रिपोर्ट: संदीप मिश्रा, रायबरेली, उत्तर प्रदेश कड़क टाइम्स
रायबरेली, 08 सितम्बर 2025
रायबरेली जिले के डलमऊ थाना क्षेत्र से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। गांव की एक महिला ने आरोप लगाया है कि दबंगों के अत्याचार से तो वह पहले से ही परेशान थी, लेकिन अब पुलिस भी रात में उसके घर में जांच के नाम पर घुसने लगी है।
यह मामला न केवल पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाता है, बल्कि महिला सुरक्षा और बेटी बचाओ अभियान की हकीकत पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करता है।
पीड़िता का आरोप
डलमऊ थाना क्षेत्र के डंगरी चक मलिक भीटी गांव की रहने वाली रेखा पत्नी बाबूलाल ने बताया कि वह और उसका परिवार गांव के दबंगों से लगातार परेशान हैं। उसका कहना है कि दबंगों की हरकतों ने बच्चों तक की जिंदगी मुश्किल बना दी है।
10 जुलाई 2025 की घटना
महिला का आरोप है कि 10 जुलाई को गांव के ही रिंकू लोध, लेखपाल पंकज वर्मा और एक अन्य व्यक्ति ने उसकी अस्मत लूटने का प्रयास किया। पीड़िता का कहना है कि उसने घटना की शिकायत थाने में दर्ज कराई, लेकिन पुलिस ने इस गंभीर आरोप को केवल मामूली मारपीट में दर्ज कर लिया।
बच्ची को जहर देने की कोशिश
महिला ने आगे बताया कि आरोपियों ने बाद में उसकी नाबालिग बेटी को प्रसाद के नाम पर जहर देने का प्रयास किया। अचानक तबीयत बिगड़ने पर बच्ची को जिला अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। हालत स्थिर होने के बाद जब महिला ने इस घटना की शिकायत पुलिस को दी तो उसे यह कहकर टाल दिया गया कि वह गांव के लोगों पर झूठे आरोप लगा रही है।
पुलिस का रवैया
रेखा का कहना है कि उसकी शिकायतों को गंभीरता से लेने के बजाय पुलिस खुद जज की भूमिका निभा रही है। महिला का आरोप है कि थाने की पुलिस हाल ही में रात में उसके घर में जांच के बहाने घुस आई, जिससे उसका और उसके बच्चों का भय और बढ़ गया है।
बेटी बचाओ अभियान पर सवाल
इस घटना ने एक बार फिर सरकारी योजनाओं पर सवाल खड़े किए हैं।
- बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान का दावा है कि हर बेटी सुरक्षित है, लेकिन हकीकत अलग है।
- महिला सशक्तिकरण कार्यक्रमों का मकसद महिलाओं को न्याय दिलाना है, लेकिन जब पुलिस ही रिपोर्ट दर्ज न करे तो यह उद्देश्य अधूरा रह जाता है।
ग्रामीणों और समुदाय की प्रतिक्रिया
गांव के लोगों का कहना है कि महिला और उसका परिवार लंबे समय से भय के माहौल में जी रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पुलिस की लापरवाही ने दबंगों के हौसले और बढ़ा दिए हैं।
दलित समुदाय के लोगों ने कहा कि अगर प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई नहीं की तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
सोशल मीडिया पर आवाज
यह मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। लोग महिला सुरक्षा को लेकर सवाल उठा रहे हैं और प्रशासन से कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। कई लोग इसे डलमऊ पुलिस की लापरवाही बताते हुए सरकार की नीतियों पर भी सवाल कर रहे हैं।
प्रशासन की चुप्पी
अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस बयान सामने नहीं आया है। वहीं, राजनीतिक दलों के स्थानीय नेता इसे मुद्दा बनाने की तैयारी में हैं।
निष्कर्ष
डलमऊ थाना क्षेत्र का यह मामला पुलिस की लापरवाही और महिला सुरक्षा के दावों पर बड़ा सवाल है। एक ओर सरकार महिला सशक्तिकरण और बेटी बचाओ जैसे अभियानों पर करोड़ों रुपये खर्च करती है, वहीं दूसरी ओर एक पीड़िता की शिकायत दर्ज न होना पूरे सिस्टम की पोल खोलता है।
अब देखना होगा कि रायबरेली पुलिस इस मामले में कितनी तेजी दिखाती है और पीड़िता को न्याय दिला पाती है या नहीं।





