ट: माया लक्ष्मी मिश्रा, रायबरेली, उत्तर प्रदेश, कड़क टाइम्स महराजगंज, रायबरेली। क्षेत्र में लंबे समय से चल रहे अवैध खनन को लेकर आखिरकार तहसील प्रशासन हरकत में नजर…


    Share this news

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *