अतरेहटा में नहर का कहर, टूटे पुल से खेतों में घुसा पानी, 25 बीघा गेहूं की फसल जलमग्न, किसानों में भारी आक्रोश

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रिपोर्ट: माया लक्ष्मी मिश्रा, रायबरेली, उत्तर प्रदेश, कड़क टाइम्स

Ofcourse, रायबरेली। महराजगंज विकास खंड क्षेत्र के ग्राम अतरेहटा में नहर के पानी ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। अचानक नहर का पानी खेतों में घुस जाने से गाk 20 से 25 बीघा गेहूं की फसल पूरी तरह जलमग्न हो गई है। खेतों में भरे पानी के कारण खड़ी फसल सड़ने की कगार पर पहुंच गई है, जिससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा रही हैं। गांव में यह स्थिति नहर पर बने पुल के टूट जाने के कारण उत्पन्न हुई है, जिससे पानी की proper drainage नहीं हो पा रही और लगातार खेतों में पानी फैलता जा रहा है।

 

किसानों का कहना है कि यदि समय रहते पानी की निकासी नहीं कराई गई तो हालात और भयावह हो सकते हैं। उनका दावा है कि रात भर में ही 70 से 80 बीघा तक की गेहूं की फसल जलमग्न होकर पूरी तरह बर्बाद हो सकती है। किसानों के अनुसार गेहूं की फसल इस समय बेहद संवेदनशील अवस्था में है और लंबे समय तक पानी भरे रहने से फसल के पूरी तरह खराब होने की आशंका है। खेतों में लबालब भरे पानी को देखकर किसान बेहद मायूस नजर आ रहे हैं, क्योंकि यह फसल उनकी साल भर की कमाई का प्रमुख सहारा होती है।

घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में किसान मौके पर एकत्र हो गए और प्रशासन से तत्काल राहत कार्य शुरू कराने की मांग करने लगे। किसानों का कहना है कि उन्होंने पहले भी नहर और पुल की जर्जर स्थिति को लेकर संबंधित विभाग को अवगत कराया था, लेकिन समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। अब उसी लापरवाही का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। आक्रोशित किसानों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही नहर के पानी को नियंत्रित नहीं किया गया और टूटे पुल की मरम्मत नहीं कराई गई, तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।

मौके पर मौजूद प्रधान प्रतिनिधि नीरज कुमार ने बताया कि यह समस्या अचानक नहीं है, बल्कि लंबे समय से नहर की हालत खराब थी। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि emergency basis पर नहर का पानी रोका जाए और अस्थायी व्यवस्था कर खेतों से पानी निकाला जाए। किसान अयोध्या प्रसाद मौर्य, सत्येंद्र सिंह, जितेंद्र कुमार, गौरव मौर्य, विजय बहादुर, शिवकिशोर, दयाराम, हौसला प्रसाद, श्याम किशोर और महादेव सहित अन्य किसानों ने भी एक स्वर में प्रशासन से मदद की गुहार लगाई। किसानों ने कहा कि अगर समय पर action लिया गया तो फसल का कुछ हिस्सा बचाया जा सकता है, अन्यथा भारी नुकसान तय है।


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