इतिहास गौरवशाली फिर भी पहचान अधूरी क्यों? लालगंज में विस्थापित राजपूत महासंघ की बैठक में उठा बड़ा सवाल?

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रिपोर्ट: संदीप मिश्रा, रायबरेली, उत्तर प्रदेश, कड़क टाइम्स

रायबरेली जनपद के लालगंज नगर स्थित एक गेस्ट हाउस में रविवार को विस्थापित राजपूत महासंघ की एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें समाज की वर्तमान स्थिति, भविष्य की दिशा और राजनीतिक भागीदारी जैसे गंभीर मुद्दों पर खुलकर चर्चा हुई। बैठक का संयोजन महासंघ के संगठन मंत्री ओम शरण सिंह द्वारा किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में समाज के गणमान्य लोग, सामाजिक कार्यकर्ता और युवा उपस्थित रहे। बैठक का माहौल पूरी तरह चिंतन और मंथन का रहा, जहां वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि यदि समाज को आगे बढ़ाना है तो शिक्षा और संगठन ही सबसे बड़ा हथियार है।

बैठक में वक्ताओं ने कहा कि राजपूत समाज का इतिहास वीरता, बलिदान और स्वाभिमान से भरा रहा है, लेकिन वर्तमान समय में समाज अपनी उस पहचान को कायम नहीं रख पा रहा है, जिसका मुख्य कारण आपसी बिखराव और संगठित प्रयासों की कमी है। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि समाज के बच्चों को शिक्षित करना और युवाओं को जागरूक करना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। जब तक समाज शिक्षा और संगठन के रास्ते पर मजबूती से नहीं चलेगा, तब तक शासन और प्रशासन में अपनी हिस्सेदारी मांगना मुश्किल होगा।

संगठन मंत्री ओम शरण सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि हमारे समुदाय का इतिहास स्वर्णिम रहा है, लेकिन आज हम अपनी पहचान के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम लोग आज भी अलग-अलग धड़ों में बंटे हुए हैं, जिसका सीधा फायदा दूसरे वर्ग उठा रहे हैं। यदि हम एक मंच पर आकर collective सोच के साथ आगे बढ़ें, तो कोई कारण नहीं कि हमें समाज और सरकार में उचित सम्मान न मिले। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे social awareness और education को प्राथमिकता दें, तभी समाज की नई तस्वीर सामने आएगी।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे रामबरन सिंह एडवोकेट ने कहा कि इतिहास के पन्ने राजपूतों की वीरता और बलिदान से भरे पड़े हैं, लेकिन दुर्भाग्यवश पिछली सरकारों ने हमारे समाज को हाशिये पर डाल दिया। उन्होंने कहा कि आज समय आ गया है कि हम अपने अधिकारों के लिए संगठित होकर आवाज उठाएं। उन्होंने केंद्र की मोदी सरकार और प्रदेश की योगी सरकार से मांग की कि विस्थापित राजपूत समाज को भी शासन और प्रशासन में उचित स्थान और भागीदारी दी जाए, ताकि समाज की वास्तविक समस्याओं का समाधान हो सके।

बैठक के दौरान यह भी कहा गया कि केवल राजनीति ही नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक स्तर पर भी समाज को मजबूत करने की जरूरत है। वक्ताओं ने सुझाव दिया कि समाज के स्तर पर education support, career guidance और social help जैसे कार्यक्रम शुरू किए जाने चाहिए, ताकि कमजोर वर्ग को मुख्यधारा से जोड़ा जा सके। कई युवाओं ने भी अपनी बात रखते हुए कहा कि वे समाज के लिए काम करना चाहते हैं, लेकिन उन्हें सही platform और guidance की जरूरत है।

बैठक के उपरांत समरसता भोज का आयोजन किया गया, जहां सभी वर्गों के लोगों ने एक साथ बैठकर तहरी भोज का आनंद लिया। यह भोज केवल भोजन तक सीमित नहीं था, बल्कि समाज में एकता और आपसी भाईचारे का प्रतीक बनकर सामने आया। लोगों ने इसे सामाजिक समरसता की दिशा में एक सकारात्मक पहल बताया।

इस अवसर पर ज्ञान दास जी महाराज, समाजसेवी मन्ना सिंह, जनवादी पार्टी के उपाध्यक्ष मन्नी सिंह, गुलाब सिंह, अजय सिंह, हिमांशु सिंह, जगत नारायण, जितेंद्र सिंह, नामवर सिंह, सावित्री देवी, दीपक मिश्रा, शिव बहादुर, राम बहादुर, राम लखन सिंह सहित सैकड़ों की संख्या में समाज के लोग मौजूद रहे। सभी ने एकजुट होकर यह संकल्प लिया कि विस्थापित राजपूत महासंघ को और मजबूत किया जाएगा और समाज की आवाज को हर स्तर तक पहुंचाया जाएगा।


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