रिपोर्ट: संदीप मिश्रा, रायबरेली, उत्तर प्रदेश, कड़क टाइम्स
रायबरेली।
जनपद रायबरेली की राजनीति में रविवार को बदलाव देखने को मिला, जब अपना दल (सोनेलाल) की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल की सहमति के बाद जिले की सभी पांच विधानसभाओं के नवनियुक्त विधानसभा अध्यक्षों के नाम घोषित कर दिए गए। इस घोषणा के बाद जिले में सियासी हलचल तेज हो गई है और माना जा रहा है कि आगामी विधानसभा चुनाव 2027 के लिए संगठन ने अपनी तैयारी अभी से शुरू कर दी है।
जिलाध्यक्ष कुंवर सत्येंद्र पटेल ने जानकारी दी कि पार्टी हाईकमान के आदेश पर संगठन को मजबूत करने और जमीनी स्तर पर जनता से जुड़ाव बढ़ाने के लिए विधानसभा स्तर पर नई टीम बनाई गई है।
किसे मिली जिम्मेदारी
- सदर विधानसभा: अभिषेक तिवारी
- हरचंदपुर: विनय वर्मा
- सलोन: कमलेश पटेल
- सरेनी: रामू लोधी
- बछरावां: रोहित सिंह
इन सभी को अब अपने-अपने क्षेत्र में पार्टी संगठन को मजबूत करने, बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और जनता की समस्याओं को पार्टी तक पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई है।
रायबरेली की सियासत में अहम कदम
रायबरेली जनपद लंबे समय से कांग्रेस का गढ़ माना जाता है। यहां की राजनीति पर गांधी परिवार का गहरा असर रहा है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में भाजपा और सहयोगी दलों ने यहां अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिशें बढ़ाई हैं। ऐसे में अपना दल (एस) का यह संगठनात्मक बदलाव पार्टी के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
विश्लेषकों का कहना है कि विधानसभा अध्यक्षों की नियुक्ति सिर्फ औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह आगामी चुनाव की रणनीति का हिस्सा है। अब हर विधानसभा क्षेत्र में स्थानीय नेतृत्व को जिम्मेदारी दी गई है ताकि कार्यकर्ताओं में जोश और जनता में भरोसा पैदा हो सके।
अनुप्रिया पटेल की रणनीति
अपना दल (एस) की राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल पहले ही स्पष्ट कर चुकी हैं कि पार्टी सिर्फ सहयोगी दल की भूमिका में सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि अपनी स्वतंत्र पहचान बनाना चाहती है। इसीलिए प्रदेशभर में संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने का अभियान चलाया गया है। रायबरेली जैसे महत्वपूर्ण जिले में विधानसभा अध्यक्षों की नियुक्ति उसी दिशा में बड़ा कदम है।
जनता की उम्मीदें
जिले के राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यदि नए अध्यक्ष जनता से सीधे जुड़कर उनकी समस्याओं को हल करने का प्रयास करेंगे, तो पार्टी का ग्राफ तेजी से ऊपर जा सकता है। वहीं युवा वर्ग इस बदलाव को लेकर उत्साहित दिखाई दे रहा है।
निष्कर्ष
रायबरेली की राजनीति में हमेशा से राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरने की क्षमता रही है। ऐसे में अपना दल (एस) द्वारा पांचों विधानसभाओं में नए अध्यक्षों की नियुक्ति निश्चित रूप से जिले की राजनीति में नई ऊर्जा का संचार करेगी। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह टीम पार्टी को जमीनी स्तर पर कितना मजबूत बना पाती है और क्या यह कांग्रेस और भाजपा जैसी बड़ी पार्टियों को चुनौती दे पाएगी।





