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आंगनबाड़ी और बाल विकास विभाग की लापरवाही उजागर, Aadhaar Card और Admission Delay पर जताई नाराज़गी

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रिपोर्ट: आशीष श्रीवास्तव, ब्यूरो चीफ, उत्तर प्रदेश, कड़क टाइम्स
गोण्डा, 16 सितम्बर 2025


Commissioner ने खींची विभाग की लगाम

देवीपाटन मंडल के आयुक्त (Commissioner Gonda) ने आंगनबाड़ी (Anganwadi) और बाल विकास विभाग (Child Development Department) की कार्यप्रणाली पर गंभीर असंतोष जताया है।
आयुक्त के संज्ञान में आया कि 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों का पंजीकरण तो आंगनबाड़ी केंद्रों पर होता है, लेकिन जब वही बच्चे 6 साल की उम्र पार कर प्राथमिक विद्यालय (Primary School) में दाखिले के योग्य होते हैं, तो उनकी Aadhaar details शिक्षकों को उपलब्ध नहीं कराई जाती।

इस वजह से शिक्षकों को घर-घर जाकर अभिभावकों से Aadhaar Card इकट्ठा करना पड़ता है। Commissioner ने इस व्यवस्था को “time-wasting process” बताते हुए विभागीय कर्मचारियों की लापरवाही पर सख्त नाराज़गी जताई।


Admission Process पर असर

शिक्षकों ने साफ कहा कि Anganwadi कर्मचारियों की इस गैर-जिम्मेदारी से न केवल उनका समय बर्बाद होता है, बल्कि बच्चों के admission में भी अनावश्यक देरी हो जाती है।
आज के समय में जब सरकार Digital India और Ease of Education की बातें करती है, वहीं ground level पर ऐसी लापरवाहियां पूरे सिस्टम की साख पर सवाल उठाती हैं।

Commissioner ने निर्देश दिए कि प्रत्येक बच्चे का Aadhaar record समय पर प्राथमिक विद्यालय तक पहुंचे, ताकि admission बिना रुकावट के हो सके।


बेकार पड़ी Aadhaar Machines

Commissioner Gonda को यह भी शिकायत मिली कि आंगनबाड़ी केंद्रों पर आधार कार्ड बनाने हेतु दी गई Aadhaar Enrollment Machines का उपयोग नहीं हो रहा।
कई केंद्रों पर ये मशीनें महीनों से बंद पड़ी हैं, जबकि अभिभावक और बच्चे लंबी कतारों में खड़े होकर अन्य आधार केंद्रों पर परेशान हो रहे हैं।

इस लापरवाही का नतीजा यह है कि:

Commissioner ने निर्देश दिया कि सभी जिला कार्यक्रम अधिकारी (DPO) यह रिपोर्ट तैयार करें कि अब तक कितने Aadhaar Card बनाए गए और कितनी मशीनें पूरी तरह निष्क्रिय हैं।


PMMVY Scheme में गड़बड़ी

प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना (PMMVY Scheme) में भी गड़बड़ियों की शिकायत आयुक्त के सामने आई।
कई जगहों पर beneficiaries का ID और password समय पर generate नहीं हो रहा, जिसकी वजह से गर्भवती महिलाओं और नई माताओं को स्वास्थ्य केंद्रों और विभागीय कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

इस देरी की वजह से eligible महिलाओं को समय पर financial benefits नहीं मिल पाते।
Commissioner ने इस मुद्दे पर भी नाराज़गी जताते हुए कहा –
“सरकार की योजनाएं जनता तक समय पर पहुंचे, यह सभी की जिम्मेदारी है। लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”


शिक्षा व्यवस्था पर असर

शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार लगातार प्रयास कर रही है।
नई शिक्षा नीति से लेकर Digital Learning तक कई नए कदम उठाए गए हैं। लेकिन ground level पर Anganwadi और बाल विकास विभाग की coordination की कमी इस सिस्टम को कमजोर बना रही है।

Commissioner का कहना है कि यदि Admission Delay और Aadhaar Card जैसी मूल समस्याएं हल नहीं हुईं, तो सरकार की योजनाओं का लाभ जनता तक सही समय पर नहीं पहुंच पाएगा।


Commissioner का कड़ा निर्देश

आयुक्त ने अपने निर्देशों में साफ कहा कि—

उन्होंने यह भी कहा कि अगली मासिक समीक्षा बैठक में संयुक्त विकास आयुक्त (Joint Development Commissioner) के सामने सटीक रिपोर्ट पेश करना सभी की जिम्मेदारी होगी।


जनता की आवाज और ground reality

अभिभावकों का कहना है कि Anganwadi centres पर अक्सर records ठीक से maintain नहीं किए जाते।

एक अभिभावक ने बताया –
“हम लोग कई बार Anganwadi centres जाते हैं, लेकिन वहां के कर्मचारी Aadhaar Card देने में टालमटोल करते हैं। फिर हमें Primary Teachers के पास भेज दिया जाता है। आखिरकार बच्चों का admission delay हो जाता है।”


क्यों जरूरी है ये कदम?

  1. बच्चों का भविष्य – Admission Delay सीधे बच्चों की पढ़ाई को प्रभावित करता है।
  2. Digital India का सपना – जब Aadhaar जैसी बुनियादी पहचान को ही सही से manage नहीं किया जा रहा, तो digital revolution अधूरा रहेगा।
  3. महिलाओं का अधिकार – PMMVY Scheme का पैसा देरी से मिलने पर माताओं और बच्चों का स्वास्थ्य प्रभावित होता है।
  4. Government Image – जनता के बीच सरकारी योजनाओं की साख तभी बढ़ेगी, जब ground level पर काम समय पर होगा।

निष्कर्ष

Commissioner Gonda का यह कदम केवल चेतावनी नहीं बल्कि बड़ा संदेश है।
सरकारी योजनाएं तभी सफल होंगी, जब ground level पर जिम्मेदार विभाग समय पर काम करेंगे।
आंगनबाड़ी कर्मचारियों की लापरवाही से न केवल बच्चों के admission प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि माताओं को मिलने वाले आर्थिक लाभ में भी रुकावट आ रही है।

अब देखना यह होगा कि अगली मासिक समीक्षा बैठक में विभाग किस तरह की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करता है और Commissioner के निर्देशों पर कितना अमल होता है।


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