रिपोर्ट: संदीप मिश्रा, रायबरेली, उत्तर प्रदेश, कड़क टाइम्स
रायबरेली महोत्सव समिति द्वारा आयोजित महोत्सव की रविवार शाम शहर के लिए यादगार बन गई, जब राष्ट्रीय ख्याति के कवियों की शानदार महफिल ने ठंड को भी पीछे छोड़ दिया और श्रोता देर रात तक साहित्य के रस में डूबे रहे। हास्य-व्यंग्य से लेकर गीत, ग़ज़ल और ओजपूर्ण कविताओं तक, मंच पर शब्दों का ऐसा जादू बिखरा कि हर उम्र के लोग मंत्रमुग्ध दिखाई दिए। कार्यक्रम का शुभारंभ अरविंद श्रीवास्तव (अध्यक्ष, भारत विकास परिषद), अतुल गुप्ता (प्रदेश अध्यक्ष, व्यापार मंडल) और संजय अवस्थी (वरिष्ठ समाजसेवी) द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। तय समय शाम चार बजे से पहले ही दर्शकों की भारी भीड़ कार्यक्रम स्थल पर जुटने लगी थी, जिससे यह साफ हो गया कि इस कवि सम्मेलन को लेकर लोगों में खासा उत्साह था।
जैसे-जैसे शाम ढलती गई, मंच पर प्रस्तुत रचनाओं ने माहौल को और भी जीवंत बना दिया। डॉ. नीता सिंह के मधुर गीतों से समां बंध गया और श्रोता भावनाओं की उस दुनिया में खो गए, जहां शब्द सीधे दिल से बात करते हैं। इसके बाद शिव किशोर खंजन की कविताओं ने दर्शकों के मन को प्रफुल्लित कर दिया। उनकी रचनाओं में सामाजिक सरोकार, जीवन के अनुभव और ओज का संतुलन साफ झलक रहा था, जिस पर श्रोता बार-बार तालियां बजाते नजर आए। ठंड के बावजूद किसी ने अपनी जगह छोड़ने की जल्दी नहीं दिखाई, क्योंकि मंच से आ रही हर प्रस्तुति audience को बांधे हुए थी।
महोत्सव प्रबंधक राकेश गुप्ता, संयोजक विजय यादव और प्रभारी आशीष पाठक ने अपने संबोधन में कहा कि साहित्य समाज को दिशा देने का कार्य करता है। ऐसे आयोजन न केवल सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ करते हैं, बल्कि युवा पीढ़ी को संस्कार, संवेदना और विचारशीलता से भी जोड़ते हैं। उनका कहना था कि आज के दौर में जब fast life और social media के बीच गहराई खोती जा रही है, ऐसे साहित्यिक मंच लोगों को ठहरकर सोचने और महसूस करने का अवसर देते हैं।
शाम का सबसे ज्यादा चर्चित और चौंकाने वाला पल तब आया, जब मंच पर आए हास्य कवि ‘नरकंकाल’। उनकी हास्य रचना शुरू होते ही पंडाल में ठहाकों की ऐसी लहर उठी कि श्रोताओं की हंसी रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी। उनकी व्यंग्यात्मक शैली, sharp observations और current affairs पर तंज ने लोगों को पेट पकड़कर हंसने पर मजबूर कर दिया। हर punch line पर तालियों की गूंज सुनाई दी और कई बार तो हंसी के बीच अगली पंक्ति सुनना भी मुश्किल हो गया। इसके बाद युवा हास्य कवि उत्कर्ष ने भी अपने हास्य पाठ से माहौल को और रंगीन कर दिया। उनकी प्रस्तुति में youth touch और contemporary humor था, जिसने खासकर युवा श्रोताओं को खूब attract किया।
इसके पश्चात कवि सौरभ शुक्ला ने कविता पाठ किया, जिनकी रचनाओं ने श्रोताओं को गंभीर चिंतन की ओर मोड़ दिया। वहीं ओज कवि खंजन की राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत कविताओं ने पूरे पंडाल में जोश भर दिया। उनकी ओजस्वी पंक्तियों पर श्रोता तालियां बजाने को मजबूर हो गए और “वाह-वाह” की आवाजें देर तक गूंजती रहीं। इसी क्रम में जब डॉ. शिप्रा ने अपने गीतों की प्रस्तुति शुरू की, तो माहौल अचानक भावनात्मक हो गया। श्रोता उनके साथ गुनगुनाने लगे और कई लोग भाव-विभोर नजर आए। उनके गीतों ने यह साबित कर दिया कि कविता और संगीत आज भी दिलों को जोड़ने की सबसे मजबूत कड़ी हैं।
कार्यक्रम का संचालन नीरज पांडे ने बेहद सहज, संतुलित और प्रभावी अंदाज में किया, जिससे कवि सम्मेलन की गति बनी रही और श्रोताओं की रुचि अंत तक कायम रही। उत्कर्ष उत्तम और ‘नरकंकाल’ ने अपने काव्य पाठ से भरपूर सराहना प्राप्त की और audience ने उन्हें देर तक तालियों से नवाजा। कार्यक्रम के अंत में महोत्सव प्रबंधक राकेश गुप्ता, संयोजक विजय यादव, प्रभारी आशीष पाठक और व्यवस्थापक राजू भाई ने सभी कवियों और अतिथियों का माला पहनाकर, अंगवस्त्र, स्मृति चिन्ह और पुष्प भेंट कर सम्मान किया।





