रिपोर्ट: माया लक्ष्मी मिश्रा, रायबरेली, उत्तर प्रदेश, कड़क टाइम्स
रायबरेली। एम्स रायबरेली में प्रजनन स्वास्थ्य और जिम्मेदार परिवार नियोजन को लेकर एक अहम पहल की शुरुआत की गई है। संस्थान के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग द्वारा सामुदायिक एवं पारिवारिक चिकित्सा विभाग (CFM) के सहयोग से नर्सिंग ऑफिसर्स, हॉस्पिटल अटेंडेंट्स और हाउसकीपिंग कर्मियों के लिए गर्भनिरोधक जागरूकता कार्यक्रम प्रारंभ किया गया है। इस कार्यक्रम का पहला सत्र 16 जनवरी को सफलतापूर्वक आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में स्वास्थ्यकर्मियों ने भाग लिया। यह पहल स्वास्थ्यकर्मियों के ज्ञान को सशक्त बनाकर उन्हें community level पर effective health educator के रूप में तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
यह जागरूकता कार्यक्रम चार सप्ताह तक प्रत्येक शुक्रवार को एक-एक घंटे की अवधि में आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विभिन्न गर्भनिरोधक विधियों के बारे में सही, वैज्ञानिक और व्यावहारिक जानकारी प्रदान करना, परिवार नियोजन को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करना और स्वास्थ्यकर्मियों को इस योग्य बनाना है कि वे मरीजों और आमजन को reproductive health से जुड़ी सटीक जानकारी दे सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि जब frontline health workers स्वयं जागरूक और confident होंगे, तभी समाज में family planning को लेकर सकारात्मक सोच विकसित होगी।
कार्यक्रम का उद्घाटन एम्स रायबरेली की कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर अमिता जैन द्वारा किया गया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि ऐसे awareness programs स्वास्थ्यकर्मियों की capacity building में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि परिवार नियोजन केवल जनसंख्या नियंत्रण का विषय नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के स्वास्थ्य, शिशु मृत्यु दर में कमी और overall quality of life से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि जब स्वास्थ्यकर्मी सही जानकारी के साथ समाज में जाते हैं, तो उसका impact दूरगामी होता है और एक healthy family के साथ-साथ healthy nation की नींव मजबूत होती है।
इस अवसर पर डीन (अकादमिक) प्रोफेसर नीरज कुमारी और एएमएस डॉ. नीरज श्रीवास्तव सहित प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग तथा सामुदायिक एवं पारिवारिक चिकित्सा विभाग के कई वरिष्ठ faculty members उपस्थित रहे। सभी ने इस पहल को समय की जरूरत बताते हुए स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। कार्यक्रम की गरिमा उस समय और बढ़ गई जब विभिन्न विभागों के विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए और प्रतिभागियों को खुलकर प्रश्न पूछने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम की शुरुआत में डॉ. वंदना वर्मा, विभागाध्यक्ष, प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग ने सभी गणमान्य अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गर्भनिरोधक साधनों को लेकर समाज में कई myths और misconceptions हैं, जिन्हें दूर करना बेहद जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि नर्सिंग और support staff मरीजों के सबसे अधिक संपर्क में रहते हैं, ऐसे में उनकी जानकारी और सोच का सीधा असर मरीजों के निर्णयों पर पड़ता है।
शैक्षणिक सत्र के दौरान डॉ. बनश्री नाथ ने विभिन्न परिवार नियोजन विधियों जैसे oral contraceptive pills, IUCD, injectables और permanent methods को बेहद सरल और सहज भाषा में समझाया। उन्होंने प्रत्येक विधि के फायदे, सीमाएं और उपयोग की सही प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की, ताकि प्रतिभागी न केवल खुद समझ सकें बल्कि दूसरों को भी सही guidance दे सकें। इसके बाद डॉ. अपाला और डॉ. कृष्णा सिंह द्वारा family planning से जुड़ी आम भ्रांतियों को दूर करने के लिए myth-busting session आयोजित किया गया, जिसे प्रतिभागियों ने काफी उपयोगी बताया।
सामुदायिक एवं पारिवारिक चिकित्सा विभाग से डॉ. अभय सिंह ने सरकारी योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि सरकार द्वारा परिवार नियोजन को बढ़ावा देने के लिए कई free services और incentives उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने निःशुल्क गर्भनिरोधक साधनों, जागरूकता कार्यक्रमों और outreach services की जानकारी दी, ताकि स्वास्थ्यकर्मी इन योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचा सकें।





