रायबरेली के इस गांव में बसंत पंचमी पर ऐसा क्या हुआ कि सुबह से ही उमड़ पड़ा जनसैलाब?

Share this news

रिपोर्ट: माया लक्ष्मी मिश्रा मिश्रा, रायबरेली, उत्तर प्रदेश, कड़क टाइम्स

बसंत पंचमी की सुबह जैसे ही सूर्य की पहली किरणें महराजगंज क्षेत्र के मोन गांव पर पड़ीं, पूरा इलाका आस्था, परंपरा और उत्सव के रंग में रंग गया। सैकड़ों वर्ष प्राचीन बाबा ओरीदास के मंदिर परिसर में लगने वाले ऐतिहासिक मेले का शुभारंभ होते ही गांव ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों से भी श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। मंदिर के बाहर सुबह से ही लंबी-लंबी कतारें दिखने लगीं, जहां लोग बाबा ओरीदास पर जलाभिषेक और दर्शन के लिए धैर्यपूर्वक अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए।

शुक्रवार को बसंत पंचमी के पावन अवसर पर उपजिलाधिकारी गौतम सिंह और ग्राम प्रधान श्यामकला ने विधि-विधान से हवन-पूजन कर मेले का औपचारिक शुभारंभ कराया। जैसे ही मंत्रोच्चार के साथ हवन पूर्ण हुआ, मंदिर परिसर “बाबा ओरीदास की जय” के जयकारों से गूंज उठा। हर चेहरे पर श्रद्धा, विश्वास और खुशी साफ झलक रही थी। लोगों का मानना है कि बाबा ओरीदास के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है, यही वजह है कि इस मंदिर से जुड़ी आस्था साल दर साल और गहरी होती जा रही है।

प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी बसंत पंचमी के दिन हवन-पूजन और भंडारे के आयोजन के बाद मेले की शुरुआत हुई। भंडारे में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया और सेवा भावना के साथ स्वयंसेवकों ने व्यवस्था संभाली। यह मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक मेल-जोल और सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक बन चुका है। यहां रायबरेली जनपद के अलावा उन्नाव, लखनऊ, प्रतापगढ़ जैसे आसपास के जिलों से भी श्रद्धालु और मेहमान पहुंचते हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में रौनक बढ़ जाती है।

मेले के शुभारंभ के बाद उपजिलाधिकारी गौतम सिंह ने स्वयं मेले में भ्रमण कर सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने मेला समिति के सदस्यों और प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए कि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। पुलिस बल और स्वयंसेवक लगातार निगरानी करते रहे ताकि व्यवस्था सुचारू बनी रहे। प्रशासन की सक्रियता और मेला कमेटी के सहयोग से पूरा आयोजन शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ता रहा।

मोन गांव स्थित बाबा ओरीदास का यह मंदिर वर्षों से लोगों की अटूट आस्था का केंद्र रहा है। बुजुर्ग बताते हैं कि इस मेले की परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है। समय बदला, सुविधाएं बढ़ीं, लेकिन श्रद्धा वही रही। मंदिर परिसर में लगे झूले, खिलौनों की दुकानें, चाट-खाने के स्टॉल और पूजा सामग्री की दुकानों ने मेले को एक अलग ही उत्सव का रूप दे दिया। बच्चे जहां झूलों में मस्त दिखे, वहीं बड़े-बुजुर्ग भक्ति में लीन नजर आए।

मेले का एक बड़ा आकर्षण रहा दंगल प्रतियोगिता, जिसने दर्शकों में खासा रोमांच भर दिया। बसंत पंचमी के अवसर पर आयोजित इस दंगल में गैर जनपदों और स्थानीय पहलवानों के बीच दर्जनों कुश्तियां हुईं। हर मुकाबले पर दर्शकों की तालियों और हुंकारों से माहौल गर्माता रहा। फाइनल मुकाबले में लखनऊ कैंट के कमांडो पहलवान ने कानपुर के कुलदीप पहलवान को कड़ी टक्कर देकर पराजित किया और खिताब अपने नाम किया। इससे पहले लखनऊ के सचिन, मोहित और चंदन जैसे पहलवानों ने भी अपने शानदार प्रदर्शन से दर्शकों का दिल जीत लिया।

दंगल के समापन पर आयोजक समीर सिंह उर्फ आशू सिंह द्वारा विजेता और उपविजेता पहलवानों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। पुरस्कार वितरण के दौरान खिलाड़ियों के चेहरे पर गर्व और संतोष साफ दिखाई दे रहा था। इस मौके पर आशीष सिंह, राम यश सिंह, धनंजय सिंह, मनोज सिंह, श्यामचंद सिंह, सीताराम, अमरेंद्र सिंह, विद्याकांत अवस्थी, अमरेश कुमार सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और खेल प्रेमी मौजूद रहे।


Share this news
  • Related Posts

    क्या आपने देखा है बदलता हुआ डाकघर? सूरत में पोस्टमास्टर जनरल का दौरा बना चर्चा का विषय?

    Share this news

    Share this newsरिपोर्ट: माया लक्ष्मी मिश्रा, रायबरेली, उत्तर प्रदेश, कड़क टाइम्स डाकघर—जिसे कभी केवल चिट्ठियों और मनीऑर्डर तक सीमित माना जाता था—आज तेजी से modern service system में बदल रहा…


    Share this news

    दिनदहाड़े मिट्टी खोद रहे थे ट्रैक्टर, अचानक पहुंचे अफसर और मच गया हड़कंप—आखिर कब तक चलता रहता ये खेल?

    Share this news

    Share this newsरिपोर्ट: माया लक्ष्मी मिश्रा, रायबरेली, उत्तर प्रदेश, कड़क टाइम्स महराजगंज, रायबरेली। क्षेत्र में लंबे समय से चल रहे अवैध खनन को लेकर आखिरकार तहसील प्रशासन हरकत में नजर…


    Share this news

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *