रिपोर्ट: माया लक्ष्मी मिश्रा, रायबरेली, उत्तर प्रदेश, कड़क टाइम्स
रायबरेली। जिले के नसीराबाद थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम मेदापुर में जमीन विवाद को लेकर दबंगई का गंभीर मामला सामने आया है, जिसने इलाके में चर्चा का माहौल बना दिया है। गांव निवासी रामसुख पुत्र छेदीलाल ने आरोप लगाया है कि उनके पड़ोसियों और मौजूदा ग्राम प्रधान द्वारा एकजुट होकर उनकी बाउंड्रीवाल गिरा दी गई और विरोध करने पर गाली-गलौज के साथ जान से मारने की धमकी दी गई। पीड़ित का कहना है कि इस घटना से न सिर्फ उन्हें आर्थिक नुकसान हुआ, बल्कि उनका परिवार भी भय के माहौल में जीने को मजबूर है।
पीड़ित रामसुख के अनुसार, उनके पड़ोसी रामफेर, रामकुमार, अल्पना, प्रेमा तथा वर्तमान ग्राम प्रधान बृजपाल सिंह पासवान ने आपसी साजिश के तहत उनके घर के सामने बनी करीब 20 फीट लंबी और 6 फीट ऊंची बाउंड्रीवाल को तोड़ दिया। जब उन्होंने इसका विरोध किया तो आरोपियों ने अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए खुलेआम धमकी दी कि यदि उन्होंने ज्यादा आवाज उठाई तो जान से मार दिया जाएगा। रामसुख का आरोप है कि इस घटना में उन्हें करीब 50 हजार रुपये का नुकसान हुआ है।
पीड़ित ने बताया कि वह एसडीएम सलोन की अनुमति से अपने दरवाजे के सामने मिट्टी डलवाकर जमीन को ऊंचा करा रहे थे। इसी बात को लेकर पहले भी विवाद हो चुका था। इस मामले की सूचना उन्होंने पहले ही थाना नसीराबाद को दी थी और न्यायालय में मुकदमा भी दाखिल कर रखा है। आरोप है कि उसी पुरानी रंजिश को लेकर आरोपियों ने मौका देखकर उनकी बाउंड्रीवाल गिरा दी, ताकि उन्हें डराया-धमकाया जा सके और दबाव बनाया जा सके। पीड़ित का कहना है कि वह कानून के दायरे में रहकर काम कर रहे थे, इसके बावजूद उनके साथ यह घटना हुई।
घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल है। पीड़ित पक्ष का कहना है कि दबंग किस्म के लोग अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर उन्हें लगातार प्रताड़ित कर रहे हैं। मामले को लेकर ग्रामीणों में भी आक्रोश देखने को मिला है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने सख्त कदम नहीं उठाए तो ऐसे मामलों में दबंगों के हौसले और बढ़ेंगे। पीड़ित रामसुख ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि वह एक सामान्य किसान हैं और दबंगों के सामने अकेले पड़ गए हैं, इसलिए अब उन्होंने जिले के पुलिस अधीक्षक से न्याय की गुहार लगाई है।
इस पूरे मामले को लेकर ग्रामीणों का एक प्रतिनिधिमंडल पुलिस अधीक्षक डॉ. यशवीर सिंह से मिला और लिखित शिकायत सौंपते हुए निष्पक्ष जांच व सख्त कार्रवाई की मांग की। पीड़ित पक्ष का कहना है कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वह उच्च अधिकारियों और न्यायालय का दरवाजा खटखटाने को मजबूर होंगे। वहीं पूर्व प्रधान अशोक कुमार मौर्य ने भी इस घटना को गलत बताते हुए कहा कि जमीन विवाद में कानून हाथ में लेना किसी भी सूरत में सही नहीं है और प्रशासन को निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।