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गोण्डा में झूठी चोरी की कहानी का खुलासा, पुलिस ने खोला बड़ा राज

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रिपोर्ट: आशीष श्रीवास्तव, ब्यूरो चीफ, उत्तर प्रदेश, कड़क टाइम्स
दिनांक: 19 सितम्बर 2025, जनपद – गोण्डा


मनकापुर पुलिस ने किया बड़ा खुलासा

गोण्डा जिले के मनकापुर थाना क्षेत्र में एक कथित चोरी की सूचना ने लोगों को चौंका दिया। परन्तु जब पुलिस ने गहराई से जांच की, तो यह बात सामने आई कि जिस चोरी की शिकायत दर्ज कराई गई थी, वह पूरी तरह से झूठी और मनगढ़ंत थी।


क्या था पूरा मामला?

18 सितम्बर 2025 को ग्राम बन्दरहा निवासी रामलोचन पुत्र स्व. कोदई ने मनकापुर थाने में प्रार्थना पत्र देकर बताया कि जब वे मजदूरी करने बाजार गए हुए थे, तभी दो अज्ञात लोग मोटरसाइकिल से उनके घर पहुंचे। शिकायत के अनुसार, उन्होंने घर में उनकी पुत्री सावित्री को पीटा और सोने-चाँदी के जेवर तथा 20,000 रुपये नकद लेकर फरार हो गए।

इस सूचना के बाद थाना प्रभारी मनकापुर तत्काल मौके पर पहुंचे और घटना की जांच शुरू कर दी।


जांच में कैसे सामने आया सच

पुलिस को शुरू से ही मामला संदिग्ध लगा। तकनीकी और मैनुअल साक्ष्यों के आधार पर की गई जांच और विस्तृत पूछताछ के दौरान पूरा सच उजागर हो गया। पूछताछ में रामलोचन की पुत्री सावित्री ने स्वीकार किया कि चोरी की कोई घटना हुई ही नहीं थी।

उसने बताया कि उसने अपनी भाभी वंदना (जो उस समय मायके में थीं) के जेवर अपने घर की सिलाई मशीन में छिपा दिए थे।


क्यों गढ़ी गई झूठी कहानी

सावित्री ने पुलिस को बताया कि हाल के दिनों में चोरी की अफवाहें चल रही थीं। इसी कारण उसने अपने पिता से झूठा प्रार्थना पत्र दिलवाकर फर्जी चोरी की सूचना दी थी। उसका मकसद जेवर हड़प लेना था।


पुलिस की कार्रवाई

पुलिस ने छिपाए गए जेवर बरामद कर लिए और नियमानुसार कब्जे में ले लिए। पूछताछ में सच्चाई सामने आने के बाद सावित्री ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए माफी भी मांगी। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट कर दिया कि ऐसे मामलों में कानूनी कार्रवाई अनिवार्य है।


झूठी सूचना देने पर कानूनी प्रावधान

पुलिस विभाग ने चेतावनी दी है कि झूठी व फर्जी सूचना देना गंभीर अपराध है।


पुलिस की अपील

गोण्डा पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी सूचना को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की पुष्टि अवश्य करें। फर्जी व भ्रामक जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।


जनता को मिला भरोसा

पुलिस विभाग ने जनता को भरोसा दिलाया कि शांति, सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस पूरी तरह प्रतिबद्ध है। किसी भी असत्य सूचना को कतई बढ़ावा नहीं दिया जाएगा।


निष्कर्ष

यह मामला एक बड़ी सीख है। झूठी सूचनाएँ न केवल पुलिस का समय और संसाधन बर्बाद करती हैं बल्कि समाज में अव्यवस्था भी फैलाती हैं। डिजिटल युग में जब हर जानकारी तेजी से फैलती है, ऐसे में अफवाहें और भी खतरनाक साबित हो सकती हैं।

मनकापुर पुलिस की तत्परता और सख्त जांच ने यह साबित कर दिया है कि कानून के साथ छल करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।


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