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जब गांव की चौपाल बनी शिक्षा का केंद्र, क्या यहीं से बदलेगा बच्चों का भविष्य?

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रिपोर्ट: माया लक्ष्मी मिश्रा, रायबरेली, उत्तर प्रदेश, कड़क टाइम्स

शिक्षा केवल स्कूल की चारदीवारी तक सीमित नहीं होती, जब पूरा समाज इसे अपनी जिम्मेदारी मान ले तो बदलाव खुद-ब-खुद दिखने लगता है। कुछ ऐसा ही नजारा इन दिनों रायबरेली जनपद के विकासखंड रोहनिया में देखने को मिल रहा है, जहां निपुण भारत मिशन के अंतर्गत विभिन्न न्याय पंचायतों में “शिक्षा चौपाल” का आयोजन कर अभिभावकों और जनसमुदाय को शिक्षा के प्रति जागरूक किया जा रहा है। यह पहल न सिर्फ सरकारी योजनाओं की जानकारी देने का माध्यम बन रही है, बल्कि गांव-गांव में शिक्षा को लेकर नई सोच और नई उम्मीद भी जगा रही है।

निपुण भारत मिशन के तहत संचालित शैक्षिक योजनाओं से आमजन को जोड़ने और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के उद्देश्य से विकासखंड रोहनिया के सभी संकुलों और न्याय पंचायतों में शिक्षा चौपाल आयोजित की जा रही है। इसी क्रम में 24 जनवरी को न्याय पंचायत इटोरा बुजुर्ग में शिक्षा चौपाल का आयोजन हुआ, जहां बड़ी संख्या में अभिभावक, शिक्षक, विद्यालय प्रबंध समिति के सदस्य और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। इसके बाद न्याय पंचायत देलौली, सरेनी, रसूलपुर, रोहनिया और उमरन में भी चौपाल लगाकर शिक्षा को लेकर खुली चर्चा की गई।

चौपाल का माहौल किसी औपचारिक मीटिंग जैसा नहीं, बल्कि बिल्कुल गांव की परंपरागत बैठकों जैसा रहा, जहां लोग खुलकर अपनी बात रख सके। अभिभावकों ने बच्चों की पढ़ाई, सीखने की गति और स्कूल से जुड़ी समस्याओं पर सवाल पूछे, वहीं शिक्षकों और अधिकारियों ने सरल भाषा में निपुण भारत मिशन के उद्देश्यों और लक्ष्यों को समझाया। यह बताया गया कि मिशन का मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि प्राथमिक कक्षाओं के बच्चे समय पर पढ़ना, लिखना और गणित की बुनियादी समझ हासिल कर सकें।

खंड शिक्षा अधिकारी डॉ. सत्य प्रकाश यादव ने बताया कि शिक्षा चौपाल के माध्यम से निपुण भारत मिशन की योजनाओं, तय मानकों और अपेक्षित परिणामों की जानकारी सीधे जनसमुदाय तक पहुंचाई जा रही है। उन्होंने कहा कि जब तक अभिभावक और समाज शिक्षा प्रक्रिया में active role नहीं निभाएंगे, तब तक किसी भी योजना की सफलता अधूरी रहेगी। शिक्षा चौपाल का उद्देश्य यही है कि स्कूल, शिक्षक, अभिभावक और समुदाय मिलकर बच्चों के learning outcome को बेहतर बनाएं।

कार्यक्रम के दौरान विद्यालय और न्याय पंचायत स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को भी सम्मानित किया गया, जिससे बच्चों में confidence और motivation दोनों देखने को मिला। कई अभिभावकों ने माना कि इस तरह के आयोजनों से उन्हें यह समझने में मदद मिली कि वे घर पर बच्चों की पढ़ाई में कैसे सहयोग कर सकते हैं। कुछ माता-पिता ने यह भी कहा कि पहली बार उन्हें सरकारी शिक्षा योजनाओं की इतनी स्पष्ट जानकारी मिली है।

शिक्षा चौपाल में विभागीय योजनाओं का भी व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। बच्चों की नियमित उपस्थिति, सीखने के स्तर का आकलन, remedial teaching और parental support जैसे मुद्दों पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों ने साफ कहा कि निपुण भारत मिशन केवल स्कूलों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह एक सामूहिक अभियान है, जिसमें पूरे समाज की सहभागिता जरूरी है। यही कारण है कि चौपाल के जरिए शिक्षा को गांव की बातचीत का हिस्सा बनाया जा रहा है।

इस पहल को और विस्तार देने की तैयारी भी पूरी कर ली गई है। निपुण भारत मिशन के अंतर्गत डीह ब्लॉक में भी शिक्षा चौपाल आयोजित की जाएंगी। न्याय पंचायत टेकारी, पोठई, अटावां, फागूपुर, खतौधन, बिरनावा और मऊ में भी इसी तरह के कार्यक्रम होंगे, जहां विद्यालय प्रबंध समिति के सदस्य, अभिभावक, शिक्षक और उत्कृष्ट छात्र-छात्राएं भाग लेंगे। उद्देश्य साफ है—हर पंचायत तक शिक्षा का संदेश पहुंचाना और बच्चों के भविष्य को मजबूत आधार देना।

ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा को लेकर अक्सर यह धारणा रही है कि यह सिर्फ स्कूल या सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन शिक्षा चौपाल इस सोच को बदलती नजर आ रही है। जब अभिभावक खुद सवाल पूछते हैं, सुझाव देते हैं और समाधान का हिस्सा बनते हैं, तब शिक्षा एक आंदोलन का रूप ले लेती है। निपुण भारत मिशन के तहत शुरू की गई यह पहल समयबद्ध लक्ष्यों की प्राप्ति की दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है।


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