रिपोर्ट: आशीष श्रीवास्तव ब्यूरो चीफ उत्तर प्रदेश कड़क टाइम्स | 02 सितम्बर 2025
गोंडा जिले में मंगलवार की सुबह विद्युत विभाग के दफ्तरों का औचक निरीक्षण हुआ। आयुक्त देवीपाटन मंडल शशि भूषण लाल सुशील जब सुबह करीब 10:30 बजे विभिन्न कार्यालयों में पहुंचे तो स्थिति चौंकाने वाली थी। कई कुर्सियां खाली मिलीं और कुल 17 अधिकारी-कर्मचारी अनुपस्थित पाए गए। इसमें एक अधिकारी और 16 कर्मचारी शामिल थे।
यह लापरवाही सामने आने के बाद पूरे जिले के सरकारी दफ्तरों में हलचल मच गई। आयुक्त ने तत्काल अनुपस्थित कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांगा और साफ कर दिया कि भविष्य में ऐसी लापरवाही पर कड़ी कार्यवाही होगी।
किन दफ्तरों से कितने कर्मचारी अनुपस्थित?
निरीक्षण के दौरान कई कार्यालयों की स्थिति सामने आई:
- मुख्य अभियंता (वितरण), मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड – 6 कर्मचारी अनुपस्थित।
- अधीक्षण अभियंता कार्यालय (विद्युत वितरण) – 2 कर्मचारी अनुपस्थित।
- अधिशासी अभियंता कार्यालय (खंड-प्रथम) – 7 कर्मचारी अनुपस्थित।
- अधिशासी अभियंता कार्यालय (खंड-द्वितीय) – 2 कर्मचारी अनुपस्थित।
कुल मिलाकर 17 लोग समय से दफ्तर नहीं पहुंचे।
आयुक्त के निर्देश

निरीक्षण के बाद आयुक्त ने कहा कि सरकारी कार्यों में ढिलाई किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी अनुपस्थित कर्मचारियों से स्पष्टीकरण लिया जाएगा और नियमानुसार कार्रवाई होगी।
उन्होंने कहा कि जनता को समय से सेवाएं देना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। कर्मचारी अगर समय पर कार्यालय नहीं आएंगे तो सीधा नुकसान जनता को उठाना पड़ेगा।
समयपालन पर सख्ती
आयुक्त ने विभागाध्यक्षों को निर्देश दिया कि वे अपने अधीनस्थ कर्मचारियों की उपस्थिति की लगातार निगरानी करें। देर से आने या अनुपस्थित रहने वालों की रिपोर्ट तुरंत तैयार कर कार्यवाही करें।
उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि शासन से पहले ही समयपालन और उपस्थिति सुनिश्चित करने के आदेश दिए गए हैं। इसके बावजूद लापरवाही सामने आई तो दोषी पर कठोर कदम उठाए जाएंगे।
जनता पर असर
विद्युत विभाग की कार्यशैली सीधे जनता से जुड़ी है। बिल सुधार, लाइन मरम्मत या ट्रांसफार्मर बदलने जैसी शिकायतों के लिए लोग दफ्तर जाते हैं। अगर कर्मचारी मौजूद न हों तो जनता को अतिरिक्त परेशानी उठानी पड़ती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि दफ्तर में समय पर अधिकारी-कर्मचारी न मिलने से छोटे-छोटे काम भी लंबित हो जाते हैं। यही वजह है कि प्रशासन अब अनुशासन पर जोर दे रहा है।
अनुशासन और कार्यसंस्कृति सुधारने की पहल
विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह के औचक निरीक्षण से सरकारी कर्मचारियों में जिम्मेदारी बढ़ेगी और कार्यसंस्कृति में सुधार होगा। नियमित मॉनिटरिंग से लापरवाही कम होगी और जनता को सेवाएं समय पर मिलेंगी।
आयुक्त ने यह भी कहा कि कार्यालयों में देरी से काम होने से सरकारी छवि प्रभावित होती है, इसलिए सभी कर्मचारियों को तय समय पर दफ्तर आना होगा।
पूरे मंडल को संदेश
गोंडा में हुई यह कार्रवाई केवल विद्युत विभाग तक सीमित नहीं मानी जा रही। इसे पूरे मंडल के सरकारी दफ्तरों के लिए चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है। अब अन्य विभागों में भी औचक निरीक्षण की संभावना बढ़ गई है।
निष्कर्ष
गोंडा में विद्युत विभाग का यह औचक निरीक्षण और 17 कर्मचारियों की अनुपस्थिति का मामला प्रशासन के अनुशासन सख्त करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। आयुक्त ने साफ कर दिया है कि समयपालन ही सरकारी कार्यकुशलता की पहली शर्त है और इसमें किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।