रिपोर्ट: संदीप मिश्रा, रायबरेली, उत्तर प्रदेश, कड़क टाइम्स
रायबरेली। सरकारी स्कूल से जुड़े एक दंपती का पारिवारिक विवाद अब कानून के दायरे में आ गया है और यह मामला शिक्षा विभाग से लेकर आम जनमानस तक चर्चा का विषय बन गया है। पत्नी द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के आधार पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर ली है। आरोपों में अवैध संबंध, दहेज को लेकर उत्पीड़न, शारीरिक व मानसिक प्रताड़ना, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी जैसे संगीन पहलू सामने आए हैं। मामला जौनपुर जनपद के थाना बदलापुर क्षेत्र से संबंधित बताया जा रहा है, जहां पीड़िता की ओर से लिखित तहरीर दी गई है।
पीड़िता एक शिक्षिका है, जिसकी शादी करीब 14 वर्ष पूर्व प्रतापगढ़ जनपद के आसपुर देवसरा थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम गोविंदपुर निवासी सजीव कुमार सिंह पुत्र स्वर्गीय अम्बरीष सिंह के साथ हिंदू रीति-रिवाज से हुई थी। पीड़िता का आरोप है कि विवाह के समय उसके मायके पक्ष ने सामर्थ्य के अनुसार दहेज दिया था, लेकिन इसके बावजूद पति और उसके परिवारजन संतुष्ट नहीं थे। शादी के कुछ समय बाद से ही उस पर कम दहेज लाने के ताने दिए जाने लगे और मानसिक दबाव बनाया जाने लगा।
पीड़िता का कहना है कि उसका पति पहले से ही शिक्षक के पद पर कार्यरत था और उसकी तैनाती रायबरेली जनपद में थी। बाद में उसने स्थानांतरण भी वहीं करवा लिया। इसी दौरान पीड़िता को पति के कथित अवैध संबंधों की जानकारी मिली। आरोप है कि पति का उसी विभाग की एक अन्य शिक्षिका से नजदीकी रिश्ता बन गया था। इस बात को लेकर जब पीड़िता ने विरोध किया, तो हालात और बिगड़ते चले गए।
पीड़िता की तहरीर के अनुसार, अवैध संबंधों की जानकारी सामने आने के बाद पति का व्यवहार पूरी तरह बदल गया। आए दिन गाली-गलौज, अपमानजनक बातें और मारपीट की घटनाएं होने लगीं। पति कथित तौर पर दूसरी शिक्षिका का पक्ष लेते हुए पत्नी को नीचा दिखाता था और उसे कम दहेज लाने के लिए जिम्मेदार ठहराता था। पीड़िता का आरोप है कि कई बार उसके साथ शारीरिक हिंसा भी की गई, जिससे वह मानसिक रूप से बेहद परेशान हो गई।
मामले में सबसे गंभीर आरोप जान से मारने की धमकी को लेकर है। पीड़िता का कहना है कि उसका पति उसे डराने के लिए अक्सर कहता था कि वह अपने नाम से बड़ा accidental insurance करवा ले, क्योंकि उसका एक्सीडेंट हो सकता है। इस तरह की बातों से वह बुरी तरह डर गई और उसे अपनी जान का खतरा महसूस होने लगा। एक शिक्षिका, जो समाज को संस्कार और सुरक्षा का पाठ पढ़ाती है, खुद को असुरक्षित महसूस करने लगी।
पीड़िता ने बताया कि लगातार मिल रही धमकियों और उत्पीड़न से परेशान होकर उसने अपनी जान बचाने के लिए रायबरेली से स्थानांतरण कराने का फैसला लिया। 2 जून 2025 को उसका स्थानांतरण रायबरेली से जौनपुर जनपद में हो गया। वर्तमान में उसकी तैनाती थाना सुजानगंज क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय कुरावां में है, जो उसके ससुराल के नजदीक स्थित है। उसे उम्मीद थी कि स्थान बदलने से हालात सामान्य हो जाएंगे, लेकिन आरोप है कि उत्पीड़न का सिलसिला इसके बाद भी जारी रहा।
पीड़िता का कहना है कि जब भी उसका पति गांव आता है, तो वह बदलापुर क्षेत्र में उसके विद्यालय या आवास पर पहुंचकर गाली-गलौज करता है और धमकी देता है। उस पर लगातार mutual divorce के लिए दबाव बनाया जा रहा है। पीड़िता के अनुसार, वह किसी भी तरह के दबाव में आकर अपने अधिकारों से समझौता नहीं करना चाहती और कानून के रास्ते न्याय चाहती है।
इतना ही नहीं, पीड़िता ने तहरीर में यह भी उल्लेख किया है कि कथित रूप से पति से जुड़ी दूसरी शिक्षिका ने भी उसे फोन पर अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए धमकियां दीं। पीड़िता का आरोप है कि उसे मानसिक रूप से तोड़ने की कोशिश की जा रही है, ताकि वह चुपचाप मामला खत्म कर दे। इस पूरे घटनाक्रम से वह मानसिक तनाव में है और खुद को असहाय महसूस कर रही है।
इन तमाम आरोपों के आधार पर थाना बदलापुर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता 2023 की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि तहरीर में लगाए गए सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाएगी। जांच के दौरान कॉल रिकॉर्ड, संदेश, गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों को खंगाला जाएगा, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
यह मामला इसलिए भी सुर्खियों में है, क्योंकि इसमें शिक्षा विभाग से जुड़े लोग शामिल हैं। आमतौर पर शिक्षक समाज को दिशा देने वाले माने जाते हैं, लेकिन जब ऐसे मामलों में उनका नाम सामने आता है, तो यह व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। स्थानीय स्तर पर यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग पुलिस कार्रवाई पर नजर बनाए हुए हैं।
कानूनी जानकारों का कहना है कि इस तरह के मामलों में जांच पूरी होने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित होता है। फिलहाल, पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर ली है और आगे की कार्रवाई जांच के परिणामों पर निर्भर करेगी। पीड़िता को उम्मीद है कि उसे न्याय मिलेगा, वहीं यह देखना भी महत्वपूर्ण होगा कि जांच के बाद कानून अपना रास्ता किस दिशा में तय करता है।





