रिपोर्ट: माया लक्ष्मी मिश्रा, रायबरेली, उत्तर प्रदेश, कड़क टाइम्स
राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के तहत और उत्तर प्रदेश राज्य एड्स नियंत्रण समिति, लखनऊ के दिशा-निर्देशों के क्रम में जनपद रायबरेली के संपूर्ण सुरक्षा केंद्र, जिला चिकित्सालय द्वारा ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पहल की गई। इसी क्रम में 16 दिसंबर 2025 को विकासखंड दीनशाह गौरा के ग्राम कितूली में प्रातः 10 बजे से सायं 4 बजे तक एक मिनी हेल्थ कैंप का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम जिला चिकित्सालय रायबरेली के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक की अध्यक्षता में तथा एसएसके नोडल अधिकारी डॉ. ऋचा त्रिपाठी की निगरानी में शांतिपूर्ण एवं सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
स्वास्थ्य शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया और विभिन्न जरूरी जांच सेवाओं का लाभ उठाया। शिविर में पहुंचे लाभार्थियों की HIV और सिफलिस स्क्रीनिंग, टीबी जांच, हेपेटाइटिस-B एवं C टेस्ट, ब्लड शुगर जांच की गई, साथ ही जरूरत के अनुसार निःशुल्क दवाओं का वितरण भी किया गया। जांच के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों ने लोगों को बीमारियों से बचाव, नियमित जांच और समय पर उपचार के महत्व के बारे में भी जानकारी दी।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि ग्रामीण इलाकों में अक्सर लोग दूरी, जानकारी की कमी और संकोच के कारण जांच से वंचित रह जाते हैं। ऐसे में गांव स्तर पर आयोजित इस प्रकार के शिविर early detection और timely treatment में अहम भूमिका निभाते हैं। जिन लाभार्थियों को आगे इलाज या विस्तृत जांच की आवश्यकता पाई गई, उन्हें संपूर्ण सुरक्षा केंद्र, जिला चिकित्सालय रायबरेली पर संपर्क करने के लिए प्रेरित किया गया।
इस शिविर में चिकित्सा एवं सहयोगी स्टाफ की सक्रिय भागीदारी रही। कार्यक्रम में डॉ. ज्ञान प्रताप सिसोदिया (MOIC गौरा), डॉ. अशोक कुमार गुप्ता, नर्सिंग ऑफिसर शांती कुमारी, एसएसके मैनेजर मुकेश मौर्य, परामर्शदाता सुशील तिवारी, आरती सिंह, शिवम श्रीवास्तव (AIIMS), प्रीती बाला शर्मा (सुरक्षा क्लिनिक), सीमा यादव (PPTCT), लैब टेक्नीशियन आर.बी. यादव, फार्मासिस्ट नरेंद्र कुमार, ओआरडब्ल्यू प्रशांत शुक्ल, रीतू और अरविंद (TI), प्रतिभा कुमारी (CHO) सहित अन्य स्वास्थ्यकर्मी मौजूद रहे और टीम भावना के साथ सेवाएं दीं।
शिविर के दौरान क्षेत्र के ग्राम प्रधान एवं स्थानीय जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। ग्रामीणों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि गांव में ही जांच और दवा मिलने से उन्हें जिला अस्पताल के चक्कर नहीं लगाने पड़ते और समय व खर्च दोनों की बचत होती है। खासकर HIV, टीबी और हेपेटाइटिस जैसी बीमारियों को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करने में यह शिविर बेहद उपयोगी साबित हुआ।





